झाबुआ से लौटते हुए इसलिए उदास हूँ कि अन्नास नदी सूख गई है और रंग-बिरंगे प्रिंट वाले कपड़े पहने मोटर साइकिल पर घूमते सीधे-सादे भील आज भी प्रकृति के इतने नज़दीक हैं कि उन्हें इस शोख नदी के मर जाने का शायद अहसास ही नहीं है।असीम राय और मदन झाबुआ नगर जा रहे हैं मदन जी का बचपन वहां गुजरा है अनास नदी को लेकर उनकी काफी यादें हैं अब दोबारा जब वहां पाते हैं तो क्या उन्हें pहले जैसा सब कुछ मिलता है जानने के लिए सुनते हैं कहानी हेमंत जोशी के द्वारा लिखी गई कहानी अनास नदी सूख गई अमित तिवारी जी की आवाज
Bunty and Babli are brother and sister who loves to travel and doing adventures. one day while bunty was throwing some pebbles into the lake his father told him to not to do so, and after discussion he agreed.
हम सब लोग ऐसी मिट्टी के बने हैं जिसे किसी बाहरी शक्ति की जरूरत नहीं है बनने-बिग़डने के लिए। यह ऐसी मिट्टी है जो अपने आप बहती है और अपने आप ही कठोर और ज़ड भी हो जाती है। जहाँ ज़ड हो गई है वहाँ कोई अहसास नहीं, वेदना नहीं, टीस नहीं और जहाँ बह रही है, गल रही है वहाँ भरपूर गुँजाइश है तर्क की, कुतर्क की, संवेदना की, खुशी की और दर्द की। लेकिन इसी मिट्टी से बनी दुनिया में जब चारों और से सवाल उठने लगें, भयंकर सवाल, तंग करने वाले, शोषित करने वाले, दमन करने वाले सवाल …. तो इसी मिट्टी से पनपने लगती हैं उलझनें और उलझनें … पुष्पेंद्र को अक्सर एक अजीब सा एहसास सताया करता था जैसे कोई मकड़ी का जाला उसके शरीर से चिपक गया हो जबकि वह पूरी तरह से स्वस्थ था | उसे और भी कई लोग मिले जिनके साथ कुछ अजीबोगरीब एहसास से ग्रसित थे |अंत में पुष्पेंद्र इन एहसासों को किस प्रकार समझा और किस निष्कर्ष पर पहुंचा ???जाने के लिए सुनते हैं कहानी उलझने………
कहानी में 60 साल के एक हीरे के व्यापारी धनपाल जी का उन्हीं की हवेली में हत्या हो जाती है |परिवार में उनकी पहली पत्नी की बेटी नमिता,उनके भाई का बेटा घनश्याम और उनकी दूसरी पत्नी सोनिया रहते हैं | हत्या के रहस्य से उलझा यह केस प्राइवेट डिटेक्टिव अविनाश के पास आता है |किस प्रकार अविनाश इस हत्या के इस रहस्य को सुलझा पाता है? कौन है धनपाल जी का हत्यारा? अमित कुमार पांडे द्वारा लिखी सस्पेंस से भरी कहानी हत्या हवेली, में जानते हैं अमित तिवारी की आवाज में
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बुराई और अपराध के दलदल में एक बार इंसान धसता है ,तो फिर लाख कोशिशों के बावजूद वह निकल नहीं पाता | सत्ता की चकाचौंध में इंसान अपना जमीर अपना सब कुछ गवा देता है | ऐसी कहानी है एक युवा लड़के अभिनव सिंह की क्या होता है उसके साथ ?जानते हैं कहानी “गिरता सूरज “ में ….
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राजभवन की अतिथिशाला में सजावट के लिए एक पुरातन दीपदान को सिगरेट दानी के रूप में सुशोभित किया जाता है |जबकि उस दीपदान में भगवान श्री गणेश की सुंदर मूर्ति भी स्थापित होती है| हमारी सरकार में सर्कुलर होना गर्व की बात मानी जाती है | इसी तर्ज पर भगवान का नाम लेना सर्कुलर होने पर बाधा होता है| बड़ी खूबसूरती के साथ इसी बात को रखते हुए कहानी राजभवन की सिगरेट दानी में व्यंग किया गया है|
टीआरपी उसी जनता से बनता है जो शरीर में आग लगा कर, एक्सीडेंट से सडक पर पड़े या गुंडों के हाथों पिटते मर रहे आदमी को बचाने नहीं दौड़ती, मोबाइल से उसका विडिओ बनाने लगती है आजकल के पत्रकार नारद जी तक हो रिपोर्टिंग करना सिखा देते हैं इसी पत्रकारिता के ऊपर व्यंग करते हुए किस प्रकार टीआरपी बढ़ाने के लिए संवेदनहीन पत्रकारिता की जाती है इस पर सुनते हैंकमलेश पांडे द्वारा लिखी कहानी देखते रहिए कयामत तक अमित तिवारी जी की आवाज में
पूरी सत्कार कालोनी में मरघट जैसा सन्नाटा छाया था। आज खन्ना साहब के खाली प्लॉट पर किसी तरह का शोर नहीं था। कल तक तो इस प्लॉट पर हर समय कालोनी के बच्चों की धमाचौकड़ी मची रहती थी। बच्चों के मां-बाप लाख समझाते, डांटते-डपटते, यहां तक कि पीटते भी, पर बच्चे यहां आना न छोड़ते। किसी न किसी बहाने इस प्लॉट पर पहुंच जाते। वे प्रतिदिन इस प्लॉट पर इस तरह पहुंचते मानो उनके लिए यह मंदिर-मस्जिरद-गुरुद्वारा हो। बचपन कितना मासूम होता है इस संदर्भ में कहानी में दर्शाया गया है कि किस प्रकार कॉलोनी के छोटे-छोटे बच्चे अपनी कॉलोनी के पिल्लो पर अपनी जान रखते हैं छिड़कते हैं इसी मासूमियत को दर्शाती है कहानी बचपन
कहानी केतकी और अंश की एक अधूरी प्रेम कहानी को इंगित करती है |केतकी बहुत ही सुंदर, शिक्षित और बेहद व्यवहार कुशल लड़की है |उसके मां -बाप नहीं है, मौसी – मौसा जी ने उसका पालन किया है | केतकी और अंश एक साथ पढ़ाई कर रहे हैं |अंश और केतकी एक दूसरे को बेहद पसंद करते हैं किंतु जब अंश, केतकी के सामने अपने प्रेम का इजहार करता है तब केतकी इस बात को अस्वीकार कर देती है | आखिर क्या वजह है इसके पीछे ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अनुलता राज नायर द्वारा लिखी कहानी केतकी ,अंजू जेटली की आवाज में
गोपालदास नीरज की कविता संग्रह फिर फिर दीप जलेगा से ली गयी कविता मिट्टी वाले में कवि ने उन सभी पर कटाक्ष किया है जो मिट्टी का मोल लगाते ह़ै कवि का मानना है कोई भी इसका मोल नहीं लगा सकता। क्या इस मिट्टी का इतिहास इतना सस्ता है कि कुछ मोल चुका कर इसे कोई भी खरीद सकता है ?आज इसी मिट्टी के लिए हम युद्ध की स्थिति तक पहुंच जाते हैं, तो क्या ऐसी मिट्टी का कोई मोल हो सकता है ,वह तो अमूल्य है | कवि अपने स्पष्ट शब्दों में समझाना चाह रहा है कि यह मिट्टी अपना मोल नहीं चाहती बल्कि सिर्फ मिट्टी अपनी कुर्बानी चाहती है| कविता के माध्यम से इसका पूर्ण भाव को समझते हैं, भावना तिवारी की आवाज में…
जीवन का रसायन कब और कैसे इतना कसैला हो गया जीवन के भौतिक शास्त्र में सारे द्रव्य एकत्र करते-करते शायद वह अपने अस्तित्व का द्रव्य ही गवां बैठी। धरा कैमेस्ट्री में एम.एससी. है | फिर भी घर में कितनी उपेक्षित है इसका धरा को एहसास हो रहा है | अब धरा अपने अस्तित्व के लिए क्या करती है जानते हैं ज्योत्सना सिंह के द्वारा लिखी गई कहानी रसायन में
मनोहर लाल जब मंत्री बने तो उन्होंने जनता के सामने जिन बातों का वादा किया |क्या वह खुद उन बातों पर अडिग रहे? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सुभाष नीरव के द्वारा लिखी गई कहानी रंग परिवर्तन ,शिवानी आनंद की आवाज में
हमदर्दी – Alka saini (अल्का सैनी ) – Shivani Anand
एक अमीर आदमी बिना ज़रूरत के भी अपने ऊपर हजारों- लाखों रुपयों को बेमतलब में ख़र्च कर देता है किंतु किसी गरीब की एक छोटी सी मदद करने के लिए क्यों उसके हाथ सिकुड़ जाते हैं? अमीरी -गरीबी के रिश्तो को समझाती हुई अलका सैनी की एक कहानी हमदर्दी सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज़ में…
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