डरी हुयी औरत – रवींद्र कालिया – पूजा श्रीवास्तव
यूं तो तुलना और गौतम एक खुशहाल शादीशुदा ज़िन्दगी व्यतीत कर रहे हैं ।इन दोनों यानि कि तुलना और गौतम का एक बेहद करीब मित्र है खुशवंत। तुलना कहीं ना कहीं खुशवंत के व्यक्तित्व से प्रभावित है।क्या यही वजह है कि तुलना के मन में एक अजीब सा भय है कि कहीं उसकी खुशवंत के प्रति जो भावना है वह उसकी शादी- शुदा ज़िन्दगी को प्रभावित ना कर दे?क्या गौतम को भी इस बात का अंदाजा है? पूरी कहानी जानने के लिए सुने रवीन्द्र कालिया के द्वारा लिखी गई कहानी डरी हुई औरत,पूजा श्रीवास्तव की आवाज़ में…
पत्नियो पर तो आप सबने बहुत चुटकुले और व्यंग सुने होंग़े। सुनिए पतियों पर लिखा गया ये कुछ मीठा और कुछ तीखा व्यँग सूर्यबाला जी की कहानी “गर्व से कहो हम पती हैं”
वो पड़ोसी के घर से घर जैसे सम्बंध होना, वो बचपन से लेकर बड़े होने तक छतों पर जमने वाली महफ़िलों का साथ हिस्सा बनना, वो पसंदो का मिलना, वो साथ वक़्त बिताना .. वो एक दूसरे को हर बात बताना , वो एक दूसरे से हर बात पूछना… क्या ये सारे लक्षण प्यार के नहीं है ? नयना और अनुराग … प्यार ही था .. और भाभी ने तो बात भी बढ़ा दी थी …प्यारी सी कहानी का अलग सा मगर प्यार सा अंत जाने के लिए सुनिए – अंज़ू शर्मा की लिखी कहानी – “छत वाला कमरा और इश्क़ वाला लव “
Celebrating 88th Bithday of melody queen Asha Bhosle With Pooja
Kuch Dilchasap baaten aur Sdabhar Naggmen With Pooja
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