31 अक्टूबर, 2019 — जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 लागू हुआ। दोनो केंद्रशासित प्रदेशों के उप-राज्यपालों को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा पद की शपथ दिलवाई गई
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नाडियाड में हुआ। पिता का नाम झावेर भाई और माता का नाम लाडबा पटेल था। माता-पिता की चौथी संतान वल्लभ भाई कुशाग्र बुद्धि के थे। उनकी रुचि भी पढ़ाई में ही ज्यादा रही।आज एकता के सूत्र में बंधे भारत के लिए देश सरदार पटेल का ही ऋणी है। कहा जाता है कि एक बार उनसे किसी अंग्रेज ने इस बारे में पूछा तो सरदार पटेल ने कहा- मेरा भारत बिखरने के लिए नहीं बना।सरदार पटेल’,’लोह पुरुष’ और ‘भारत का बिस्मार्क’ की उपाधियों से इन्हें सम्मानित किया गया 1991 में ‘भारत रत्न’ से भी इन्हें सम्मानित किया गया इनका जन्म दिवस ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है
स्वामी विवेकानंद को अपना आध्यात्मिक गुरु मानने वाली मार्गरेट एलिजाबेथ नोबेल ‘भगिनी निवेदिता’ के नाम से प्रसिद्ध हुई। उन्होंने भारत देश को अपनी कर्मभूमि बनाया। विवेकानंद ने उन्हें ‘सिस्टर निवेदिता’ का नाम दिया ।स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रसार के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया।
मंगलयान मंगलवार के दिन दोपहर भारतीय समय 2:38 अपराह्न पर श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) के सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र से ध्रुवीय प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-25 द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के रूप में घोषित किया। इस दिवस का उद्देश्य सभी देशों को गरीबी और निराश्रयता के उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय संदर्भ में उपयुक्त, ठोस कार्रवाई के लिए प्रेरित करना है।
एशिया का एक देश इराक़ 3 अक्टूबर 1932 को ब्रिटेन की गुलामी से स्वतंत्र हुआ। इराक़ की राजधानी बगदाद है। इराक़ की 6 पड़ोसी देश ईरान ,कुवैत जॉर्डन ,सऊदी अरब ,सीरिया और तुर्की है ।आधिकारिक भाषाएं अरबी और कुर्दिश है। 2006 में सद्दाम हुसैन के तानाशाही और मानवता के खिलाफ़ अपराध के लिए उन्हें फ़ासी की सज़ा दी गई।
3 अक्टूबर 2010 में भारत ने पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी की ।खेलों के इतिहास में ये एक नई उपलब्धि थी। 1930 में कनाडा के हेमिल्टन शहर में राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत हुई थी ।जिसे 2010 में भव्य तरीके से दिल्ली में आगाज़ किया गया भारत 101 पदक लेकर दूसरे स्थान पर रहा। 177 पदको के साथ ऑस्ट्रेलिया का प्रथम स्थान रहा।
तुम दिल पर क्यों लगाती हो। कहने दिया करो जो कहते हैं। हम तो अब तिड़के घड़े का पानी ठहरे। आज हैं, कल नहीं रहेगें। फेंकने दो कंकर-पत्थर। जो दिन कट जाएं, अच्छा है।”कहानी में वृद्ध और वृद्धा अपने बेटे -बहु के साथ रह रहे हैं |वृद्धावस्था में क्या है उनकी स्थिति ?जानने के लिए सुनते हंं सुभाष नीरव के द्वारा लिखी गई कहानी तिड़के घड़े , शिवानी आनंद के द्वारा
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