Maa Chandraghanta
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है।चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है।चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है। माता के सिर पर अर्ध चंद्रमा मंदिर के घंटे के आकार में सुशोभित हो रहा जिसके कारण देवी का नाम चन्द्रघंटा हो गया है।अपने इस रूप से माता देवगण, संतों एवं भक्त जन के मन को संतोष एवं प्रसन्न प्रदान करती हैं। मां चन्द्रघंटा अपने प्रिय वाहन सिंह पर आरूढ़ होकर अपने दस हाथों में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र,धनुष, भरे हुए तरकश लिए मंद मंद मुस्कुरा रही होती हैं। इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए। इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। इसलिए हमें चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करना चाहिए। इससे सारे कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद के अधिकारी बन सकते हैं। यह देवी कल्याणकारी है।मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जन्म-जन्म का डर समाप्त हो जाता है और जातक निर्भय बन जाता हैं।
Chants credit- Jyoti upreti sati
एक अट्ठारह साल की युवती आज अपने मां- बाप के घर से भागकर ट्रेन में कहीं जा रही है और उसी ट्रेन में उसकी मुलाकात एक अनज़ान व्यक्ति से होती है ।उनकी यह अनजान मुलाकात उस लड़की की सोंच में एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आती है। क्या आप जानना नहीं चाहेंगे कि क्या थी उस लड़की के भागने की सही वज़ह और उस अनज़ान से ऐसी क्या बात हो गई जिसने लड़की की सोंच को पूरी तरीके से बदल दिया ?एक खूबसूरत सी कहानी दो अनज़ानों के बीच । सुनिए अब्बास पठान के द्वारा लिखी गई कहानी अनज़ान मुलाक़ात पल्लवी गर्ग की आवाज़ में…
काजा – संजय शेफर्ड – पल्लवी
अगर एक ऐसी जगह आपका जाने का मन हो जहां प्राचीन ऐतिहासिक संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिले तो घुमंतू की सलाह है कि आप हिमाचल प्रदेश राज्य के बेहद खूबसूरत जगह काज़ा को अपना नया Destination बनाइए, जहां पर बर्फ़ से ढके पहाड़, बुदबुदाती शांत नदी, सुरम्य बंजर परिदृश्य के साथ-साथ रंगीन त्योहारों और शाक्य तंगयुद मठों का बेजोड़ संगम और बहुत कुछ। जानिए पल्लवी की आवाज़ में संजय शेफर्ड की डायरी से घुमंतू के नए डेस्टिनेशन काजा़ के बारे में सिर्फ़ गाथा पर…
किब्बर – संजय शेफर्ड – पल्लवी
कभी-कभी हमारा मन भीड़-भाड़ की जगह से हटकर किसी शांत, कम जनसंख्या वाले क्षेत्र और बेहद खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के बीच में जाने का करता है, तो अब घुमंतू ने आपकी इस समस्या का समाधान कर दिया है। दुनिया की सबसे ऊंचाई में बसे एक गांव किब्बर की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराते हुये ।यहां के सादा और उत्साहपूर्ण जीवन को देखकर आपका मन खुशी से झूम उठेगा। हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत गांव किब्बर की यात्रा करें,घुमंतू के साथ पल्लवी की आवाज़ में सिर्फ़ गाथा पर..
Maa Kushmanda
नवरात्र के चौथे दिन दुर्गाजी के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा और अर्चना की जाती है। माना जाता है कि सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व जब चारों ओर अंधकार था और कोई भी जीव जंतु नहीं था तो मां दुर्गा ने इस अंड यानी ब्रह्मांड की रचना की थी
इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा कहते हैं।
मानव है मेरे राम – Episode -20 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
शिवोऽहम् साहित्यिक मंच के माध्यम से आइये आराधना करते हैं आदिशक्ति माँ भगवती की ईश आस्था के साथ कि महामारी के कठिन दौर में माँ अपना वरद हस्त हम सबके ऊपर बनाये रखें और पूरे भारतवर्ष को ही नहीं वरन पूरे विश्व को आपदा से निपटने की शक्ति प्रदान करें।
हम सुनेंगे श्री दुर्गा सप्तशती का हिंदी काव्यानुवाद और साथ ही शक्ति मंत्रों की व्याख्या डॉ मधु चतुर्वेदी जी के साथ पूरे नवरात्र लगातार।
आज पहली कड़ी और पहला अध्याय।
मानव है मेरे राम – Episode -75 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए कैसे हुआ रामायण का सृजन || मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode – 3- Dr. Pradeep Dixit
जानिए महर्षि विश्वामित्र द्वारा तड़का वध के लिए राम को पुरस्कार स्वरुप दी गयी ब्रह्म शक्तियों के बारे में, “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l अगली कड़ी में जानिए कहाँ गाया जाता है, राम को जगाने वाला श्लोक I
नवरात्रि – नौ देवियाँ, नौ दिव्य गाथाएँ
नौ दिन, माँ दुर्गा के नौ स्वरूप और हर स्वरूप से जुड़ी एक अद्भुत गाथा।
नवरात्रि केवल आस्था और आराधना का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, साधना और आत्मिक जागरण की एक दिव्य यात्रा है। इन नौ पावन दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। हर स्वरूप की अपनी अनूठी पौराणिक कथा, विशेष महिमा और जीवन को प्रेरित करने वाला संदेश है।
कहीं माँ साहस और शक्ति का प्रतीक हैं, तो कहीं ममता, करुणा, ज्ञान और सृजन का। मान्यता है कि माँ भगवती की आराधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं माँ के इन नौ स्वरूपों की उत्पत्ति, उनकी महिमा और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएँ?
गाथा की इस विशेष नवरात्रि श्रृंखला में जानिए नवदुर्गा के नौ स्वरूपों से जुड़ी रोचक कथाएँ, उनके आध्यात्मिक अर्थ और जीवन को दिशा देने वाले संदेश।
सुनिए माँ दुर्गा की नौ दिव्य गाथाएँ और अनुभव कीजिए भक्ति, शक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम।
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