Kuch Dilchasap baaten aur Sdabhar Naggmen With Pooja
Celebrating 88th Bithday of melody queen Asha Bhosle With Pooja
Female Protrayal in Bollywood with Anandita Bhasin (Part – 2)
“अपने परिवार पर लगी खुशियों के ग्रहण पर, अपने पति को अपने में समेटता हुआ देखने की पीडा के बारे में, अपने बेटे के कालिख पुते वर्तमान और उसके अंधियारे भविष्य पर। सोचती हूँ, उन लोगों के बारे में जो सजायाफ्ता होकर भी राजनीति में उंची कुर्सियों पर बैठे हैं, क्योंकि उनके केस राजनीति में आने से पहले खारिज हो जाते हैंया माफ कर दिये जाते हैं लेकिन उन भूल से किये गये अपराधों के युवा अपराधियों का क्या जिन्हें अच्छे चरित्र और उच्च शिक्षा के बाद छोटी सी भी सजा मिलने के बाद कोई सरकारी नौकरी नहीं मिलती। सोचती हूँ, जेल के घुटन भरे माहौल में पल पल काटते अपने बाईस साल के युवा बेटे के बारे में उसके पिता की खामोश पीडा के बारे में। “ इस निराशा के बीच वो उम्मीद की किरण कहाँ से ढूँढ कर लाती है- सुनिए कहनी “नयी सम्भावनाओ का आकाश मे”
प्रेम एक ऐसी अनुभूति है जो कब , कैसे , किसके लिए महसूस होगी , ये कह पाना कब सम्भव हुआ है? अविनाश, एक फ़ौजी अफ़सर, जिसकी पहली शादी का अनुभव बहुत ही तकलीफ़देह रहा था, उसने शादी ना करने का मन बना लिया था । सुधा, एक आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी, रूप- गुण युक्त एक स्वावलंबी महिला थी। और उसने भी शादी को कुछ ख़ास तवज्जो नहीं दी थी। और फिर, नीलांजना , बचपन को पीछे छोड़ती वो रूपसी तरुणी जिसके लिए दुनिया रंगो से सजी जीवंत तस्वीर जैसा था । इन तीनो किरदारो के जीवन तार एक दूसरे से कैसे उलझते है , आइए सुनते है मनीषा कुलश्रेष्ठ की भावनाओं में डूबती उतराती इस कहनी “ अधूरी तसवीरें” मे..,
मकान को घर और लोगो को परिवार बनाने के लिए उज्जवला द्वारा किये गये समर्पण की कहानी है ” Perfection “
कुंभ मेला, विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन, भारत की संस्कृति और आस्था की अद्भुत मिसाल है। इसकी शुरुआत पौराणिक कथा से होती है, जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत कुंभ को लेकर देवता और असुरों के बीच संघर्ष हुआ। उस संघर्ष के दौरान अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं। इन चार स्थानों पर ही आज कुंभ मेले का आयोजन होता है।
हर 12 साल में लाखों श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों पर स्नान कर अपने पापों से मुक्ति पाने और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने आते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह भारत की विविधता और एकता का प्रतीक भी है।
आइए, इस अद्भुत परंपरा को समझें और गर्व करें अपनी सांस्कृतिक धरोहर पर।
गैंडा- मोटी चमड़ी का , थोड़ा कुरूप सा दिखने वाला प्राणी। राज मेहरा, सुपर्णा की बचपन की सहेली थी और स्कूल कॉलेज की हर प्रतियोगिता में पूरे समय बराबर रहकर अन्त में बाज़ी मार ले जाती थी । जब काफ़ी समय बाद दोनो सहेलियाँ मिली तो अपने सुदर्शन फौजी पति के सामने राज के मोटे काले पति को देखकर सुपर्णा को ना जाने क्यों बहुत सन्तोष हुआ था। पर जब रूपसी वाचाल राज , सुपर्णा के घर रहने आयी और सहेली के पति को ही पुरस्कार की तरह जीत लिया, तब सुपर्णा ये विश्वासघात सहन ना कर पायीं. फिर सुपर्णा ने उस आघात को कैसे झेला? क्या एक पत्नी , सहेली के सामने एक बार फिर हार गयी या उसने एक ऐसा कदम उठाया जिसके बारे में राज ने कल्पना भी ना करी थी . जानिए शिवानी की इस कहानी “गैंडा “ में … ((सुनिए शिवानी जी की लेखनी का जादू इस कहानी गैंडा में , जहाँ एक सहेली और पत्नी के मनोभवों को बड़ी सुंदरता और सजीवता से प्रस्तुत किया गया है )
Female Protrayal in Bollywood with Anandita Bhasin (Part – 2)
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