शल्य पर्व में कर्ण की मृत्यु के पश्चात कृपाचार्य द्वारा सन्धि के लिए दुर्योधन को समझाना, सेनापति पद पर शल्य का अभिषेक, मद्रराज शल्य का अदभुत पराक्रम, युधिष्ठिर द्वारा शल्य और उनके भाई का वध, सहदेव द्वारा शकुनि का वध, बची हुई सेना के साथ दुर्योधन का पलायन, दुर्योधन का ह्रद में प्रवेश, व्याधों द्वारा जानकारी मिलने पर युधिष्ठिर का ह्रद पर जाना, युधिष्ठिर का दुर्योधन से संवाद, श्रीकृष्ण और बलराम का भी वहाँ पहुँचना, दुर्योधन के साथ भीम का वाग्युद्ध और गदा युद्ध और दुर्योधन का धराशायी होना, क्रुद्ध बलराम को श्री कृष्ण द्वारा समझाया जाना, दुर्योधन का विलाप और सेनापति पद पर अश्वत्थामा का अभिषेक आदि वर्णित है|इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानीशल्य पर्व ,शिवानी आनंद की आवाज में…
जिससे तुम्हारा नुकसान हो रहा हो, उससे अलग ही रहना अच्छा है, चाहे वह उस समय के लिए तुम्हाहरा दोस्तु भी क्यों न हो।पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी जी के द्वारा लिखी गई कहानी दो घड़े, निधि मिश्रा की आवाज में
एक बार महाराजा विक्रमादित्य वेश बदलकर अपने राज्य में भ्रमण कर रहे थे ,तभी अचानक से उन्हें एक झोपड़े से कुछ आवाजें सुनाई दी |जिससे उन्हें पता चला कि झोपड़ी में रहने वाला रहने वाले दंपत्ति निसंतान है| उन्हें संतान तभी प्राप्त हो सकती है जब स्वयं महाराजा विक्रमादित्य शिव भगवान की स्तुति में अपने अंग हवन कुंड में काट कर डाल दें| महाराजा विक्रमादित्य ने क्या वास्तव में उस दिन निसंतान दंपत्ति के लिए ऐसा किया? क्या हुआ उसके बाद ?इस पूरी घटना को जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सत्रहवीं पुतली विद्यावती विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना,शिवानी आनंद की आवाज में
बेताल पच्चीसी की कहानियों में से एक कहानी पत्नी किसकी जिसमें बेताल, विक्रमादित्य के सामने एक कहानी सुनाता है और उससे प्रश्न करता है कि यदि एक स्त्री गलती से अपने पति का सिर उसके पति के मित्र के धड़ में और मित्र का सिर अपने पति के धड़ में लगा देती है तो वास्तव वास्तव मं किसे अपना पति समझे? राजा विक्रमादित्य किस प्रकार इस प्रश्न का उत्तर बेताल को देते हैं ?
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