Credit: Josh Talk
शांति घोष का जन्म 22 नवंबर, 1916 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था| उनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ घोष था, जो प्रोफेसर और राष्ट्रवादी थे इसलिए शांति घोष पर बचपन से ही राष्ट्रभक्ति का प्रभाव था| वह बचपन से ही क्रांतिकारियों के बारे में पढ़ा करती थीं इसलिए उनका रुझान स्वतंत्रता आंदोलन की तरफ बढ़ने लगा|
साक्षर होना जीवन में सबसे बड़ा वरदान होता है अतः कविता के माध्यम से यह संदेश प्रेरित किया गया है पढ़ना लिखना हमारे जीवन के लिए कितना आवश्यक है कविता खूब पढ़ते जाना पल्लवी जी की मधुर आवाज
साल 1996 में 20 अक्टूबर को पहली बार विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस (World Osteoporosis Day) मनाया गया था। जिसकी शुरुआत यूनाइटेड किंगडम के नेशनल ऑस्टियोपोरोसिस सोसाइटी ने यूरोपीय आयोग के साथ मिलकर एक अभियान के साथ की थी।
Women’s Day Special – Breaking Barriers
हर दौर में कुछ स्त्रियाँ ऐसी होती हैं जो सीमाओं को स्वीकार नहीं करतीं—वे उन्हें बदल देती हैं।
“Breaking Barriers” उन स्त्रियों की कहानियों का विशेष संग्रह है जिन्होंने साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास के साथ समाज की रूढ़ियों और चुनौतियों को पार किया।
इन कहानियों में आपको मिलेंगी ऐसी स्त्रियों की प्रेरक यात्राएँ, जिन्होंने परिस्थितियों से लड़कर अपनी पहचान बनाई, अपने सपनों को सच किया और दूसरों के लिए रास्ते खोले।
ये सिर्फ संघर्ष की कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उम्मीद, आत्मबल और परिवर्तन की कहानियाँ हैं—जो हमें याद दिलाती हैं कि हर बाधा के पार एक नई संभावना छिपी होती है।
इस Women’s Day पर सुनिए उन आवाज़ों को
जो कहती हैं — सीमाएँ टूट सकती हैं, अगर हिम्मत हो।
आपको चित्तौर का सिंहासन सुखद हो, देश की श्री-वृद्धि हो, हिन्दुओं का सूर्य मेवाड़-गगन में एक बार फिर उदित हो। भील, राजपूत, शत्रुओं ने मिलकर महाराणा का जयनाद किया, दुन्दुभि बज उठी। मंगल-गान के साथ सपत्नीक हम्मीर पैतृक सिंहासन पर आसीन हुए। अभिवादन ग्रहण कर लेने पर महाराणा ने महिषी से कहा-क्या अब भी तुम कहोगी कि तुम हमारे योग्य नहीं हो?इस पूरी कथा को जाने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी चित्तौड़ निधि मिश्रा की आवाज में
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