महाभारत की कहानियों में से एक कहानी’ युधिष्ठिर द्वारा दुर्योधन की रक्षा ‘ ,उस समय का प्रसंग है जब पांडवों के वनवास को 11 वर्ष हो चुके थे| दुर्योधन पांडवों को जान से मारने की मंशा से उस जगह जा पहुंचता है जहां पांडवों का वास है ,किंतु ऐसी कुछ घटित होता है कि दुर्योधन को ही युधिष्ठिर की शरण में आना पड़ता है और युधिष्ठिर दुर्योधन के प्राणों की का संरक्षण करते हैं| ऐसा क्या घटित हुआ था कि दुर्योधन को युधिष्ठिर की शरण लेनी पड़ी? शिवानी आनंद की आवाज में सुनते हैं कहानी का पूरा प्रसंग…
यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो अपनी बाल विधवा पड़ोसन से प्रेम तो करता है किंतु समाज और अन्य भय से कह नहीं पाता। वहीं उसका एक मित्र जो कि उसी से कविताएं सीखने आता है, उसी की लिखी कविताएं सुनाकर उसकी पड़ोसन से प्रेम विवाह कर लेता है।
सुबोध अवस्थी का जब ट्रांसफर एक शहर से दूसरे शहर के लिए होता है तो उनके बच्चे शीला और सुमित अपने शहर ,अपने घर ,दोस्तों को छोड़कर नए शहर ,नए घर नहीं जाना चाहते हैं | सबके इमोशंस उस घर से, उस शहर से ,अपने दोस्तों से जुड़े हुए हैं | उनकी कोमल भावनाओं को इस बात से गहरा आघात लगता है कि उन्हें यह सब छोड़ कर यहां से नए शहर को जाना होगा ऐसी स्थिति में सुबोध और राधिका अपने बच्चों को समझाने की बहुत कोशिश करते हैं किंतु कहानी इसी ताने-बाने में उलझी हुई है कि ऐसी स्थिति में बच्चों की क्या मनोदशा होती है ? इस भाव को समझने के लिए सुनते हैं गिरिराजशरण अग्रवाल के द्वारा लिखी गई कहानी तबादला शिवानी आनंद की आवाज में..
विक्रमादित्य के राज्य में एक गरीब दरिद्र ब्राह्मण और भाट रहते थे |दोनों की पुत्रियों के विवाह के लिए उन दोनों के पास धनराशि नहीं थी | विक्रमादित्य ने दोनों की पुत्रियों के विवाह के लिए धन प्रदान किया| किंतु भाट को 1000000 स्वर्ण मुद्राएं ,जबकि ब्राह्मण को कुछ सौ स्वर्ण मुद्राएँ ही प्रदान की | विक्रमादित्य ने इस प्रकार का पक्षपात क्यों किया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी पच्चीसवीं पुतली त्रिनेत्री ईश्वर से आस ,शिवानी आनंद की आवाज में..
हर बात को जहाँ तक हो, सँवारना चाहिए। । सूर्यकांत त्रिपाठी जी की लिखी कहानी गधा और मेंढक सुनते हैं निधि मिश्रा की आवाज में
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