एकाक्षर – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में संकल्प खन्ना और खुर्शीद पति-पत्नी है। संकल्प खन्ना की आयु करीब साठ वर्ष की है ,जो पेशे से एक प्रोफेसर है। उनका दांपत्य जीवन ठीक-ठाक चल रहा होता है। लेकिन जब से संकल्प खन्ना की रूचि सोशल -मीडिया, फेसबुक व्हाट्सएप पर बढ़ने लगी है, खुर्शीद को संकल्प खन्ना के व्यवहार में परिवर्तन महसूस होने लगा है ।ऐसी क्या वजह हो सकती है कि संकल्प खन्ना को अपनी वास्तविक दुनिया से काल्पनिक दुनिया में रहना ज्यादा पसंद आने लगा है? क्या संकल्प खन्ना के जीवन में खुर्शीद के अलावा किसी और ने जगह बना ली है ?या फिर ऐसा भी हो सकता है कि खुर्शीद बेवज़ह ऐसा- वैसा सोच रही है। कुछ भी हो सकता है। पूरी कहानी जानने के लिए सुने ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी एकाक्षर -प्रेम ,जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
एकाक्षर – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में संकल्प खन्ना और खुर्शीद पति-पत्नी है। संकल्प खन्ना की आयु करीब साठ वर्ष की है ,जो पेशे से एक प्रोफेसर है। उनका दांपत्य जीवन ठीक-ठाक चल रहा होता है। लेकिन जब से संकल्प खन्ना की रूचि सोशल -मीडिया, फेसबुक व्हाट्सएप पर बढ़ने लगी है, खुर्शीद को संकल्प खन्ना के व्यवहार में परिवर्तन महसूस होने लगा है ।ऐसी क्या वजह हो सकती है कि संकल्प खन्ना को अपनी वास्तविक दुनिया से काल्पनिक दुनिया में रहना ज्यादा पसंद आने लगा है? क्या संकल्प खन्ना के जीवन में खुर्शीद के अलावा किसी और ने जगह बना ली है ?या फिर ऐसा भी हो सकता है कि खुर्शीद बेवज़ह ऐसा- वैसा सोच रही है। कुछ भी हो सकता है। पूरी कहानी जानने के लिए सुने ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी एकाक्षर -प्रेम ,जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
एकाक्षर – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में संकल्प खन्ना और खुर्शीद पति-पत्नी है। संकल्प खन्ना की आयु करीब साठ वर्ष की है ,जो पेशे से एक प्रोफेसर है। उनका दांपत्य जीवन ठीक-ठाक चल रहा होता है। लेकिन जब से संकल्प खन्ना की रूचि सोशल -मीडिया, फेसबुक व्हाट्सएप पर बढ़ने लगी है, खुर्शीद को संकल्प खन्ना के व्यवहार में परिवर्तन महसूस होने लगा है ।ऐसी क्या वजह हो सकती है कि संकल्प खन्ना को अपनी वास्तविक दुनिया से काल्पनिक दुनिया में रहना ज्यादा पसंद आने लगा है? क्या संकल्प खन्ना के जीवन में खुर्शीद के अलावा किसी और ने जगह बना ली है ?या फिर ऐसा भी हो सकता है कि खुर्शीद बेवज़ह ऐसा- वैसा सोच रही है। कुछ भी हो सकता है। पूरी कहानी जानने के लिए सुने ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी एकाक्षर -प्रेम ,जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
दूसरा देवदास – ममता कालिया – शैफाली कपूर
एक युवा संभव हरिद्वार हर की पौड़ी अपनी नानी के यहां आया हुआ है। गंगा आरती का विहंगम दृश्य के बाद जब एक मंदिर जाता है तो उस मंदिर में उसे एक गुलाबी साड़ी पहने एक खूबसूरत युवती उसी के बगल में पूजा करती हुई नज़र आती है। संभव के मन में उस युवती के प्रति एक आकर्षण महसूस होता है, किंतु बाद में भीड़ में वह कहीं नज़र नहीं आती है इस पर संभव दुबारा उस युवती से मिलने के लिए बेहद विचलित हो जाता है। क्या पुनः दोनों का आमना-सामना हो पाएगा? क्या संभव अपने दिल की बात उससे कह पाएगा? पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी दूसरा देवदास, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में…
हरि और उसकी पत्नी ,प्रबोध के घर जाते हैं |प्रबोध की अपनी पहली पत्नी के साथ तलाक हुए बिना लीला के साथ संबंध रखना हरि की पत्नी सही नहीं लग रहा है| क्या है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं ममता कालिया की द्वारा लिखी गई कहानी और अपत्नी अंगुना की आवाज में
दर्पण – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कितने ही वर्तमान के अरमानों को कुचल कर ,इंसान भविष्य की इमारत बनाने की इच्छा तो रखता है किंतु क्या यह सच नहीं है कि जब भविष्य में जब उन इच्छाओं के पूरा होने का क्षण आता है तब तक उस इच्छा का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। ऐसा ही कुछ हो रहा है नायिका बानी के साथ। बानी जब तक मां-बाप के साथ थी तो उनके कड़े अनुशासन के कारण अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं का दमन करना पड़ता था ।आज जब बानी शादीशुदा है तो पति के नियमों के चलते उसे फिर अपनी इच्छाओं पर मौन का चोला पहनाना पड़ रहा है। इतने वर्षों के बाद जब उसकी छोटी-छोटी इच्छाओं का सम्मान किया जा रहा है तो वह क्यों उत्साह विहीन हो चुकी है ?बेहद भावुक कर देने वाली ममता कालिया की कहानी है दर्पण, जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
दर्पण – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कितने ही वर्तमान के अरमानों को कुचल कर ,इंसान भविष्य की इमारत बनाने की इच्छा तो रखता है किंतु क्या यह सच नहीं है कि जब भविष्य में जब उन इच्छाओं के पूरा होने का क्षण आता है तब तक उस इच्छा का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। ऐसा ही कुछ हो रहा है नायिका बानी के साथ। बानी जब तक मां-बाप के साथ थी तो उनके कड़े अनुशासन के कारण अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं का दमन करना पड़ता था ।आज जब बानी शादीशुदा है तो पति के नियमों के चलते उसे फिर अपनी इच्छाओं पर मौन का चोला पहनाना पड़ रहा है। इतने वर्षों के बाद जब उसकी छोटी-छोटी इच्छाओं का सम्मान किया जा रहा है तो वह क्यों उत्साह विहीन हो चुकी है ?बेहद भावुक कर देने वाली ममता कालिया की कहानी है दर्पण, जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
मेला – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में प्रयागराज में लगे कुंभ मेले का दृश्य है जहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में लोग अपने पाप को धोने के लिए संगम में डुबकी लगाने आते हैं। क्या मात्र डुबकी लगाकर पाप से मुक्त हुआ जा सकता है ?क्या वास्तव में अध्यात्म को भी एक पेशे की दृष्टि से अपनाया जाता है? आस्था ,परंपरा इन सब बातों का अद्भुत संगम है इस कहानी में। इसी बात को रोचक ढंग से आधार बनाकर ममता कालिया ने कहानी मेला का ताना-बाना बुना है,जिसे शेफ़ाली कपूर ने उतने ही अनोखे अंदाज़ से अपनी आवाज़ से निखारा है।
जेनिफर: ओ डार्लिंग, बालकनी में यह कितना खूबसूरत गुलाब है! आज अपनी एनिवर्सरी पर इसे अपने बालों में सजाऊंगी।
मैक्स: क्यों नहीं डार्लिंग, आज ही तो वह स्पेशल डे है।
पुलिस: उस बालकनी से जो गिरा है, उसकी मौत हो गई है।
जेनिफर या मैक्स – कौन उस बालकनी से गिरा था? क्या यह वाकई कोई हादसा था या कोई साजिश? और अगर यह साजिश थी तो उसके पीछे क्या कारण हो सकता है? जानने के लिए आज ही सुनिए, रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी ‘साजिश’, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में
भारत वर्ष को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए हर वर्ग के लोगों—बच्चे, बूढ़े और जवान—ने आजादी के संघर्ष में अपना अमूल्य योगदान दिया। इन महान स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहीं, अत्याचार झेले, लेकिन अपने संकल्प को टूटने नहीं दिया।
सोचिए, कितना रोमांचकारी और प्रेरणादायक होगा यदि हम इन अनुभवों को उन्हीं की जुबानी सुनें। ऐसा ही एक अमूल्य दस्तावेज है स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय जगदीश प्रसाद राजवंशी जी की किताब हवालात, राजवंशी जी जो मात्र 25 वर्ष की आयु में जेल गए और लखनऊ जेल से ही जेल में बिताए अपने अनुभवों को समेटकर यह पुस्तक लिखी। यह पुस्तक न केवल उनके संघर्षों की गाथा है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।
मेला – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में प्रयागराज में लगे कुंभ मेले का दृश्य है जहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में लोग अपने पाप को धोने के लिए संगम में डुबकी लगाने आते हैं। क्या मात्र डुबकी लगाकर पाप से मुक्त हुआ जा सकता है ?क्या वास्तव में अध्यात्म को भी एक पेशे की दृष्टि से अपनाया जाता है? आस्था ,परंपरा इन सब बातों का अद्भुत संगम है इस कहानी में। इसी बात को रोचक ढंग से आधार बनाकर ममता कालिया ने कहानी मेला का ताना-बाना बुना है,जिसे शेफ़ाली कपूर ने उतने ही अनोखे अंदाज़ से अपनी आवाज़ से निखारा है।
आखिरी लिबास – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में लेखिका एक पुरस्कार समारोह में अपने सह लेखकों के साथ दिल्ली से बरेली जा रही होती है तो अचानक उसकी नज़र एक ऐसी दुकान पर पड़ती है जिसके बोर्ड पर लिखा था ‘आखिरी लिबास’, लेखिका के मन में भय,आश्चर्य जैसी कई भावनाएं आ जाती है ।आखिरी ये कैसा नाम हुआ? पर क्या आप जानते हैं इस नाम का क्या आशय है ?लेखिका ने इस घटना से ऐसा क्या अनुभव किया? सुनिए ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी आखिरी लिबास, शैफाली कपूर की आवाज़ में
एकाक्षर – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में संकल्प खन्ना और खुर्शीद पति-पत्नी है। संकल्प खन्ना की आयु करीब साठ वर्ष की है ,जो पेशे से एक प्रोफेसर है। उनका दांपत्य जीवन ठीक-ठाक चल रहा होता है। लेकिन जब से संकल्प खन्ना की रूचि सोशल -मीडिया, फेसबुक व्हाट्सएप पर बढ़ने लगी है, खुर्शीद को संकल्प खन्ना के व्यवहार में परिवर्तन महसूस होने लगा है ।ऐसी क्या वजह हो सकती है कि संकल्प खन्ना को अपनी वास्तविक दुनिया से काल्पनिक दुनिया में रहना ज्यादा पसंद आने लगा है? क्या संकल्प खन्ना के जीवन में खुर्शीद के अलावा किसी और ने जगह बना ली है ?या फिर ऐसा भी हो सकता है कि खुर्शीद बेवज़ह ऐसा- वैसा सोच रही है। कुछ भी हो सकता है। पूरी कहानी जानने के लिए सुने ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी एकाक्षर -प्रेम ,जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
कहानी में दो अनजान लोग जब विवाह का बंधन बन जाता है ऐसे में क्या होता है ?इस इस बात को कहानी की मुख्यधारा में शामिल किया गया है|कहानी के मुख्य पात्र निशिकांत का विवाह एक साधारण रंग -रूप की युवती रजनी से हुआ है |दोनों पूरी तरीके से एक दूसरे से अपरिचित है| निशिकांत के मन में अपनी नवविवाहिता के लिए कई प्रश्न गूंज रहे हैं जैसे उसका व्यवहार कैसा होगा ?उसके साथ जीवन की दौड़ में सहारा बन पाएगी ? आदि -आदि | इन सब के बीच एक बात और जुड़ी हुई है |वह क्या है ?इसे जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी अपरिचित नयनी दीक्षित की आवाज में|
तुम हो या चाँद – Arvind saxena – Priya bhatia
कल मिरे मेहबूब क्या आ गए छत पर, जला चाँद तमाम रात चमक चमक कर।
अनकही – आर्या झा – शेफ़ाली कपूर
कुछ बातें अनकही रह जाती है। सिर्फ़ मन ही उन बातों को समझता है और दिल तक दस्तक देता है। समय कब उन बातों को छोड़ आगे बढ़ता चला जाता है और रह जाता है कुछ सिमटे हुये लम्हे। कुछ प्रेम कहानियां बस यहीं तक सिमट कर रह जाती है। कहानी के नायक और नायिका एक दूसरे से प्रेम करते हैं पर कभी अपने प्यार का इज़हार एक -दूसरे के सामने नहीं कर पाये ।आज करीब 30 साल के बाद इन दोनों की मुलाकात फिर से हो रही है। क्या जो अनकही बातें थी इन दोनो के बीच वह इस मुलाकात में सामने आ पाएगी ?जानिए आर्या झा के द्वारा लिखी गई कहानी अनकही में।
एक ऐसी मुसलमान राजकुमारी की कहानी जिसने अपनी सेना के हिंदु सेनापति के लिए अपना धर्म और राज्य सब छोड़ दिया लेकिन अपने प्रेम को ना प्राप्त कर सकी।
दूसरा देवदास – ममता कालिया – शैफाली कपूर
एक युवा संभव हरिद्वार हर की पौड़ी अपनी नानी के यहां आया हुआ है। गंगा आरती का विहंगम दृश्य के बाद जब एक मंदिर जाता है तो उस मंदिर में उसे एक गुलाबी साड़ी पहने एक खूबसूरत युवती उसी के बगल में पूजा करती हुई नज़र आती है। संभव के मन में उस युवती के प्रति एक आकर्षण महसूस होता है, किंतु बाद में भीड़ में वह कहीं नज़र नहीं आती है इस पर संभव दुबारा उस युवती से मिलने के लिए बेहद विचलित हो जाता है। क्या पुनः दोनों का आमना-सामना हो पाएगा? क्या संभव अपने दिल की बात उससे कह पाएगा? पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी दूसरा देवदास, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में…
Reviews for: Ekakashar (Part -3)