बादल के घूँघट से बाहर जब भी तू निकला है मैं क्या मेरे साथ समन्दर तक मीलों उछला है आसन पर बैठे जोगी को जोग लगे बेकार|| चांद को देखकर कवि की मन में क्या-क्या भावनाएं आ रही है?अपनी खूबसूरत आवाज में प्रमोद तिवारी जी की प्रस्तुति |चांद तुम्हें देखा है”…
देश प्रेम की हुंकार तो हम सब भरते हैं, किंतु हम धर्म, जाति मैं इतना बटे हुए हैं कि वास्तव में देश के प्रति अपने फर्ज़ नहीं निभाते | इसी बात पर कटाक्ष करते हुए प्रमोद तिवारी जी की यह कविता “समय बदलना होगा”, सोचने पर मजबूर कर देगी कि वास्तव में देश के प्रति हमारा क्या फर्ज़ है और हम देश के प्रति क्या कर सकते हैं
देश प्रेम की हुंकार तो हम सब भरते हैं, किंतु हम धर्म, जाति मैं इतना बटे हुए हैं कि वास्तव में देश के प्रति अपने फर्ज़ नहीं निभाते | इसी बात पर कटाक्ष करते हुए प्रमोद तिवारी जी की यह कविता “समय बदलना होगा”, सोचने पर मजबूर कर देगी कि वास्तव में देश के प्रति हमारा क्या फर्ज़ है और हम देश के प्रति क्या कर सकते हैं
प्रज्ज्वलित | Prajjwalit | Hindi Kavita | Motivational Hindi Poems by Anupam Dhyani
Let that lamp be always lit in you. No matter how hard the battle is, it’s only won if you keep going. And those who do, never lose. So keep that faith, keep that little lamp in you always alive.
Jai Hind
कई दिनों तक – Arvind saxena – Priya bhatia
एक ऐसा एहसास जब सारी बातें, सारे लोग ब़ेगाने से लगने लगे,जो कभी हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा हुआ करते थे। ऐसा कब होता है ?और यह एहसास कब जन्म लेता है ?खूबसूरत शब्दों में पिरोया हुआ यह एहसास अरविंद सक्सेना की कविता कई दिनों से में सुनते हैं प्रिया की आवाज़ में..
जब मन अपनी प्रेयसी के बिछड़ने पर शिथिल हो जाता है ,तो पुनः उसे ऊर्जावान बनाने के लिए उन साथ बिताए हुए पलों को याद कर लेना चाहिए | इसी तरह की भावना से ओतप्रोत है, कविता की यह पंक्तियां….
एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के दिनचर्या, उसकी सोच और उसके जीवन में आए बदलाव को आलोकित करती हुई यह गीत भावना तिवारी की आवाज में ….
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pragati sharma