10 नवंबर 1908 को कनाई लाल दत्त को मात्र 20 बरस की आयु में फांसी हुई। खुदीराम बोस के बाद फांसी के फंदे पर झूलने वाले वह दूसरे क्रांतिकारी थी।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महज़ 21 वर्ष की आयु में वीर योद्धा सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल नेअपनी मातृभूमि के लिए शहीद हो गए ।दुश्मन के 10 टैंक्स में 5 टैंक्स अकेले उन्होंने नष्ट किया ।उन्हें ‘बसंतर के युद्ध’ का युद्धा के नाम से भी जाना जाता है। भारत सरकार ने सर्वोच्च सैन्य अलंकरण परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
महेंद्र लाल सरकार भारत के चिकित्सक, समाज सुधारक और वैज्ञानिक के रूप में प्रसिद्ध हुए ।इनके द्वारा ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस’ की स्थापना की गई।
सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश फातिमा बीबी नियुक्त हुई ।जिनका पूरा नाम मीरा साहब फातिमा बीवी है। सेवानिवृत होने होने के बाद वह राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सदस्य भी रही। वह तमिलनाडु की राज्यपाल भी रह चुकी है।
चितरंजन दास का जन्म 05 नवम्बर 1870 ई. को ढाका के विक्रमपुर में हुआ था। वे कोलकाता उच्च न्यायालय के प्रसिद्ध वकील थे, जो 1909 ई. में अलीपुर बम कांड में अरविंदो घोष का बचाव कर चर्चित हो गए ।
मैना कुमारी: 13 बरस की शहादत | Gaatha
इतिहास केवल युद्धों और सेनानायकों से नहीं बनता, कभी-कभी वह एक 13 साल की बच्ची के साहस से भी रचा जाता है।
मैना कुमारी की यह गाथा उस नन्ही वीरांगना की कहानी है, जिसने कम उम्र में ही देश के लिए
भय, यातना और मृत्यु का सामना किया— लेकिन अपने साहस और स्वाभिमान से पीछे नहीं हटी।
यह कहानी हमें ले जाती है भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर में, जहाँ बलिदान उम्र नहीं देखता था, और देशभक्ति बचपन से बड़ी हो जाती थी।
“मैना कुमारी: 13 बरस की शहादत” सिर्फ़ एक ऐतिहासिक प्रसंग नहीं है— यह याद दिलाती है कि आज की आज़ादी के पीछे कितने मासूम सपनों की क़ुर्बानी छुपी है।
🎧 सुनिए एक ऐसी गाथा जो आँखें नम करती है, और दिल में देश के लिए गहरा सम्मान भर देती है।
दुःशासन द्रौपदी के बाल खींचकर भरी सभा में ले आता है और उसे अपमानित करना चाहता है। तब द्रौपदी बड़े साहस एवं निर्भीकता के साथ दुःशासन को निर्लज्ज और पापी कहकर पुकारती है।द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी जी ने इस खंडकाव्य को जितने प्रभावी ढंग से वर्णन किया है ,उतने ही प्रभावी ढंग से नयनी दीक्षित ने आवाज दी है
दुःशासन नारी को वासना एवं भोग की वस्तु कहता है।वह नारी के प्रति रूढ़िवादी दृष्टिकोण रखता है |वह नारी को भोग्या और पुरुष की दासी मानता है। वह नारी कीदुर्बलता का उपहास उड़ाता है|
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सत्येंद्र नाथ बोस एक महान क्रांतिकारी थे। ये अरविंद घोष के प्रभाव से क्रांतिकारियों के संपर्क में आए। स्वदेशी का प्रचार करने के उद्देश्य से “छात्र भंडार” नामक संस्था बनाई जिसमें युवकों को क्रांतिकारी दल से जोड़ने का कार्य किया। 21 नवंबर 1908 को सत्येंद्र नाथ देश के लिए शहीद हुए।
Reviews for: Kanailal Dutta – 10 Nov