बुजुर्ग सभ्य और सभ्रांत भाषा मे गालियाँ देते हैं-बल्ड़ी , रास्कल और कुछ इसी तरह की।बच्चे समझते नहीं । न उनकी गालियों को और न उनकी ऊँची हैसियत को । एक बड़ा बच्चा उलझनें लगता है तो -तो जोसेफ बीच बचाव करने उठ जाता । तुम थोड़े आदर से नहीं बात कर सकते ?देखते नहीं बुजुर्ग आदमी है ….. आदर से….ऊ का होता है सर । जोसेफ एक यात्री है, जो प्लेटफार्म नंबर10मे अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहा है ।प्लेटफार्म मे12 से17 साल के 7-8बच्चों का झुंड देखता है ।जो गन्दे कपड़े पहने हुए हैं लेकिन उन बच्चों की क्रियाकलाप उसे कुछ परेशान करती हैं । पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तुषारकान्त उपाध्याय जी के द्वारा लिखी कहानी प्लेटफार्म नंबर10….अमित तिवारी जी कि आवाज़ में….।
वकील बाबू की सबसे छोटी बेटी नेहा बेहद खूबसूरत है और संगीत में विशेष रूचि रखती है उसी बिल्डिंग में निश्चल एक बच्चे को संगीत सिखाने आता है दोनों की रुचियां मिलने के कारण उन दोनों में प्रेम हो जाता है वे दोनों विवाह करना चाहते हैं नेहा के पिता को यह रिश्ता स्वीकार नहीं होता नेहा और निश्चल आखिर क्या निर्णय लेते हैं उनके प्रेम का क्या नतीजा निकलता है पूरी कहानी जानने के लिए के लिए सुनते हैं संचिता सक्सेना द्वारा लिखी गई कहानी मासूम की प्रेम कहानी अमित तिवारी जी की आवाज में
वसु के मन में आया, कह दे कि शुलभा जैसे लोग ही सावन के अँधे होते हैं; पर उसका मन राजी न हुआ। निष्कपट बच्चों के मन में दुर्भावना का बीज बोना उचित नहीं था। उन्होंने कहा – “बच्चों, गलत चीजों को देख कर भी जो नहीं देखता, वही सावन का अँधा होता है। कहानी में अलग- अलग वसु और शुलभा के चरित्र का विश्लेषण किया गया है | जहां एक ओर वसु निस्वार्थ भाव से अपने दिव्यांग दोस्तों के साथ समय बिताता है , वही दूसरी ओर शुलभा सिर्फ अपनी लोकप्रियता पाने के लिए समाज सेवा का दिखावा करती है | जानते हैं लोगों के अलग-अलग नजरिए को कहानी सावन का अँधा में
एक अध्यापिका और उसके स्टूडेंट के बीच एक आकर्षण पैदा हो जाता है और इसी आकर्षण के तहत वह अपनी सारी सीमाएं तोड़ देते हैं किंतु इस प्रसंग के बाद कहानी में एक नया मोड़ आता है |क्या उन दोनों की जिंदगी में कुछ बदलाव आता है जानने के लिए सुनते हैं कहानी अफेयर
छोटन की आत्मा एकदम चीत्कार उठी थी कि बेंगा को न कैंसर था, न एड्स, न टी बी – महज दस्त और बुखार से पीडित था, फिर भी दो दो अस्पताल से गुजर कर भी वह इलाज नहीं पा सका। वह सिहर उठा था कि आज गरीबों के लिये इलाज किस कदर हास्यास्पद और मुश्किल हो गया है। कल इन्हें फोडे फ़ुन्सी, सर्दी खांसी और सरदर्द से भी मरना पड सकता है। मानो इनके लिये हर रोग ही कैंसर और एड्स बनने जा रहा है। इलाके का इकलौता अस्पताल है जहां का डॉक्टर कौतुक गरीब लोगों के इलाज करने से बेपरवाह अपने यार दोस्तों में ही व्यस्त रहता है उसी अस्पताल में छोटन नाम का एक डोम होता है जिससे यह सब देखा नहीं जाता कहानी में जानते हैं किस प्रकार गरीबों की जान के साथ खिलवाड़ होता है |बेहद मार्मिक कहानी है कीड़े पतंगे
सुशील यादव जी द्वारा लिखी गई कहानी एक सस्पेंडेड थानेदार का इंटरव्यू आज की कानून प्रणाली पर व्यंग है एक थानेदार का इंटरव्यू लिया जाता है जोकि सस्पेंड हो चुका है जानते हैं कहानी में आखिर थानेदार को क्यों सस्पेंड किया गया और थानेदार का सस्पेंड होना जैसे उसके लिए कोई गर्व की बात हो जानते हैं पूरी कहानी एक सस्पेंडेड थानेदार का इंटरव्यू अमित तिवारी जी की आवाज में
कहानी एक राजा और उनके चार पुत्रों की है राजा चाहता है उसके बाद उसका सबसे योग्य पुत्र राजगद्दी संभाले इसके लिए अपने चारों पुत्रों को राज्य से बाहर जाकर धन कमाने को कहता है शर्त के अनुसार जो सबसे अधिक धन अर्जित करेगा वही राजगद्दी का हकदार होगा पूरी कहानी सुनकर जानते हैं उन चारों में से सबसे योग्य पुत्र कौन था और क्यों हरिशंकर परसाई द्वारा लिखी गई कहानी जैसे उनके दिन फिरे”, अमित तिवारी जी की आवाज में
चिरौटे ने गहरी साँस भरी। चिरैया को देखा और तनकर बोला – मैं अब इसी घर में घोंसला बनाऊँगा, देखता हूँ कब तक नोंचता है यह जल्लाद बात-बात पर गुस्सा करने वाले एक व्यक्ति के घर में चिरौटा और चिरैया घोंसला बनाते हैं आदमी और चिरोटे के बीच इस प्रकार एक जंग छिड़ जाती है हरि भटनागर के द्वारा लिखी गई कहानी जंग में इसका वर्णन सुनते हैं
घर गृहस्थी की बातों को इतनी सहजता से कहने में पारंगत मालती जोशी की कहानियों में यह कहानी जिसमें गृहस्थी में संतुलन रखने के लिए छोटे-छोटे झूठ बोले जाते हैं जिससे गृहस्थी में शांति और संतुलन बना रहता है इसी बात को बेहद खूबसूरत ढंग के साथ प्रस्तुत किया है मालती जोशी ने अपनी कहानी खूबसूरत झूठ में
अवंतिका की शादी प्रभाकर से हो चुकी है और उसकी एक बच्ची भी है लेकिन नरेन जिसे वो जी जान से चाहती थी, उसे वर्षों बाद अपने सामने देख और कही चलकर बात करने के आग्रह को वो टाल न सकी। लेकिन चाहकर भी वो नरेन को उसके धोखे के लिए क्षमा नहीं कर सकी।
Awoman with great look, good taste was still not getting the attention from her husband. Each day the distance was impacting huge among their relationship that prompted the lady to leave her house.
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