अकाल की स्थिति में सारस का झुंड पानी की तलाश में इधर- उधर भटक रहा है एक बुढ़िया पानी का कटोरा उनके लिए रखती है लेकिन सारस का झुंड इस बात से अनजान है केदारनाथ सिंह के द्वारा लिखी गई कविता अकाल में सारस सुनते हैं पवन मिश्रा जी की आवाज में
नागार्जुन के काव्य संग्रह हजार- हजार पांव वाली से ली गई रचना उनको प्रणाम… कवि ने अपनी रचना के माध्यम से उन सभी को उन सभी को शत-शत नमन किया है जिनका किसी न किसी रूप में अपनी सेवाओं के द्वारा देश ,समाज आदि के लिए अतुलनीय योगदान रहा है |नागार्जुन के द्वारा लिखी गई इस खूबसूरत प्रेरक रचना को आवाज दी है डॉक्टर पवन मिश्रा
गीति और अनिरुद्ध का प्रेम विवाह हुआ था, किंतु आज एक जरा सी बात पर दोनों का जमकर झगड़ा हुआ| गीति इस झगड़े के बाद अनिरुद्ध का घर छोड़ने का निर्णय कर लेती है किंतु कहानी के एक प्रसंग में गीति अपने निर्णय पर विचार करने लग जाती है |क्या है कहानी का वह प्रसंग जो गीति को अपने निर्णय को बदलने पर मजबूर कर देता है |क्या होगा गीति और अनिरुद्ध के वैवाहिक का ?जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ द्वारा लिखी गई कहानी टिटहरी ,पूजा श्रीवास्तव की आवाज में….
मेला – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में प्रयागराज में लगे कुंभ मेले का दृश्य है जहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में लोग अपने पाप को धोने के लिए संगम में डुबकी लगाने आते हैं। क्या मात्र डुबकी लगाकर पाप से मुक्त हुआ जा सकता है ?क्या वास्तव में अध्यात्म को भी एक पेशे की दृष्टि से अपनाया जाता है? आस्था ,परंपरा इन सब बातों का अद्भुत संगम है इस कहानी में। इसी बात को रोचक ढंग से आधार बनाकर ममता कालिया ने कहानी मेला का ताना-बाना बुना है,जिसे शेफ़ाली कपूर ने उतने ही अनोखे अंदाज़ से अपनी आवाज़ से निखारा है।
कार्तिक एक नौजवान युवक है जो अपने से 25 वर्ष बड़ी अपनी अध्यापिका कुसुम गोल्डन से प्रेम करने लगता है किंतु उसका यह क्रश उसका पूरा जीवन, उसका व्यक्तित्व बदल देता है क्या थी कुसुम गोल्डा की सच्चाई और क्या हुआ कार्तिक के साथ पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जुनैद के द्वारा लिखी गई कहानी क्रश ,अमित तिवारी जी की आवाज में
आज हम बच्चों को उनकी गलतियों के लिए डांटते हैं, मारते भी हैं लेकिन याद कीजिए क्या वही सब गलतियां हमसे कभी ना कभी हो चुकी होती है?ऐसा ही कुछ आज निशिकांत के साथ हो रहा है ,जब उसे एहसास हो रहा है कि जिस बात के लिए वह आज अपनी बेटी को डांट रहा है वह गलती कभी उससे हो चुकी है और उससे पहले उसके पापा से तो यह क्रम क्या ऐसे ही चलता रहेगा .इसे जानने के लिए सुनते हैं विष्णुप्रभाकर द्वारा लिखी गई कहानी यह क्रम, नयनी दीक्षित की आवाज में..
एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के दिनचर्या, उसकी सोच और उसके जीवन में आए बदलाव को आलोकित करती हुई यह गीत भावना तिवारी की आवाज में ….
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