गणेश वासुदेव मावलंकर भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं भारतीय लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्हें ‘दादासाहेब’ के नाम से भी जाना जाता था। वे अहमदाबाद लोकसभा क्षेत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रुप में लोकसभा में निर्वाचित हुये थे। उन्होने भारतीय संसदीय संस्थान में एक उत्कृष्ट वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
पांडुरंग शास्त्री एक दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता, समाज सुधारक के रूप में जाने वाले एक जाना- माना नाम है। उनके द्वारा स्वाध्याय आंदोलन और स्वाध्याय परिवार की स्थापना की गई ।श्री भगवतगीता पर आधारित आत्मज्ञान आंदोलन उनमें से एक है। उनके जन्म दिवस को ‘मनुष्य गौरव दिन’ के रूप में मनाया जाता है 1999 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
दुनिया को रोशनी दिखाने वाले थॉमस एल्वा एडिसन ने आज ही के दिन, 18 अक्टूबर 1931 को अपनी आखिरी सांस ली थी. एक अमेरिकी वैज्ञानिक और बिजनेसमैन थे. उन्होंने बिजली के उपकरण, संचार, साउंस रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी जैसे क्षेत्रों में कई डिवाइस इजाद किए
मैना कुमारी: 13 बरस की शहादत | Gaatha
इतिहास केवल युद्धों और सेनानायकों से नहीं बनता, कभी-कभी वह एक 13 साल की बच्ची के साहस से भी रचा जाता है।
मैना कुमारी की यह गाथा उस नन्ही वीरांगना की कहानी है, जिसने कम उम्र में ही देश के लिए
भय, यातना और मृत्यु का सामना किया— लेकिन अपने साहस और स्वाभिमान से पीछे नहीं हटी।
यह कहानी हमें ले जाती है भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर में, जहाँ बलिदान उम्र नहीं देखता था, और देशभक्ति बचपन से बड़ी हो जाती थी।
“मैना कुमारी: 13 बरस की शहादत” सिर्फ़ एक ऐतिहासिक प्रसंग नहीं है— यह याद दिलाती है कि आज की आज़ादी के पीछे कितने मासूम सपनों की क़ुर्बानी छुपी है।
🎧 सुनिए एक ऐसी गाथा जो आँखें नम करती है, और दिल में देश के लिए गहरा सम्मान भर देती है।
यह विचार 2 अगस्त 2000 में साकार हुआ, जब संसद में झारखंड को अलग राज्य का दर्जा देने का बिल पास हुआ और 2000 में ही 15 नवंबर को झारखंड भारत का 28वां राज्य बनाया गया|
अमेरिका ने ऑपरेशन इंड्योरिंग फ्रीडम के तहत 7 अक्टूबर को अफगानिस्तान में हवाई हमला शुरू किया. नवंबर-दिसंबर में 1300 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान पहुंचे
Credit: Josh Talk
https://www.youtube.com/watch?v=x9iDutjaaHs&t=5s
Dr. Rajvanshi talks about his visit to Australia in 2018 with his wife Dr.Nandini Nimbkar to attend the international conference on Leucaena.
स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र गढ़वाली अपने सांप्रदायिक सौहार्द के लिए मशहूर रहे। जब अंग्रेजों ने निहत्ते पठानों पर गोली चलाने का आदेश दिया तो वीर चंद्र गढ़वाली ने गोली चलाने से मना किया तो इन्हें फांसी की सज़ा ब्रिटिश हुकूमत ने सुना दी। ‘पेशावर कांड के नायक’ के रूप में प्रसिद्ध वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की स्मृति में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना की शुरुआत की गई।
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