आतंकवादियों का कोई धर्म होता है ना ही इंसानियत यह यह सिर्फ महज हिंदू मुसलमानों के बीच नफरत बोने और दहशतगर्दीफैलाने का काम करते हैं कहानी में हिंदुस्तानी फौज को बदनाम करने के अभिप्राय से से निर्दोषों की जान आतंकवादियों द्वारा ली जाती है यह सब कैसे होता है क्या आतंकवादियों की मंशा पूरी हो पाती है हिंदुस्तानी फौज तक क्या होता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं डॉक्टर विकास कुमार शर्मा द्वारा लिखी गई कहानी दहशत अमित तिवारी जी की आवाज में
दिल्ली शहर में रहने वाली एक युवती है मीनू | मीनू को अक्सर एक अनजान युवती बार बार मिलती है और किसी ना किसी बहाने उसकी मदद भी करती है |अचानक एक दूसरे शहर आगरा में मीनू की मुलाकात नमिता से होती है जो हूबहू वही अनजान युवती है ,किंतु नमिता इस बात से इंकार करती है कि मीनू और उसकी मुलाकात पहले कभी हुई है | क्या यह मीनू का भ्रम है या फिर इसके पीछे कोई कहानी |जानने के लिए सुनते हैं कहानी वह कौन थी
बड़े-बूढ़े कुछ झूठ नहीं कह गए हैं कि परदेश जाए तो ऐसे चौकन्ने रहें, जैसे बुढ़ापें में ब्याह करने वाला अपनी जवान जोरू से रहता है। हम चौकन्नेपन क्या, दसकन्नेपन की सिफारिश करते हैं, वरना ईश्वर न करे किसी पर ऐसे बीते, जैसी परदेश में हम पर बीती, यानी हम साढ़े पांच हाथ के जीते-जागते मौजूद रहे और परदेश ने हमारे मुंह पर कानूनी तमाचा मारकर कुछ देर के लिए यह साबित कर दिया कि हम फौत शुद यानी मर गए।कहानी का पात्र जो परदेश में है वहां उसके साथ क्या घटना घटती है पूरा वृतांत जानने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर जी के द्वारा लिखी गई कहानी जब बात बनाए ना बनी,अमित तिवारी जी की आवाज में
उन तमाम टुकड़े-टुकड़े घटनाओं को एक दिन कहानी में पिरोकर ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ में दे दिया तो तुम जैसे बौखला गये थे। यहाँ तक लिखा तुमने कि तुम्हारी इन नितान्त अन्तरंग बातों के साथ यह सब क्यों किया मैंने, और करने ही चला तो क्यों वसुधा के बारे में सारी बातें सच-सच नहीं लिखीं-वह तो इससे हज़ार गुना उदार थी ! यह कहानी वसुधा और देवेंद्र की है जो एक टाइप इंस्टिट्यूट में एक साथ होते हैं वसुधा के जीवन की कहानी एक सप्ताहिक पत्रिका में छपती है जिसे पढ़कर लोगों में अपनी जीवन की छाया मिलती
कहानी में सुमित एक अपने कॉलेज की ही मुस्लिम लड़की सिदरा से अपने प्यार का दावा करता है हिज़ाब से सिर्फ उसकी खूबसूरत आकर्षित कर देने वाली आंखों को देख कर | दूसरी ओर मुस्लिम कौम के ही एक दूसरे युवक जीशान भी सिदरा से अपने प्यार का दावा करता है किंतु सिदरा हिज़ाब हटाकर अपना से चेहरा दिखाती है तब क्या होता है? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जुनैदद्वारा लिखी गई कहानी हिज़ाब ,अमित तिवारी की आवाज में
यह कहानी काबुलीवाला और 5 साल की छोटी बच्ची मिनी के बीच के अनोखे रिश्ते की कहानी है काबुलीवाला मिनी को प्रतिदिन बादाम और किशमिश दिया करता और ढेर सारी बातें करता किंतु एक प्रसंग के तहत काबुली वाले को जेल हो जाती है और जब वह वापस आता है तो उस समय मिनी बड़ी हो चुकी होती है क्या था उनके बीच का अनोखा रिश्ता जाने के लिए सुनते हैं रविंद्र नाथ टैगोर की लिखी कहानी काबुलीवाला अमित तिवारी जी की आवाज में
शाहनी एक बड़ी उम्र की महिला है | शाह जी के ना रहने के बाद शाहनी उनकी ऊंची हवेली और जायदाद होने के बावजूद बिल्कुल अकेली है| शेरा शाहनी के पास ही पलकर बड़ा हुआ है| आज शाहनी ने जो शाह जी के मरने के बाद उनकी अमानत को संभाल के रखा था वह वह क्यों उनसे छीना जा रहा है? उसे कौन धोखा दे रहा है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कृष्णा सोबती के द्वारा लिखी गई कहानी सिक्का बदल गया ,अंजू जेटली की आवाज में…
कहानी विदेश में रह रहे एक भारतीय परिवार की है ।जहां उन्हीं के बेटे का शादी का कार्ड आज उनके पास आया है ।कार्ड में मां -बाप का नाम भी नहीं है विदेशी संस्कृति से प्रभावित बेटे में भारतीय संस्कृति और संस्कार की छाप कहीं भी नज़र नहीं आ रही है ।ऐसा क्यों हुआ? क्या यह पीढ़ी का अंतर है या फिर देशांतर लेकिन आज जिस बात के लिए मां-बाप अपने बेटे के लिए अफ़सोस कर रहे हैं, क्या वह स्वयं इस बात के लिए जिम्मेदार हैं ?इस प्रश्न को समेटे हुए कहानी किस मोड़ पर रूकती है सुनते हैं सुदर्शन प्रियदर्शिनी की लिखी कहानी देशांतर, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में..
मेहराँ अपने हरे -भरे घर को देखती है और सुख में भीग जाती है। छह वर्ष की लंबी प्रतीक्षा के बाद उसकी गोद भरी थी। आज तीन बेटों और दो बेटियों की माँ है। मेहराँ की सास, दादी -अम्मा तो उठते -बैठते बोलती है, झगड़ ती है। झुकी कमर पर हाथ रख कर बाहर आती है, तो जो सामने हो ,उस पर बरसने लगती है। घर के पिछवाड़े जिसे दादी अम्मा अपनी चलती उम्र में कोठरी कहा करती थी। उसी में आज वह अपने पति के साथ रहती है। मेहराँ तो कुछ ना कुछ कह कर चोट करने से भी नहीं चूकती। लड़ने में तो दादी भी कम नहीं पर, दोपहर को जब नौकर अम्मा के यहाँ से अनछुई थाली उठा लाया तो मेहराँ का माथा ठनका। अम्मा के पास जाकर बोली खाने का मन ना हो तो अम्मा दूध ही पी लो। दादी अम्मा ने न हाँ, कहा न ना । मेहराँ सास के ठंडे हो रहे पैरों को छूकर याचना भरी दृष्टि से बिछुरती आँखों से बोली, अम्मा बहुओं को आशीष देती जाओ। मेहराँ के गीले कंठ में आग्रह था, विनय थी।
घबराहट में किसी ने गाड़ी का रेडियो चला दिया था। रेडियो में भी अब उतनी जिद नहीं बची थी शायद, नहीं तो रात के बारह बजे, भला कोई समय है राग यमन कल्याण बजाने का… स्वप्नमय बाबू कचहरी में कार्यरत हैं| उनका टाइपिंग में अनुभव कमाल का है| अब स्वप्नमय बाबू और रेडियो के बीच में क्या संबंध है इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं पंकज मित्र के द्वारा लिखी गई कहानी जिद्दी रेडियो अमित तिवारी जी की आवाज में
नकली नाक – Ibnesafi ( इब्नेसफी) – Nayani Dixit
इब्ने सफ़ी अपने जानदार जासूसी उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं । जिसमें बहुत सारी कल्पना और जानकारियाँ शामिल होती है। नकली नाक कहानी का मुख्य किरदार जैसे जाबिर एक चालबाज बूढ़ा है जाबिर बेहद पेचीदा श़ख्स है जिसे किसी भी किस्म का इंसानी ज़ज्बा छू भी नहीं पाता और वह आखिर में फ़रीदी जैसे होशियार डिटेक्टिव को भी चकमा देकर हर बार निकल जाता है ।क्या अंत में जाबिर पकड़ा जायेगा ?मगर कैसे? जासूसी कथा नकली नाक मेंजानिए नयनी दीक्षित की आवाज. में…
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