Female Protrayal in Bollywood with Anandita Bhasin
Female Protrayal in Bollywood with Anandita Bhasin (Part – 2)
कहानी में लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा एक प्रश्न उठाया है क्या दहेज की समस्या केवल लड़के वाले खड़ी करते हैं? कहानी सुनकर इस बात की सार्थकता जानते हैं पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
चारों कुंभ स्थलों का महत्व: भारतीय संस्कृति का आध्यात्मिक चमत्कार
भारत में चार स्थान ऐसे हैं, जो कुंभ मेले के आयोजन का पवित्र केंद्र बनते हैं – प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इन स्थलों का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि ये भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक भी हैं।
प्रयागराज: गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम। यहां कुंभ में स्नान से जीवन की शुद्धि और पापों का नाश होता है।
हरिद्वार: गंगा नदी का प्रवेश द्वार। यहां स्नान से मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
उज्जैन: क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित, यह स्थल भगवान महाकालेश्वर से जुड़ा है। यहां कुंभ अध्यात्म और शिव आराधना का केंद्र है।
नासिक: गोदावरी नदी के तट पर बसा यह स्थान रामायण और अमृत मंथन की कहानियों से जुड़ा है।
चारों स्थलों पर कुंभ मेला एक ऐसा अनुभव है, जो आस्था, परंपरा और आध्यात्मिकता को जीवंत करता है।
गाथा के साथ जानिए इन पवित्र स्थलों की कहानियां और इनके महत्व की गहराई।
70 वर्षीय विधुर रिटायर लेफ्टिनेंट केशव शर्मा की मित्रता अपने ही जैसे मिस्टर कण्णन के साथ हो जाती है| वे वे एक दूसरे के साथ गोल्फ खेलते ,बातें करते और अच्छा समय बिताते | वे एक-दूसरे के बेहद अंतरंग मित्र बन जाते हैं |केशव पूरे सप्ताह मिस्टर कण्णन से नहीं मिल और उनके बारे में कोई समाचार नहीं प्राप्त कर पाते तो वह बेहद व्यग्र हो जाते हैं |क्या हुआ था मिस्टर कण्णन को ?क्या यह मित्रता और प्रगाढ़ हो पाएगी? जानते हैं मनीषा को श्रेष्ठ द्वारा लिखी गई कहानी अंतरंग , पूजा श्रीवास्तव की आवाज में
इस गाथा में हम कुंभ मेले के प्रकारों की रोचक और विस्तृत कहानी साझा करेंगे। दरअसल, कुंभ मेला चार प्रकार का होता है- कुंभ, अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ। पूर्ण कुंभ: 12 वर्षों में एक बार
अर्ध कुंभ: हर 6 साल में
महाकुंभ: 144 वर्षों में एक बार
कुंभ स्नान: विशेष ग्रह-नक्षत्र योग में
हर कुंभ का अपना महत्व, अपनी महिमा है
1947 में हुए देश के बँटवारे ने देश के नक़्शों और सीमाओं के साथ ना जाने कितने परिवारो और लोगों की ज़िन्दगी हमेशा के लिए बदल डाली थी। ताहिरा, अपने परिवार के साथ आज फिर हिंदुस्तान के उस ही शहर में थी जहाँ वो दुल्हन बन कर आयी थी । वो आना नहीं चाहती थी पर शायद आना भी चाहती थी , एक बार और … नववधु सुधा को उसके तरुण पति के गालों पर गुलाल मलते और शरारत से हँसने का सुंदर दृश्य उसे आज भी ज्यों का त्यों याद था .. ताहिरा और सुधा का क्या सम्बंध है ? ताहिरा को सुधा की याद क्यों रुला गयी .. देश के बँटवारे में ये क्या हुआ था? पूजा श्रीवास्तव की आवाज़ में सुनिए शिवानी जी की लिखी कहानी “लाल हवेली “ में क़िस्सा ताहिरा और सुधा का
Kuch Dilchasap baaten aur Sdabhar Naggmen With Pooja
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Vineeta Srivastava