बुजुर्ग सभ्य और सभ्रांत भाषा मे गालियाँ देते हैं-बल्ड़ी , रास्कल और कुछ इसी तरह की।बच्चे समझते नहीं । न उनकी गालियों को और न उनकी ऊँची हैसियत को । एक बड़ा बच्चा उलझनें लगता है तो -तो जोसेफ बीच बचाव करने उठ जाता । तुम थोड़े आदर से नहीं बात कर सकते ?देखते नहीं बुजुर्ग आदमी है ….. आदर से….ऊ का होता है सर । जोसेफ एक यात्री है, जो प्लेटफार्म नंबर10मे अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहा है ।प्लेटफार्म मे12 से17 साल के 7-8बच्चों का झुंड देखता है ।जो गन्दे कपड़े पहने हुए हैं लेकिन उन बच्चों की क्रियाकलाप उसे कुछ परेशान करती हैं । पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तुषारकान्त उपाध्याय जी के द्वारा लिखी कहानी प्लेटफार्म नंबर10….अमित तिवारी जी कि आवाज़ में….।
पिंगमाल्य एक मूर्तिकार है सौन्दर्य की देवी अपरोदिता का वरदान उसे प्राप्त है-उसके हाथ में असुन्दर कुछ बन ही नहीं सकता। अपरोदिता का वरदान पिंगमाल्य को असमंजस की स्थिति में डाल देता है क्या था वह वरदान और आखिर पिंगमाल्य क्या निर्णय लेता है जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय की जी के द्वारा लिखी गई कहानी कलाकार की मुक्ति अमित तिवारी जी की आवाज में
“प्रेम सिर्फ प्रेम होता है, ना यह गांव देखता है… ना शहर ..और ना सरहदें ….”” एक ऐसी प्रेम कहानी जिसमें एक ग्रामीण युवक कार्तिक , एक युवती अवनी अवनी से बाल्यकाल से बेतहाशा प्रेम करता है किंतु अवनी उसका उपहास करती है | क्या होता है उस उपहास के कारण युवक कार्तिक के साथ ?? जानते हैं कहानी आई हेट यू में…..
छोटन की आत्मा एकदम चीत्कार उठी थी कि बेंगा को न कैंसर था, न एड्स, न टी बी – महज दस्त और बुखार से पीडित था, फिर भी दो दो अस्पताल से गुजर कर भी वह इलाज नहीं पा सका। वह सिहर उठा था कि आज गरीबों के लिये इलाज किस कदर हास्यास्पद और मुश्किल हो गया है। कल इन्हें फोडे फ़ुन्सी, सर्दी खांसी और सरदर्द से भी मरना पड सकता है। मानो इनके लिये हर रोग ही कैंसर और एड्स बनने जा रहा है। इलाके का इकलौता अस्पताल है जहां का डॉक्टर कौतुक गरीब लोगों के इलाज करने से बेपरवाह अपने यार दोस्तों में ही व्यस्त रहता है उसी अस्पताल में छोटन नाम का एक डोम होता है जिससे यह सब देखा नहीं जाता कहानी में जानते हैं किस प्रकार गरीबों की जान के साथ खिलवाड़ होता है |बेहद मार्मिक कहानी है कीड़े पतंगे
सब औरतें एक जैसी होती हैं, कि आखिरकार उनमें कोई फर्क नहीं होता। इस बात को मत सुनना क्योंकि यह झूठ है। हरेक औरत का अपना स्वाद और अपनी खुशबू होती है।‘ ‘पर यह सच नहीं है यार।‘ कमल कह रहा था, ‘इस मारुति की पिछली सीट पर कई औरतें लेटी हैं, लेकिन जब वे रुपयों को पर्स में ठंूसती हुई, हंसकर निकलती हैं, तो एक ही जैसी गंध छोड़ जाती हैं। बीवी की गंध हो सकता है, कुछ अलग होती हो। क्या खयाल है तुम्हारा?‘ मुंबई में कमल और उसका एक दोस्त पूरी रात मस्ती में गुजारना चाहते हैं | इसी घटनाक्रम में उनकी मुलाकात ऐसी लड़कियों और औरतों से होती है जो देह व्यापार जैसे घिनौने व्यवसाय से जुड़ी होती हैं | आखिर उसके पीछे उनकी क्या वजह थी पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कहानी उस रात की गंध
लॉर्ड इर्विन ने इग्नोर किया और गांधी एक लंबे धूल भरे रास्ते पर चलते-चलते दांडी पहुँच गए। गांधी को वहाँ अरब सागर मिला। नमक से बेपनाह भरा सागर। बस्तर का कोई सागर नहीं। भूगोल में उसकी जमीन इस तरह बरती हुई है कि उसके हिस्से कभी कोई नमकीन सागर नहीं होगा। हजारों, लाखों किलोमीटर की वे जंगली दुर्गम पहाड़ी दूरियाँ कभी नापी नहीं जा सकीं जिनसे चल कर उतरना बीमार होना था, मौत था… और इस तरह बरसों तक पहुँचते रहना था नमक की एक दुकान तक। दांडी का इतिहास हुआ। इतिहास, बस्तर के जंगल के बहुत बाहर पड़ा एक तुच्छ शब्द।
दूसरा देवदास – ममता कालिया – शैफाली कपूर
एक युवा संभव हरिद्वार हर की पौड़ी अपनी नानी के यहां आया हुआ है। गंगा आरती का विहंगम दृश्य के बाद जब एक मंदिर जाता है तो उस मंदिर में उसे एक गुलाबी साड़ी पहने एक खूबसूरत युवती उसी के बगल में पूजा करती हुई नज़र आती है। संभव के मन में उस युवती के प्रति एक आकर्षण महसूस होता है, किंतु बाद में भीड़ में वह कहीं नज़र नहीं आती है इस पर संभव दुबारा उस युवती से मिलने के लिए बेहद विचलित हो जाता है। क्या पुनः दोनों का आमना-सामना हो पाएगा? क्या संभव अपने दिल की बात उससे कह पाएगा? पूरी कहानी जानने के लिए सुनिए ममता कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी दूसरा देवदास, शैफ़ाली कपूर की आवाज़ में…
आप खुद सोचिये कि अगर सरकार के विचार में हिन्दी कहीं पर रुकी पड़ी है तो उसे आगे बढ़ाने की ही बात होगी न। इस देश में किसी को आगे बढ़ाने की बात सरकार ही तो करती है? हिन्दी के मामले में तो सरकार केवल बात ही नहीं कर रही बल्कि अगर ध्यान दें तो सरकार ने इन साठ सालों में हिन्दी को धक्के लगा-लगा कर इंच-इंच आगे बढ़ाने की कोशिश में क्या-क्या नहीं किया।हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है किंतु आधुनिक समय में हिंदी के प्रयोग के लिए भी लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत पड़ रही है इसी बात पर व्यंग करते हुए कमलेश पांडे जी की कहानी प्रोत्साहित होती हिंदी अमित तिवारी जी की आवाज में
कहानी मंदी में जान सकते हैं कि मंदी के दौर में किस प्रकार ग्राहकों को लुभाने की कोशिश की जा रही है |नायक किस प्रकार इन बातों को अनुभव कर रहा है |जानने के लिए सुनते हैं मोहन राकेश के द्वारा लिखी गई कहानी मंदी ,सुमन वैद्य की आवाज में
जबसे निशीथ साथ चलते- चलते अचानक अजाने मोड पर मुड ग़या था तो ठिठक कर उस चौराहे पर उसके आस-पास फुरसत ही बाकि रह गई थी और एक अंधेरा खाली कोना। बस एक सप्ताह और वह उबर आई थी नई जीजिविषा के साथ.. एक आत्मनिर्भर आत्मविश्वासी लड़की के व्यक्तित्व मे एक चुंबकत्व होता है। केतकी रेडियो स्टेशन मे काम करती थी. खूबसूरत थी । बस अगर शादी नहीं करी तो लोगों को बाते बनाने का मौका मिल जाता है। जानिए नायिका केतकी के जीवन मे आने वाले कई उतार-चढ़ावों को और उसका हर बार परिस्थिति को हरा कर आगे बढ़ने की यात्रा , जानने के लिए सुनते हैं मनीषा कुलश्रेष्ठ की लिखी कहानी एक नदी ठिठकी सी”, पूजा श्रीवास्तव की आवाज में…
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