Maa Skandamata
नवरात्रि के पंचम दिन मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की जाती है। स्कंद माता का रूप सौंदर्य अद्वितिय आभा लिए शुभ्र वर्ण का होता है। वात्सल्य की मूर्ति हैं स्कंद माता। मान्यता अनुसार संतान प्राप्ति हेतु मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है।पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता। कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है।
स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है।
रामायण, भारतीय साहित्य की अनुपम कृति, जिसमें नारी शक्ति के अद्वितीय आयामों का गहराई से चित्रण किया गया है, इस नवरात्रि “रामायण की 9 महान नारी शक्तियाँ”- नौ असाधारण महिला पात्रों की कहानियों के माध्यम से, नारी शक्ति की अनेक स्वरूपों को प्रस्तुत करती है।अनुपम रमेश किंगर की सुमधुर आवाज़ में इन कहानियों को सुनना न केवल आपको भावविभोर कर देगा बल्कि आपको नारी शक्ति की अदम्य गाथा के प्रत्येक पहलू से रूबरू भी कराएगा। यह सिर्फ़ और सिर्फ़ “गाथा” पर उपलब्ध है
अहिल्या, महर्षि गौतम की पत्नी हैं। अनेक हिन्दू शास्त्रों में उनकी कथा का वर्णन है, जिसमें देवराज इंद्र द्वारा उनके साथ किए गए छल, उनके पति द्वारा उनकी निष्कामता के लिए श्राप, और उनके श्राप से मुक्ति की वर्णन है जो भगवान राम द्वारा होती है।
Maa Katyayani
नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। मां दुर्गा की छठवीं शक्ति कात्यायनी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है।
कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया।
इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलाईं। इनका गुण शोधकार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं। ये वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गईं। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं।
बालि की पत्नी तारा, रामायण में एक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व है। किष्किंधा नगर की सम्राज्ञी तारा सुंदर थीं, लेकिन उनके साथ वाकचातुर्य और कुशल राजनीतिज्ञ भी थे। इसलिए वाल्मीकि ऋषि ने उन्हें रामायण में सभी स्त्रियों में सर्वाधिक महत्व दिया है।वानर समाज में पुरुषों की प्रमुखता थी। स्त्रियाँ केवल भोग्य वस्त्र थीं। सुग्रीव की कनिष्ठ पत्नी का दर्जा उसने स्वीकार करने की शुरुआत की। तारा की कितनी ही मानसिक पीड़ा हो, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन वे अपने पुत्र के भविष्य और वानर समुदाय के हित के लिए सभी पीड़ा को खुशी से सहन किया। रामायण में तारा जैसी उत्कृष्ट स्त्री कोई और नहीं है|
शबरी की कथा धर्म और भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी निष्ठा, सादगी और भक्ति में दृढ़ता ने उन्हें भगवान् श्री राम के दर्शन का अद्वितीय आनंद प्राप्त कराया। शबरी ने अपने जीवन के प्रत्येक पल में भगवान् की सेवा की, उनके आगमन का इंतज़ार किया, और उनको पूरी श्रद्धा और प्रेम से स्वागत किया
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अभागिन अमीना अपनी कोठरी में बैठी रो रही है |आज ईद का दिन, उसके घर में दाना नहीं ! आज आबिद होता,तो क्या इस तरह की ईद आती और चली जाती ! इस अंधकार और निराशा में वह डूबी जा रही है ! किसने बुलाया था इस निगोड़ी ईद को ? इस घर में उसका काम नहीं ,लेकिन हामिद ! उसे किसी के मरने जीने के क्या मतलब? उसके अंदर प्रकाश है, | बाहर आशा विपत्ति अपना सारा दलबल लेकर आए , हामिद की आनंद- भरी चितवन उसका विध्वंस कर देगी | हामिद के अब्बा और अम्मी का देहावसान हो चुका है |चार -पांच साल का छोटा हामिद, अपनी गरीब बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता है | ईद के अवसर पर वह अपने दोस्तों के साथ ईदगाह जाता है |उसके पास मात्र 3 पैसे होते हैं, लेकिन अपने विवेक और अपनी सूझबूझ से वह उन पैसों को खर्च करता है |कहानी में हामिद के बालपन में ही उसकी विवेकशीलता को बेहतरीन रूप से वर्णित किया गया है |प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह ‘…में , नयनी दीक्षित की बेहतरीन संवेदनशील आवाज में ….
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