रघु और अरुणा दो मासूम बच्चे हैं | रघु के पिता भी विधुर है |दादी उन दोनों बच्चों का ख्याल रखती है |रघु के पिता का पुनर्विवाह मासूम रघु के जीवन में क्या बदलाव लाता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण की लिखी बेहद मार्मिक कहानी अतीत की एक ढीठ खिडक़ी पूजा श्रीवास्तव जी की आवाज में
कुंभ मेला केवल आस्था और परंपरा का पर्व नहीं, यह खगोलीय घटनाओं और ज्योतिषीय गणनाओं से भी गहराई से जुड़ा है। कुंभ का आयोजन तब होता है जब ग्रह-नक्षत्रों का विशेष संयोग बनता है, जो इसे अत्यधिक पवित्र बनाता है।
ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव:
जब गुरु (बृहस्पति) सिंह, कुंभ, या अन्य विशेष राशियों में प्रवेश करते हैं और सूर्य और चंद्रमा की स्थिति अनुकूल होती है, तब कुंभ मेले का समय तय होता है। यह संयोग सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और इसे आत्मा की शुद्धि के लिए उपयुक्त बनाता है।
ज्योतिष के अनुसार:
कुंभ में स्नान और ध्यान करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता, शांति और आध्यात्मिक उन्नति आती है। यह खगोलीय शक्तियों के माध्यम से आत्मा और ब्रह्मांड के बीच के संबंध को सुदृढ़ करता है।
गाथा के साथ जानिए कुंभ और ज्योतिष के इस अद्भुत संगम की कहानियां।
प्रेम में छली गयी स्त्री – ये कहानी है एक अत्यंत सुंदर युवती निम्मी की .. जो वर्षों बाद एक विवाह में शामिल होने वापस अपने घर जा रही है । रास्ते में ट्रेन में उसकी सहयात्री निकलती है उसके बचपन की सखी और फिर याद आती है वो सब बातें जो उस भाग्यवान रूपवती के विवाह निश्चित होने और उसके टूटने की कई घटनाओं से जुड़ी थी । … निम्मी की सहेली ने उसे ऐसा क्या बताया की निम्मी ने आधे रास्ते से ही वापसी कर ली। क्यों नहीं जा पायी निम्मी फिर उस घर में वापस ….
बदरूनिसा.. जैसा रूप यौवन,उससे भी मीठा गला। पहले पहल उसका संगीत ही खींच ले गया था । फिर उसके रूप ने मोहपाश में ऐसा बंधा की दो दिन अपनी बदरू से ना मिलते जो जैसे साँस ही ना आती थी । उनकी जान थी वो फिर भी थी तो वो एक गाने वाली। वक़्त के साथ एक नामी परिवार के वारिस होने की ज़िम्मेदारी में उनकी बदरु कहीं पीछे छूट गयी । और फिर सालो बाद आया उसका वो पैग़ाम … “ एक बार मिल लीजिए , आपको आपकी अमानत सौपनी है “ क्या थी वो अमानत ? सेठ जी को अपनी पूरी साख मिट्टी में मिलती दिख रही थी । क्या सेठ जी बदरु से मिलने गए। क्या वो जान सके की किस अमानत की बात कर रही थी बदरूनिस्सा, और अब Iक्यों ? एक बेहतरीन कहानी शिवानी जी की लेखनी से … “कौन “
एक फौजी की जिंदगी से रूबरू कराती कहानी जहां पर उसका अपना प्रेम और उसके देश के प्रति प्रेम के बीच में वह देश प्रेम को चुनता है ऐसी कहानी राजू की है जो एक फौजी है और जिसकी शादी उसके बचपन की दोस्त रूपा से होती है वह रूपा से अथाह प्रेम करता है किंतु जब देश को उसकी जरूरत होती है तो देश लिए तो हंसते-हंसते अपनी जान भी न्योछावर कर देता है पवनेश ठाकुराठी की बेहद मार्मिक कहानी पूजा श्रीवास्तव जी की आवाज में ।
शान्तनु, अशोक की नीलांजना दीदी को , दीदी कभी नहीं बुला पाया. शान्तनु का किशोर मन शायद नीलांजना के रूप सौन्दर्य से इतना प्रभावित नहीं था जितना उसकी कुशाग्र बुद्धि और आत्मविश्वास से भरे सौम्य व्यक्तित्व से। .. .. शान्तनु का किशोरावस्था का प्यार क्या नीलांजना समझ पायी थी? क्या परिवार के सहयोग के बिना भी नीलांजना अपने भविष्य को सवार पायी थी? क्यो शान्तनु ने नीलांजना को सम्बोधित किया वीरांगना के नाम से , जानिए मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी वीरांगना में
गीति और अनिरुद्ध का प्रेम विवाह हुआ था, किंतु आज एक जरा सी बात पर दोनों का जमकर झगड़ा हुआ| गीति इस झगड़े के बाद अनिरुद्ध का घर छोड़ने का निर्णय कर लेती है किंतु कहानी के एक प्रसंग में गीति अपने निर्णय पर विचार करने लग जाती है |क्या है कहानी का वह प्रसंग जो गीति को अपने निर्णय को बदलने पर मजबूर कर देता है |क्या होगा गीति और अनिरुद्ध के वैवाहिक का ?जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा लिखी गई कहानी टिटहरी ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में….
दुख केवल चित्तकी एक वृत्ति है सत्य है केवल आनंद एक व्यक्ति जो अपने पारिवारिक तरह से बहुत दुखी होता है किंतु इस दुख की को त्याग कर किस प्रकार आनंद की अनुभूति करता है कहानी मोहन राकेश के द्वारा लिखी गई कहानी झाँकी भूपेश पांड्या की आवाज में
साँस लेना भी कैसी आदत है जीये जाना भी क्या रवायत है कोई आहट नहीं बदन में कहीं कोई साया नहीं है आँखों में पाँव बेहिस हैं, चलते जाते हैं इक सफ़र है जो बहता रहता है कितने बरसों से, कितनी सदियों से जिये जाते हैं, जिये जाते हैं आदतें भी अजीब होती मोहनलाल की जीवन को दर्शाती यह कहानी विभिन्न पड़ाव से गुजरती हुई अब चरण में पहुंच चुकी है जब उस चरण में पहुंच गई है जब वहअपनी जीवन को समाप्त करना चाह रहा है | कैसी थी उसकी जीवन यात्रा ?? इस मार्मिक कहानी को सुनते हैं अमित तिवारी जी की आवाज में, मीरा राम निवास द्वारा लिखी कहानी जीवन यात्रा
कहानी का नायक कड़ाके की सर्दी में प्लेटफार्म में अपने गाड़ी के आने का इंतजार कर रहा है |नायक एक गरीब तबके का है किंतु दूसरे से मांगे हुए ओवरकोट पहनकर अपने को रौबदार महसूस कर रहा है | प्लेटफार्म में ज्यादातर यात्री गरीब तबके से ही है | तभी प्लेटफार्म में उसकी मुलाकात एक लड़के से होती है जो कड़ाके की सर्दी में गर्म कपड़े नहीं पहने हुए हैं | नायक उसे अपने बिस्तार पर जगह देता है | उस लड़के के चले जाने के बाद नायक सोच में पड़ जाता है | आखिर उसकी सोच क्या है ?पूरी कहानी सुनने के लिए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध द्वारा लिखी गई कहानी जंक्शन सुमन वैद्य जी की आवाज में
Reviews for: Ateet Ki Ek Deeth Khidki (अतीत की एक ढीठ खिडक़ी)
Average Rating
pragati sharma