आचार्य गुरु द्रोणाचार्य के सभी शिष्यों में अर्जुन उनके प्रिय शिष्य थे |एक बार आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने उन्हें और अपने सभी शिष्यों को एक लक्ष्य भेद करने का आदेश दिया ,किंतु अर्जुन के द्वारा उस लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के गुण से आचार्य गुरु द्रोणाचार्य बहुत प्रभावित हुए| आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने अर्जुन को एक अमोघ शक्ति बाण प्रदान किया| अमोघ शक्ति बाण का क्या विशेषता है ?इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी अर्जुन की अमोघ शक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में..
महाभारत की कहानी में से एक कहानी “अश्वत्थामा की प्रतिज्ञा “ ,जिसमें अश्वत्थामा प्रतिज्ञा करते हैं कि जब तक वह धृष्टद्युम्न को नहीं मार लेंगे तब तक वह अपना कवच नहीं उतारेंगे | इस प्रसंग का पूरा वर्णन सुनते हैं, शिवानी आनंद की आवाज में |
पांचों पांडवों का जन्म किस प्रकार हुआ ?एक बहुत ही रोचक प्रसंग है |पांडवों की मां कुंती के द्वारा पांचों पांडवों का जन्म किसके आशीर्वाद से हुआ और इसके पीछे क्या घटना छुपी हुई है ?इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी पांडव कौन थे शिवानी आनंद की आवाज में…
सुधा अरोड़ा की एक कहानी में एक औरत के वास्तविक रूप के पारदर्शिता साफ तौर पर झलकती है कि एक स्त्री की संपूर्णता उसके घर तक सीमित क्यों रह जाती है ? क्या वास्तव में एक स्त्री का जीवन सिर्फ अपने घर -परिवार तक ही सीमित होना चाहिए या फिर स्वयं के लिए भी उसे एक हिस्सा रखना चाहिए ? एक स्त्री के इतना सब कुछ करने के बावजूद क्या उसका खुद का कोई अस्तित्व बन पाता है? ऐसे ही प्रश्नों के ताने-बाने में उलझी हुई यह कहानी एक औरत तीन बटा चार सुनते हैं, शिवानी आनंद की आवाज में..
हर बात को जहाँ तक हो, सँवारना चाहिए। । सूर्यकांत त्रिपाठी जी की लिखी कहानी गधा और मेंढक सुनते हैं निधि मिश्रा की आवाज में
मगर मैं सोचता हूँ – आदमी क्यार चूहे से भी बद्तर हो गया है? चूहा तो अपनी रोटी के हक के लिए मेरे सिर पर चढ़ जाता है, मेरी नींद हराम कर देता है। इस देश का आदमी कब चूहे की तरह आचरण करेगा? लेखक ऐसा क्यों सोच रहा है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं हरिशंकर परसाई के द्वारा लिखी गई कहानी चूहा और मैं ,निधि मिश्रा की आवाज में
सौप्तिक पर्व में ऐषीक पर्व नामक मात्र एक ही उपपर्व है। इसमें 18 अध्याय हैं। अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्य-कौरव पक्ष के शेष इन तीन महारथियों का वन में विश्राम, तीनों की आगे के कार्य के विषय में मत्रणा, अश्वत्थामा द्वारा अपने क्रूर निश्चय से कृपाचार्य और कृतवर्मा को अवगत कराना, तीनों का पाण्डवों के शिविर की ओर प्रस्थान, अश्वत्थामा द्वारा रात्रि में पाण्डवों के शिविर में घुसकर समस्त सोये हुए पांचाल वीरों का संहार, द्रौपदी के पुत्रों का वध, द्रौपदी का विलाप तथा द्रोणपुत्र के वध का आग्रह, भीम द्वारा अश्वत्थामा को मारने के लिए प्रस्थान करना और श्रीकृष्ण अर्जुन तथा युधिष्ठिर का भीम के पीछे जाना, गंगातट पर बैठे अश्वत्थामा को भीम द्वारा ललकारना, अश्वत्थामा द्वारा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग, अर्जुन द्वारा भी उस ब्रह्मास्त्र के निवारण के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग, व्यास की आज्ञा से अर्जुन द्बारा ब्रह्मास्त्र का उपशमन, अश्वत्थामा की मणि लेना और अश्वत्थामा का मानमर्दित होकर वन में प्रस्थान आदि विषय इस पर्व में वर्णित है। महाभारत की कहानियों में से एक कहानी सौप्तिक पर्व में. जिसे सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
12 वर्ष बनवास और 1 वर्ष अज्ञातवास पूर्ण करने के पश्चात पांडवों ने अपना राज्य वापस लौटाने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण को अपना शान्तिदूत बनाकर हस्तिनापुर भेजा, जिससे वह शान्ति का प्रस्ताव रख सकें। किंतु क्या श्री कृष्ण का शांति प्रस्ताव धृतराष्ट्र और कौरवों को मान्य हुआ ?इसके आगे के प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं कृष्ण का शांति प्रस्ताव ,शिवानी आनंद की आवाज में…
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर ने अर्जुन को कर्ण का वध न कर पाने के कारण धिक्करा और यहां तक कह दिया कि अगर कर्ण का वध नहीं कर पाते हो तो ,अपना गांडीव धनुष किसी दूसरे योद्धा को दे दो |इस बात को लेकर अर्जुन बहुत क्रोधित हुए और और युधिष्ठिर को मारने के लिए तत्पर हो गए |ऐसी विषम परिस्थिति में किस प्रकार अर्जुन शांत इस हो पाए |महाभारत के रोचक प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी युधिष्ठिर का अपमान ,शिवानी आनंद की आवाज में
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