पेट में थोड़ी जान पड़ी तो आँखों से आँसू छलछला उठे और अम्मा का रुदन पूरे गाँव में भर गया। नदिया का गाड़ा, जीयतै खाइस, मोइते खाइस।गांव में 90 साल के बब्बा की मृत्यु हो जाती है |मृत्यु के पश्चात क्रिया कर्म करने के लिए भी उनके घर में धन नहीं होता है |बब्बा की वृद्ध पत्नी गोमती अम्मा अभी जीवित है किंतु गरीबी के कारण उनका शरीर भी बेहद कमजोर हो चुका है | ऐसी स्थिति में बब्बा का अंतिम संस्कार कैसे होता है? और उसे कौन कराता है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सविता पाठक के द्वारा लिखी गई नीम के आंसू, निधि मिश्रा जी की आवाज में
पुराने समय से ही यह बात चर्चा का विषय रही है कि सबसे छोटी जीवित चीज आखिर क्या् है? वैज्ञानिकों ने किस प्रकार जीवाणुओं का पता लगाया | विनोद रैना द्वारा लिखी गई पूरी चर्चा कथा जीवाणु खोज की सुनते हैं ,निधि मिश्रा की आवाज में
फुलवा मात्र मात्र 10 साल की मासूम बच्ची है |जिसके साथ मुखिया के पोते ने बलात्कार किया है| कहानी में फुलवा के अपराधी को सजा दिलाने की जद्दोजहद में उससे बार-बार उसे बार-बार उस बात का स्टेटमेंट लिया जाता है |मासूम फुलवा स्टेटमेंट और बलात्कार जैसी बातों से अनभिज्ञ है| स्टेटमेंट के नाम पर मासूम फुलवा के साथ साथ क्या हो रहा है ?दिल को झकझोर देने वाली रश्मि की कहानी स्टेटमेंट, सुनते हैं निधि मिश्रा के द्वारा
कहानी में लेखक कार्निवल गया है वही उसे तेरह-चौदह वर्ष का एक लड़का दिखाई देता है उसके गले में फटे कुरते के ऊपर से एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी है और जेब में कुछ ताश के पत्ते है । उसके मुँह पर गम्भीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा है लेखक न जाने क्यों उसकी ओर आकर्षित होता है |लेखक उस लड़के के साथ कुछ समय बिताता है| छोटा जादूगर से जानने वाले उस लड़के के जीवन में क्या- क्या घटित हो रहा है ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी छोटा जादूगर ,निधि मिश्रा की आवाज में
नाहर एक हिंदुस्तानी युवक है उसने एक विदेशी लड़की कैथी से विवाह किया है और विवाह के बाद जो विदेश में ही रहने लगा | कैथी ने इस विवाह को लेकर नाहर के सामने एग्रीमेंट कराया है | एग्रीमेंट नाहर के लिए एक जी का जंजाल साबित हो रहा है |क्या होगा आगे कहानी में नाहर और कैथी का विवाह टिक पाएगा| जानने के लिए सुनते हैं सुदर्शन प्रियदर्शिनी की लिखी कहानी आचार संहिता, निधि की आवाज में..
खूबसूरत नज़्म परवाज़ इस बात का एहसास दिला रही है जब ऐसे वक्त में जब खामोशी आपका साथी बन रही हो और जिन -जिन बातों पर नाज़ करते हो वह आपका साथ छोड़ने लगे, ऐसे उदासीन वक्त में फिर से एक बार कोई आके उन उदासीन पलों को फिर से रंगीन कर दें और जिंदगी फिर से एक नई उड़ान भरने लगे ।सुनते हैं राकेश रविकांत टाक की नज़्म परवाज़, नयनी दीक्षित की आवाज में …
कहानी का नायक एक मेहनती गरीब क्लर्क है ,जबकि उसका मित्र ईश्वरी एक बड़े जमीदार का लड़का है |नायक को अपने अमीर दोस्त के साथ कुछ दिन बिताने को मिलते हैं ईश्वरी के ठाठ- बाट, शानो- शौकत से नायक भी अपने को अछूता नहीं रख पाता है |कहीं ना कहीं नायक के मन में भी अमीरी का नशा चढ़ने लगता है| नायक के चरित्र में आए इस बदलाव को जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद्र जी के द्वारा लिखी गई कहानी नशा भूपेश पांडे जी की आवाज में…
यह कहानी बाल मन की व्यथा है |एक छोटी सी बच्ची घर से दूर अध्ययन हेतु छात्रावास के कड़े अनुशासन में रह रही है| अपने अतीत में बिताए घर के समय को स्मरण कर रही हैऔर अपने आने वाले अवकाश का बेसब्री से इंतजार करती है ,ताकि उसी बचपन में लौट सकें| अंजना वर्मा की भावुक कर देने वाली कहानी लेकिन कब ,सुनते हैं विनीता श्रीवास्तव की आवाज में..
दर्पण – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कितने ही वर्तमान के अरमानों को कुचल कर ,इंसान भविष्य की इमारत बनाने की इच्छा तो रखता है किंतु क्या यह सच नहीं है कि जब भविष्य में जब उन इच्छाओं के पूरा होने का क्षण आता है तब तक उस इच्छा का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता। ऐसा ही कुछ हो रहा है नायिका बानी के साथ। बानी जब तक मां-बाप के साथ थी तो उनके कड़े अनुशासन के कारण अपनी छोटी-छोटी इच्छाओं का दमन करना पड़ता था ।आज जब बानी शादीशुदा है तो पति के नियमों के चलते उसे फिर अपनी इच्छाओं पर मौन का चोला पहनाना पड़ रहा है। इतने वर्षों के बाद जब उसकी छोटी-छोटी इच्छाओं का सम्मान किया जा रहा है तो वह क्यों उत्साह विहीन हो चुकी है ?बेहद भावुक कर देने वाली ममता कालिया की कहानी है दर्पण, जिसे आवाज़ दी है शैफ़ाली कपूर ने…
सुधा अरोड़ा की कहानियां आम लोगों के जीवन से कहीं ना कहीं जुड़ी हुई होती है |कहानी सत्ता संवाद में स्पष्ट रूप से इस बात की झलक मिलती है |कहानी में घर की सत्ता घर की महिला के पास है कहानी में घर की मुख्य कर्ताधर्ता महिला किस प्रकार का व्यवहार करती है? ऐसे में वह किस प्रकार घर में सभी से संवाद करती है?इसे बेहद रोचक ढंग से कहानी में प्रस्तुत किया गया है|
Reviews for: Neem ke aansu (नीम के आँसू)