डॉ भावना तिवारी देश की उन चुनिंदा कवयित्रियों में से हैं जिनको कविता में सामर्थ्य और मौलिकता का पर्याय कहा जाना अतिश्योक्ति न होगी। मंचों पर अपनी कविताओं के साथ साथ सम्मोहक स्वर से श्रोताओं को सहज ही अपना मुरीद बना लेने वाली डॉ भावना तिवारी के गीत ये पिंजरा सोने का और और उस पर अधिकार नहीं मेरा सहज ही लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गए हैं। कवि सम्मेलन में वे कविताप्रेमी श्रोता जो यह शिकायत किया करते हैं कि कवि सम्मेलनों में कविता गायब हो गयी, वे इस के प्रति निश्चिंत हो सकते हैं कि कविता की नाव को खेने वाले हाथ अभी सामर्थ्यवान और कुशल हैं। डॉ भावना तिवारी को उनकी कविताओं के लिए विकासिका संस्था कानपुर से सर्वश्रेष्ठ गीतकार 1996, अक्षरा साहित्यिक संस्था द्वारा माहेश्वर त्रिवारी गीत सृजन सम्मान 2018, गीत वातायन सम्मान 2017, काव्य रत्न समान 2016, नवगीत गौरव सम्मान 2018,संस्कार भारती काव्य श्री सम्मान 2016, माँ वीरमति स्मृति सम्मान 2018, महादेवी वर्मा सम्मान 2018, साहित्य सूर्य अमृतलाल नागर सम्मान 2017, आचार्य शारदा चरण दीक्षित स्मृति सम्मान 2014, हिंदुस्तानी भाषा अकेडमी द्वारा हिंदुस्तानी भाषा काव्य प्रतिभा सम्मान 2018, आगमन भूषण सम्मान 2016 जैसे अनेकों सम्मान प्राप्त हुए हैं। डॉ भावना तिवारी प्रसिद्ध ऑडियो प्लेटफॉर्म गाथा की निदेश हैं। उनका एक गीत संग्रह बूंद बूंद गंगाजल प्रकाशित हो चुका है और साथ ही एक और गीत संग्रह पिंजरा सोने का प्रकाशनाधीन है।
भावना तिवारी की आवाज़ में भाई बहन के भावों को प्रदर्शित करती रक्षा बंधन पर एक भाव पूर्ण कविता, जो आपकी आँख नाम कर देगी
जीवन बहुत सूक्ष्म होता है और हमें सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने जीवन में सिर्फ़ यही कोशिश करनी चाहिए कि हम यहां सब के चेहरे पर खुशी ला सके ,प्रेम फैला सके ।भावना तिवारी की मोहक आवाज़ में सुनिए यह खूबसूरत गीत..
कश्मीर की सुंदरता जहां एक ओर अपनी तरफ लोगों को आकर्षित कर रही है वहीं उसी कश्मीर में रह रहे लोगों ने कैसे खौफनाक मंजर का सामना किया है उसी व्यथा को भावना ने अपने गीत में बेहद मार्मिक ढंग से उड़ेला है…
“रोम-रोम में बसते राम”
भगवान श्रीराम का नाम मात्र स्मरण भी मन को पवित्र कर देता है और जीवन को एक नई दिशा देता है।
उनकी महिमा, उनकी मर्यादा और उनके आदर्शों का यह भावपूर्ण काव्य-गान आपको भीतर तक स्पर्श करेगा।
🎧 सुनिए —
“रोम-रोम में बसते राम”
भावना तिवारी की सुमधुर आवाज़ में
जब कोई प्रेम में होता है,
तो उसके लिए
प्रेम के अलावा
और कुछ भी
महत्त्वपूर्ण नहीं रह जाता।
हर सोच, हर एहसास
उसी एक व्यक्ति के
इर्द-गिर्द घूमने लगता है।
इसी सच्चे और गहरे अहसास को
बड़े सादेपन से
यह मधुर गीत सामने रखता है—
भावना तिवारी की आवाज़ में।
यह उन महिलाओं को समर्पित कविता है ,जो अपना संपूर्ण जीवन अपने परिवार , अपने बच्चों के लिए अर्पित कर देती है, किंतु उन्हें कभी भी इसका प्रतिफल नहीं प्राप्त होता | भावना तिवारी जी की भावपूर्ण आवाज में कविता “ जो बाग लगाया था “……
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यह मधुर गीत उस स्थिति को दर्शाता है ,जब हम नए-नए प्रेम में पड़ते हैं | हमारा तन – मन हमारे काबू में नहीं होता | भावना तिवारी जी की मधुर आवाज में….
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pragati sharma