ये कहानी है एक ऐसे इंसान की जो एक जानवर को पाल के रखता है , और समय के साथ वो जानवर बड़ा होता जाता है , उस इंसान के घर में उसकी बीवी भी बहुत कलेश करती है क्युकी उसकी अपने पति से कुछ उमीदें और कुछ शक हैं जिनको वो अधूरा पति है , दूसरी और वो जानवर समय के साथ बड़ा होता जाता है , और वो उस इंसान को खाना चाहता है , फिर एक वक्त ऐसा आता है की उस जानवर जिसे कैद किया गया था इंसान में लड़ाई होती है ,,, कौन था वो जानवर ? और क्या हुआ इस लड़ाई में ? जानने के लिए सुनिए ये कहानी
ये कहानी है एक ऐसे इंसान की जो एक जानवर को पाल के रखता है , और समय के साथ वो जानवर बड़ा होता जाता है , उस इंसान के घर में उसकी बीवी भी बहुत कलेश करती है क्युकी उसकी अपने पति से कुछ उमीदें और कुछ शक हैं जिनको वो अधूरा पति है , दूसरी और वो जानवर समय के साथ बड़ा होता जाता है , और वो उस इंसान को खाना चाहता है , फिर एक वक्त ऐसा आता है की उस जानवर जिसे कैद किया गया था इंसान में लड़ाई होती है ,,, कौन था वो जानवर ? और क्या हुआ इस लड़ाई में ? जानने के लिए सुनिए ये कहानी
ये कहानी है एक ऐसे इंसान की जो एक जानवर को पाल के रखता है , और समय के साथ वो जानवर बड़ा होता जाता है , उस इंसान के घर में उसकी बीवी भी बहुत कलेश करती है क्युकी उसकी अपने पति से कुछ उमीदें और कुछ शक हैं जिनको वो अधूरा पति है , दूसरी और वो जानवर समय के साथ बड़ा होता जाता है , और वो उस इंसान को खाना चाहता है , फिर एक वक्त ऐसा आता है की उस जानवर जिसे कैद किया गया था इंसान में लड़ाई होती है ,,, कौन था वो जानवर ? और क्या हुआ इस लड़ाई में ? जानने के लिए सुनिए ये कहानी
गर्मी की चिलचिलाती धूप और दूर-दूर तक सपाट सूखी धरती ।पानी का नामोनिशान नहीं।यहाँ वीरान खंडहरों में कुछ नंग-धडंग बच्चे और अम्माएँ। निपट अकेली, बिना किसी सहारे के कैसे रह रही हैं ?ना तन ढकने के लिए कपड़े और ना घर का कोई आदमी !
प्यार एक एहसास है। प्यार एक जुनून है। वह किसी दायरे में नहीं बाँधा जा सकता । वह कभी भी ,कहीं भी हो जाता है। फिर चाहे उसको मंजिल मिले या ना मिले। प्यार अधूरा रह जाए तो वह उम्र भर याद रहता है । सभी प्यार करने वालों को मंजिल मिले यह जरूरी तो नहीं । सच्चा प्यार तन से नहीं मन से होता है और मन ! वह तो चंचल होता है।
लड़की देखने जाने के लिए उतावला परिवार होटल पहुँचता है। और वहाँ पर लड़की के पिता को स्वागत के लिए ना पाकर नाराज होता है । जब लड़की अपनी माँ के साथ आती है तो अफसर पुत्र के पिता उसकी लंबाई नापते हैं। और वास्तविक रंग देखने के लिए लड़की को मुँह धोने के लिए कहते हैं ।उसके बाद तो वहाँ का सारा माहौल बदल जाता है।
मनुष्य का मन बड़ा चंचल होता है। उसको वश में करने के लिए ना जाने कितने वर्षों जप- तप किए जाते हैं। सरहपाद ने भी मन को वश में कर लिया था । किंतु एक चौदह वर्षीय बालिका के आगे मन हार बैठे। तो क्या उनकी सारी सिद्धियाँ, सारी तपस्या व्यर्थ हो गई ?
प्यार एक एहसास है। प्यार एक जुनून है। वह किसी दायरे में नहीं बाँधा जा सकता । वह कभी भी ,कहीं भी हो जाता है। फिर चाहे उसको मंजिल मिले या ना मिले। प्यार अधूरा रह जाए तो वह उम्र भर याद रहता है । सभी प्यार करने वालों को मंजिल मिले यह जरूरी तो नहीं । सच्चा प्यार तन से नहीं मन से होता है और मन ! वह तो चंचल होता है।
मंटो की ये कहानी जीवन के कई पहलुओं पर नज़र डालती है , जैसा की हम जानते हैं मंटो ने उन औरतो और गलियों के बारे में बहुत लिखा है , जिन्हे लोगो बाज़ारू कहते हैं, पर इंसान वो भी हैं और एहसास उनके दिलों में भी होते हैं , ये कहानी भी एक ऐसी ही औरत की है , जो जवानी से बुढ़ापे की ओर बढ़ती है तो उसके जीवन में बहुत कुछ बदल जाता है
समय बदलने पर आदर्शों की प्रसांगिकता रह जाती है ? जब परिवार आपके आदर्शों का सम्मान ना करे तो और एक रंगकर्मी का जीवन सिर्फ मंच पर ही है या बहार की दुनिया में भी है ,,,बहुत से उलझे हुए सवालों और ज़िंदगी की मुश्किलों को बयान करती ये कहानी ,,ज़रूर सुने ,,, लगेगा जैसे हमारे जैसे ही किसी अपने की कहानी है
माजुली एक ऐसी जगह है जिसे देखने की लालसा हर किसी के दिल में रहती है लेकिन माजुली के हिस्से के अपने कुछ दुःख भी है। इस द्वीप का साल दर साल सिकुड़नाद्वीप के लिए ही नहीं असम की500 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत के लिए खतरे की घंटी है। ये एक ऐसी जगह है जहां आपको ज़रूर जाना चाहिये
सत्य की खोज में इंसान हमेशा से रहा है और इसे खोजने के लिए कभी उसने धर्म को गहराई से समझने की कोशिश की है तो कभी सामज को और इन सबके अलावा जीवन आसान नहीं होता , मनुष्य को अत्याचार भी सहने पड़ते हैं कई बार ,,, आसान से शब्दों में कहा जाये तो सत्य , धर्म , राजनीति , सामाजिकता और अत्याचार इन सबसे घिरा इंसान सत्य की खोज कैसे करेगा और इन सब का उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
कठिन परिश्रम ,दृढ़ शक्ति दूरदर्शिता और कुछ कर गुज़रने का सपना लेकर कीमत राय गुप्ता जी ने किस प्रकार मात्र 10000 से 17 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया ? हैवेल्स इंडिया लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनी के मालिक कीमत राय गुप्ता की ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव के कई पहलुओं से रू-ब-रू होते हैं ,मज़ीद की आवाज़ से जानते हैं आम आदमी खास कहानी में…
कादम्बिनी में प्राण तब वापस आए जब उसे जलाने के लिए शमशान में रखकर, लोग लकड़ी लेने चले गए। अपने आस पास किसी को ना पाकर कादंबनी को लगा कि वह मर चुकी है और जीवन तथा मृत्यु के बीच लटक रही है, उसकी इसी जीवन और मृत्यु के बीच की यात्रा की कहानी।
दूर से हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होता | ऐसा ही कुछ आकाश को अनुभव हुआ है शहर दिल्ली के बारे | आकाश अपने स्कूल के दिनों से दिल्ली की चकाचौंध से बहुत प्रभावित था | जब आकाश की मुलाकात दिल्ली शहर में अपने बचपन की दोस्त निहारिका से हुई तो उसका यह भ्रम टूट गया |कैसे ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं निधि मिश्रा की आवाज में अभिलाष दत्ता के द्वारा लिखी गई कहानी एक मुलाकात
जो देश सोने की चिड़िया हुआ करता था वो अब गरीब होने लगा और उस देश से बाहर निकल कर गया हुआ इंसान , बाहर के देशो में बहुत खुश होता है |साफ़ सफाई,चकाचौंध सब कुछ उसे अच्छा लगता है|वो पैसे कमाने में लग जाता है,अपने नाम बनाने में लग जाता है, पर वो नाम ही क्या नाम जिसे कोई अपनेपन से पुकार भी न सके ? देश से बाहर जाकर अपनी पहचान बना पाना एक गर्व की बात है पर क्या उस पहचान में अपनापन होता है ?
क्या आपने कभी उस नदी का खौफ महसूस किया है, जिसे पूरा देश ‘माँ’ कहकर पूजता है? जब जीवनदायिनी गंगा ही अपना रौद्र रूप धारण कर ले और पल भर में बस्तियों को निगलने लगे… तो प्रकृति के आगे इंसान की हैसियत क्या रह जाती है?
‘जय गंगा’ हिंदी साहित्य के दिग्गज कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला रिपोर्ताज (जीवंत कथा) है। यह मात्र एक कोरी कल्पना नहीं, बल्कि 1947 की उस खौफनाक बाढ़ का आँखों देखा और दिल दहला देने वाला सच है, जिसने पूरे इलाके की छाती पर तांडव किया था।
यह दास्तां सिर्फ पानी के कहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उस कड़वे सच को भी बेनकाब करती है जो आपदा के समय सामने आता है। एक तरफ कहानी में वो बेबस और गरीब ग्रामीण हैं, जो केले के पत्तों का ‘भेला’ (जुगाड़ की नाव) बनाकर लहरों से लड़ते हुए अपनी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ… समाज का वो अमीर और संवेदनहीन तबका है, जो मौत के इस खौफनाक मंजर के बीच भी अपनी सुरक्षित और बड़ी नावों पर ‘हारमोनियम और तबले’ के साथ जल-विहार (पिकनिक) का लुत्फ़ उठा रहा है।
रेणु जी की जादुई लेखनी आपको सीधे उस उफनती नदी के बीच ले जाकर खड़ा कर देती है। भूख, खौफ, बेबसी और इन सबके बीच भी ज़िंदा रहने की इंसान की कभी न टूटने वाली हिम्मत—यही ‘जय गंगा’ की असली आत्मा है।
किताब के पन्नों पर लिखी बाढ़ को आप सिर्फ पढ़ते हैं, लेकिन जब आप इसे सुनते हैं, तो आप उसे महसूस करते हैं। जब तेज़ लहरों की डरावनी गड़गड़ाहट, टूटते हुए कच्चे मकानों का दर्द और रेणु जी के ठेठ देसी किरदारों की आवाज़ आपके कानों तक पहुँचेगी, तो यह कहानी आपके ज़हन से हफ्तों तक नहीं उतरेगी।
प्रकृति के खौफ और इंसानियत की इस सबसे सच्ची और झकझोर देने वाली दास्तां को महसूस करें। अपनी आँखें बंद करें और लहरों के बीच ज़िंदा रहने की इस जंग का हिस्सा बनें।
यह कहानी जगन्नाथ नाम के एक बेहद कंजूस बूढ़े व्यक्ति की है जिसने थोड़ा सा धन बचाने के लिए अपनी बीवी और बहु का उचित इलाज नहीं करवाया, परिणाम स्वरूप उनकी मृत्यु के बाद उसका बेटा भी उसके पोते गोकुल को लेकर घर से पलायन कर जाता है। अपने कंजूस स्वभाव से ग्रस्त जगन्नाथ अपने पोते गोकुल की मृत्यु का कारण बनता है तथा पागल हो स्वयं भी प्राण त्याग देता है।
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