सुप्रिया वापस अपने दादा- दादी के साथ भोपाल अपने घर लौट आई है| सुप्रिया को डकैतों की पहचान करने के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया गया है | क्या सुप्रिया निर्भीक होकर यह काम कर पाएगी ?जानते हैं कहानी सुप्रिया और अंतिम पड़ाव में …
इस बार काबुली वाले ने सुप्रिया को विक्रमादित्य की सबसे प्रिय पुतली पदमा द्वारा राजा भोज को सुनाई कहानी सुनाता है किस प्रकार राजा विक्रमादित्य बार-बार जीवित हो जाने वाले राक्षस का वध कर एक स्त्री की रक्षा करता है? पूरी कहानी क्या थी और सुप्रिया को इस कहानी से क्या सीख मिली ?जानने के लिए सुनते हैं सुप्रिया और हमारे अंदर का राक्षस अनुपा की आवाज ..
मिस्टर राजगोपाल बैंक के कर्मचारी हैं अपने मां-बाप अपनी पत्नी और अपनी बेटी सुप्रिया के साथ भोपाल के जनकपुरी में रहते हैं |सुप्रिया के घर में डकैती पड़ जाती है इस हादसे से सुप्रिया गुमसुम रहने लगती है| दादा दादी सुप्रिया को अपने साथ गांव ले जाते हैं |आगे क्या होता है जानने के लिए सुनते हैं सुप्रिया और सिंहासन बत्तीसी
आज राजा विक्रमादित्य के सिंहासन की कमोदी नामक पुतली राजा भोज को विक्रमादित्य की अतिथि सेवा पर जो कहानी सुनाती है ,वही कहानी काबुलीवाला सुप्रिया को सुना रहा है |क्या है वह कहानी और सुप्रिया को इस कहानी से क्या सीख मिली? जानने के लिए सुनते हैं सुप्रिया और उसके मेहमान अनुपा की आवाज में
मिस्टर राजगोपाल बैंक के कर्मचारी हैं अपने मां-बाप अपनी पत्नी और अपनी बेटी सुप्रिया के साथ भोपाल के जनकपुरी में रहते हैं |सुप्रिया के घर में डकैती पड़ जाती है इस हादसे से सुप्रिया गुमसुम रहने लगती है| दादा दादी सुप्रिया को अपने साथ गांव ले जाते हैं |आगे क्या होता है जानने के लिए सुनते हैं सुप्रिया और सिंहासन बत्तीसी
आज सुप्रिया को काबुलीवाले से विक्रमादित्य कीउज्जैन नगरी में दो पंडितों के बीच चल रही वार्ता पर आधारित कहानी सुनने को मिल रही है| इस कहानी में विक्रमादित्य उन दोनों की वार्ता सुनते हैं और उसके बाद क्या निश्चय करते हैं ?इस कहानी से सुप्रिया को क्या सीख मिलती है? जानने के लिए सुनते हैं सुप्रिया और ज्ञान का महत्व
इस बार काबुली वाले ने सुप्रिया को विक्रमादित्य की सबसे प्रिय पुतली पदमा द्वारा राजा भोज को सुनाई कहानी सुनाता है किस प्रकार राजा विक्रमादित्य बार-बार जीवित हो जाने वाले राक्षस का वध कर एक स्त्री की रक्षा करता है? पूरी कहानी क्या थी और सुप्रिया को इस कहानी से क्या सीख मिली ?जानने के लिए सुनते हैं सुप्रिया और हमारे अंदर का राक्षस अनुपा की आवाज ..
सुप्रिया वापस अपने दादा- दादी के साथ भोपाल अपने घर लौट आई है| सुप्रिया को डकैतों की पहचान करने के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया गया है | क्या सुप्रिया निर्भीक होकर यह काम कर पाएगी ?जानते हैं कहानी सुप्रिया और अंतिम पड़ाव में …
पांचों पांडवों का जन्म किस प्रकार हुआ ?एक बहुत ही रोचक प्रसंग है |पांडवों की मां कुंती के द्वारा पांचों पांडवों का जन्म किसके आशीर्वाद से हुआ और इसके पीछे क्या घटना छुपी हुई है ?इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी पांडव कौन थे शिवानी आनंद की आवाज में…
आज इस वैश्विक महामारी में चिकित्सा जगत से जुड़े सभी लोगों की जो भूमिका रही है उसके लिए गाथा उन सभी का हार्दिक अभिनंदन करता है ।धर्म, जाति और अपना निजी स्वार्थ को त्याग कर मानवता की सेवा करना ही जिनका एक मात्र उद्देश्य है।कमल मुस्सद्दी की यह कविता उन सभी को समर्पित है ।
सौप्तिक पर्व में ऐषीक पर्व नामक मात्र एक ही उपपर्व है। इसमें 18 अध्याय हैं। अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य-कौरव पक्ष के शेष इन तीन महारथियों का वन में विश्राम, तीनों की आगे के कार्य के विषय में मत्रणा, अश्वत्थामा द्वारा अपने क्रूर निश्चय से कृपाचार्य और कृतवर्मा को अवगत कराना, तीनों का पाण्डवों के शिविर की ओर प्रस्थान, अश्वत्थामा द्वारा रात्रि में पाण्डवों के शिविर में घुसकर समस्त सोये हुए पांचाल वीरों का संहार, द्रौपदी के पुत्रों का वध, द्रौपदी का विलाप तथा द्रोणपुत्र के वध का आग्रह, भीम द्वारा अश्वत्थामा को मारने के लिए प्रस्थान करना और श्रीकृष्ण अर्जुन तथा युधिष्ठिर का भीम के पीछे जाना, गंगातट पर बैठे अश्वत्थामा को भीम द्वारा ललकारना, अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग, अर्जुन द्वारा भी उस ब्रह्मास्त्र के निवारण के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग, व्यास की आज्ञा से अर्जुन द्बारा ब्रह्मास्त्र का उपशमन, अश्वत्थामा की मणि लेना और अश्वत्थामा का मानमर्दित होकर वन में प्रस्थान आदि विषय इस पर्व में वर्णित है। महाभारत की कहानियों में से एक कहानी सौप्तिक पर्व में. जिसे सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
शल्य पर्व में कर्ण की मृत्यु के पश्चात कृपाचार्य द्वारा सन्धि के लिए दुर्योधन को समझाना, सेनापति पद पर शल्य का अभिषेक, मद्रराज शल्य का अदभुत पराक्रम, युधिष्ठिर द्वारा शल्य और उनके भाई का वध, सहदेव द्वारा शकुनि का वध, बची हुई सेना के साथ दुर्योधन का पलायन, दुर्योधन का ह्रद में प्रवेश, व्याधों द्वारा जानकारी मिलने पर युधिष्ठिर का ह्रद पर जाना, युधिष्ठिर का दुर्योधन से संवाद, श्रीकृष्ण और बलराम का भी वहाँ पहुँचना, दुर्योधन के साथ भीम का वाग्युद्ध और गदा युद्ध और दुर्योधन का धराशायी होना, क्रुद्ध बलराम को श्री कृष्ण द्वारा समझाया जाना, दुर्योधन का विलाप और सेनापति पद पर अश्वत्थामा का अभिषेक आदि वर्णित है। महाभारत की कहानियों में से एक कहानी शल्य पर्व में. जिसे सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
कहानी एक अनोखे चोर की है| गांव वाले चोर को पकड़ लेते हैं |उसके पास से एक पुरानी गीली धोती, लगभग दो सेर चने और एक पीतल का लोटा मिलता है |फिर भी गांव वाले उसे थाने ले जाते हैं| नरायन चोर को भाग जाने के लिए कहता भी है| किंतु चोर नहीं भागता | क्या है इसके पीछे की कहानी जानने के लिए सुनते हैं एक चोर की कहानी ,निधि मिश्रा की आवाज में
Reviews for: Supriya and singhasan batteesi (Part-2)