काजा – संजय शेफर्ड – पल्लवी
अगर एक ऐसी जगह आपका जाने का मन हो जहां प्राचीन ऐतिहासिक संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिले तो घुमंतू की सलाह है कि आप हिमाचल प्रदेश राज्य के बेहद खूबसूरत जगह काज़ा को अपना नया Destination बनाइए, जहां पर बर्फ़ से ढके पहाड़, बुदबुदाती शांत नदी, सुरम्य बंजर परिदृश्य के साथ-साथ रंगीन त्योहारों और शाक्य तंगयुद मठों का बेजोड़ संगम और बहुत कुछ। जानिए पल्लवी की आवाज़ में संजय शेफर्ड की डायरी से घुमंतू के नए डेस्टिनेशन काजा़ के बारे में सिर्फ़ गाथा पर…
बजट ट्रिप के लिहाज से देश की पांच सबसे खूबसूरत जगहें – संजय शेफर्ड – पल्लवी
बजट ट्रिप के लिहाज से भारत के जैसलमेर से अच्छी कोई जगह हो नहीं सकती ।जैसलमेर एक खूबसूरत शहर है यहां पर दूर-दूर तक फैले रेत के टीले और उनके पीछे सूर्यास्त होता हुआ एक अद्वितीय नजा़रा। आपकी कल्पनाओं से बहुत आगे है ।खुला आसमान, ऊंट की सवारी और बड़े-बड़े किले। तो देर किस बात की सुनिए घुमंतू के साथ, पल्लवी की आवाज़ में, संजय शेफर्ड की डायरी से Budget Friendly destination
अंडमान -निकोबार द्वीप समूह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है ।यहां के साफ-सुथरे वातावरण हरियाली और समुद्री तटों की वज़ह से यहां पर पर्यटक खींचें चले आते हैं। यह द्वीप प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग और गार्डन ऑफ ईडन कहलाता है। यह प्रकृति के द्वारा दिया गया एक खूबसूरत तोहफा है जो 572 दीपों से बना है। तटों के सफेद रेत, समुद्र का नीला पानी और चारों तरफ फैली हरियाली प्रकृति ने क्या गज़ब की खूबसूरती बक्शी है। इसकी खूबसूरती के बारे में, और यहां के मौसम ,त्योहारों के बारे में बहुत कुछ जानने के लिए सुनिए संजय शेफर्ड के द्वारा लिखी गई कवर स्टोरी पल्लवी की आवाज़ में
माजुली एक ऐसी जगह है जिसे देखने की लालसा हर किसी के दिल में रहती है लेकिन माजुली के हिस्से के अपने कुछ दुःख भी है। इस द्वीप का साल दर साल सिकुड़नाद्वीप के लिए ही नहीं असम की500 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत के लिए खतरे की घंटी है। ये एक ऐसी जगह है जहां आपको ज़रूर जाना चाहिये
पुदुचेरी जो पांडिचेरी के नाम से भी जाना जाता है ।भारत के दक्षिण का एक केंद्र शासित प्रदेश का एक शहर है। आज भी फ्रांसीसी संस्कृति की झलक यहां लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां के प्राकृतिक दृश्य, खूबसूरत समुद्री तट ,यहां की संस्कृति यह सारी बातें पर्यटकों को अपने मोह में बांध लेने के लिए काफी है ।शांति की तलाश में पर्यटकों की पहली पसंद के लिए वाले जाना जाने वाला यह शहर और उसके आसपास के कई पर्यटक स्थलों के बारे में क्या आप ऐसे खूबसूरत जगह के बारे में और नहीं जानना चाहेंगे, तो सुनिए घुमंतू की श्रृंखला से संजय शेफर्ड की डायरी सै भारत की फ्रेंच कैपिटल पुदुचेरी और शांत समुद्र का किनारा ,पल्लवी गर्ग की आवाज़ में…
प्रकृति जैसे मानो अपनी सारी माया लुटा रही हो हसीन पहाड़ी वादियां ,नदी, घाटियां, झीलें .. क्या कुछ नहीं दिया है यहां पर प्रकृति ने? जिसकी खूबसूरती का एहसास ही किसी को भी रोमांचित कर सकता है ।घुमंतू की श्रंखला में भारत के प्रमुख उत्तर- पूर्वी भागों के चुनिंदा और सबसे खास स्थानों को बेहद खूबसूरती से वर्णन किया है संजय शेफर्ड ने और उसे उतने ही सुंदर अंदाज में आवाज़ दी है पल्लवी गर्ग ने.. यह दावा है कि एक बार आपने इसके बारे में सुन लिया तो आप वहां अपने आप को जाने से नहीं रोक सकेंगे..
अक्सर हमारा वक्त बीती -बातों को याद करने में चला जाता है| आप कुछ ऐसा ही पल्लवी के द्वारा लिखी गई कविताyad aa gya mujko gujra zamana(याद आ गया मुझको गुज़रा ज़माना) को सुनकर निश्चित तौर पर सब अपने बचपन में जरूर लौट जाएंगे, उन पलों को याद करेंगे, जो हमारे- आपके जीवन का एक खूबसूरत हिस्सा है |
प्रकृति प्रेमियों के लिए जो एक ऐसे ऐसे खूबसूरत नज़ारे की तलाश में है जो उनकी आंखों में हमेशा- हमेशा के लिए बस जाएं। तो उन्हें भारत के उत्तराखंड के प्रसिद्ध एक छोटे से पर्यटन स्थल लंढौर को नहीं भूलना चाहिए। अनछुई खूबसूरती जो हिमालय की ऊंची- ऊंची पहाड़ियां, देवदार चीड़ के घने जंगल यहां आने वाले पर्यटकों को खूब लुभाते हैं। यहां की शांति और सादगी का तो अपना ही अलग एक मज़ा है और बहुत कुछ है… जो आप इसके बारे में जानना ही चाहेंगे, तो सुने पल्लवी गर्ग की आवाज़ में…
Maa Kushmanda
नवरात्र के चौथे दिन दुर्गाजी के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा और अर्चना की जाती है। माना जाता है कि सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व जब चारों ओर अंधकार था और कोई भी जीव जंतु नहीं था तो मां दुर्गा ने इस अंड यानी ब्रह्मांड की रचना की थी
इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा कहते हैं।
मैं तुम्हे फिर मिलूँगी काव्य संग्रह की कुछ कविताओं को शीर्षक दिया है मुलाक़ात।
अमृता बीमार थीं, बहुत बीमार। अपने नग्मों, अपनी कविताओं के माध्यम से वो कभी अपनी माँ को याद करतीं, कभी सभी बंधनों के परे जा, कृष्ण से, गणेश से, साईं से मिलतीं, कभी बस अपने प्रेमी से मुलाक़ात के लिए किसी भी सीमा को पार करने की बात करतीं।
सुनते हैं शीर्षक मुलाक़ात के अंतर्गत समाहित मैं तुम्हे फिर मिलूँगी की कुछ कविताएँ गाथा ऐप्प पे, पल्लवी गर्ग की आवाज़ में
सुंदरधुंगा – संजय शेफर्ड – पल्लवी
सुंदरधुंगा का शाब्दिक अर्थ है हमारी पहाड़ियों में एक खूबसूरत पत्थर की घाटी। इस घाटी के प्रसिद्ध और अद्भुत हिमनद हैं मार्टोली और सुखराम की घाटी। उत्तराखंड में कथित पिंडारी ग्लेशियर के दाईं ओर का ट्रेक सुंदरधुंगा घाटी पिंडारी ट्रेक और कफनी ग्लेशियर ट्रेक की तुलना में अधिक कठिन माना जाता है।गाथा के घुमंतू के साथ सुंदर आइए चलते हैं पल्लवी के साथ
कभी आपने यह अनुभव किया है कि जिंदगी में कुछ रिश्ते जो हमारे खून के नहीं होते ,फिर भी हमारे जीवन में एक विशेष स्थान रखते हैं |उन्हें भूलना असंभव होता है |ऐसे ही एक रिश्ते का अनुभव अंगोना साहा हमारे साथ बांट रही है…
नयी नयी शादी के बाद कैसे हम हर वक़्त साथ रहना चाहते है। लगता है एक पल भी दूर रहने का मतलब है प्यार कम हो रहा है। पर कैसे वक़्त के साथ ये प्यारा सा रिश्ता भी परिपक्व होता है। वैवाहिक जीवन के पलो को बेहद खूबसूरती और सजीवता से प्रस्तुत करती है ये कहानी “ लेट उस ग्रो टुगेदर”
सयानी बुआ का नाम वास्तव में ही सयानी था या उनके सयानेपन को देखकर लोग उन्हें सयानी कहने लगे थे, । बचपन में ही वे समय की जितनी पाबंद थीं, अपना सामान संभालकर रखने में जितनी पटु थीं, और व्यवस्था की जितना कायल थीं, उसे देखकर चकित हो जाना पडता था| कहानी में सयानी बुआ के चरित्र को और अच्छे से समझने के लिए मनु भंडारी जी के द्वारा लिखी गई कहानी सयानी बुआ सुनते हैं माधवी शंकर जी की आवाज में
शान्तनु, अशोक की नीलांजना दीदी को , दीदी कभी नहीं बुला पाया. शान्तनु का किशोर मन शायद नीलांजना के रूप सौन्दर्य से इतना प्रभावित नहीं था जितना उसकी कुशाग्र बुद्धि और आत्मविश्वास से भरे सौम्य व्यक्तित्व से। .. .. शान्तनु का किशोरावस्था का प्यार क्या नीलांजना समझ पायी थी? क्या परिवार के सहयोग के बिना भी नीलांजना अपने भविष्य को सवार पायी थी? क्यो शान्तनु ने नीलांजना को सम्बोधित किया वीरांगना के नाम से , जानिए मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी वीरांगना में
दीनानाथ को एक कार्यालय में जब₹50 की नौकरी मिल जाती है, तो उसकी ईश्वर के प्रति श्रद्धा और बढ़ जाती है| कहानी के एक प्रसंग में दीनानाथ द्वारा गलत कार्य हो जाता है जिसके कारण ईश्वर से दंड मिलने की शंका से दीनानाथ के मन में भय व्याप्त हो जाता है | क्या दीनानाथ का भय वास्तव में सत्य हो जाता है ?क्या दीनानाथ उसी प्रकार ईश्वर में आस्था रख पाता है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी बासी भात में खुदा का साझा ,सुमन वैद्य जी की आवाज में….
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