एक युवक एक राजकुमारी से प्रेम करता है और विवाह करना चाहता है किंतु राजकुमारी का विवाह उसी से हो सकता है जो खोलते हुए तेल से सकुशल लौट आए| इस बात से हताश युवक की राजा विक्रमादित्य किस प्रकार मदद करते हैं पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-दसवीं पुतली – प्रभावती
दो सहपाठी लड़कियों की कहानी जो एक दूसरे से स्पर्धा रखती हैं किंतु एक तो खुद को उससे बढ़कर दिखाने की होड़ में सही गलत का फर्क भी भूल जाती है।
समय द्वारा अपने मनोरंजन के लिए वायु. जल, अग्नि और कई प्रकार के जीवों के उपरांत मनुष्य के बनाए जाने की कथा।
एक विज्ञान के विद्यार्थी को उसके अध्यापक के द्वारा एक मानव कंकाल, शरीर विज्ञान के अध्ययन हेतु दिया जाता है, किंतु एक रात उस मानव कंकाल की आत्मा उसे अपनी मौत के पीछे की कहानी सुनाती है| क्या है वह कहानी ? इस रोचक कहानी को सुनने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में, रविंद्र नाथ ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी “पिंजर”…
बनवारी जो पत्नी से बेहद प्रेम करता है, अपने हालदार परिवार के के बड़े बेटे होने का फर्ज न निभाते हुए केवल उसकी खुशी के लिए ही सब करता है लेकिन परिस्थिति तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी किरण की नज़र में उसका कोइ मोल नहीं और वह जी जान से अपने देवर के पुत्र हरिदास की देखभाल करते हुए कब उसकी पत्नी से ज्यादा हालदार परिवार की बड़ी बहू बन गई बनवारी को पता ही नहीं चला।
विक्रमादित्य के सिंहासन की दूसरी पुतली चित्रलेखा द्वारा सुनाई गई कहानी जिसमें एक साधु विक्रमादित्य को एक फल देता है और उसे एक यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होने का वरदान देता है |क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी विक्रम और बेताल की कहानियों में से एक कहानी सिंघासन बत्तीसी -दूसरी पुतली चित्रलेखा
राजा विक्रमादित्य के दरबार में लोग अपनी समस्याएँ लेकर न्याय के लिए तो आते ही थे कभी-कभी उन प्रश्नों को लेकर भी उपस्थित होते थे जिनका कोई समाधान उन्हें नहीं सूझता था। विक्रम उन प्रश्नों का ऐसा सटीक हल निकालते थे कि प्रश्नकर्त्ता पूर्ण सन्तुष्ट हो जाता थाएक दिन दो तपस्वी दरबार में आए और उन्होंने विक्रम को अपने प्रश्न का उत्तर देने की विनती की। उनमें से एक का मानना था कि मनुष्य का मन ही उसके सारे क्रिया-कलाप पर नियंत्रण रखता है और मनुष्य कभी भी अपने मन के विरुद्ध कुछ भी नहीं कर सकता है। दूसरा उसके मत से सहमत नहीं था। उसका कहना था कि मनुष्य का ज्ञान उसके सारे क्रिया-कलाप नियंत्रित करता हैइस प्रश्न का उत्तर विक्रमादित्य किस प्रकार देते हैं इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी उन्नीसवी पुतली रूपरेखा राजा विक्रमादित्य,शिवानी आनंद की आवाज में…
राजा विक्रमादित्य जैसा न्यायप्रिय, दानी और त्यागी और कोई न था | राजा को एक बार दो व्यक्ति दिखाई दिए एक मानव मुण्डों की माला पहने बीभत्स दिखने वाला कापालिक है तथा दूसरा एक बेताल है |उन दोनों में किसके लिए द्वंद चल रहा है और राजा किस प्रकार निर्णय देते हैं इस रोचक कहानी को आवाज दी है शिवानी आनंद में..
एक बार एक ज्योतिषी अपनी विद्या का बखान बढ़-चढ़कर अपने दोस्त से कर रहा था| विक्रमादित्य ने उस ज्योतिषी की बात को सुन लिया और उसकी विद्वता की जाँच के लिए उन्होंने क्या किया ?इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी बीसवीं पुतली ज्ञानवती राजा विक्रमादित्य तथा ज्ञानियों की कद्र, शिवानी आनंद की आवाज में
वास्तव में सच्ची प्रेमिका अपने प्रेमी से प्रेम करती हैं ,ना कि उनके धन से | विक्रमादित्य के राज्य में एक ऐसी प्रेमिका की कहानी है जो अपने प्रेमी की सहायता से अपने निरपराध पति की हत्या कराना चाहती है |आखिर क्यों ?विक्रमादित्य इस पर क्या न्याय देते हैं?इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी चौबीसवीं पुतली करुणावती चरित्रहीन स्त्री से प्रेम सिर्फ विनाश की ओर ले जाता है, शिवानी आनंद की आवाज में…
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