आज इस वैश्विक महामारी में चिकित्सा जगत से जुड़े सभी लोगों की जो भूमिका रही है उसके लिए गाथा उन सभी का हार्दिक अभिनंदन करता है ।धर्म, जाति और अपना निजी स्वार्थ को त्याग कर मानवता की सेवा करना ही जिनका एक मात्र उद्देश्य है।कमल मुस्सद्दी की यह कविता उन सभी को समर्पित है ।
हमारे जांबाज सैनिक सीमा पर डट कर ,दिन -रात मेहनत कर दुश्मनों से हमारी रक्षा करते हैं ,|उन्हीं के लिए कमल मुसद्दी की रचना तुम अकेले नहीं हो”, जिसमें उन्हें आश्वासन दिया गया है कि आप हमें हमारे साथ हैं, तो हर हालात में हम भी आपके साथ हैं|सुनते हैं इस खूबसूरत रचना को कमल मुसद्दी की आवाज में..
वजूद कहानी उन सभी महिलाओं को समर्पित कहानी है,जो अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ अपने परिवार के प्रति अपने कर्तव्य और समर्पण करने के बावजूद हमेशा उपेक्षित रहती हैं।उन्हें अपने प्रति भी उतना ही ध्यान रखना होगा। अपना एक वजूद बनाना ही होगा…….. इस ओर ध्यान केंद्रित करती हुई है कहानी “वजूद”…
आधुनिक परिवेश में पाल रहे अपने बच्चों की हर जिद, हर जरूरत को किसी भी तरह पूरा करते-करते एक मध्यवर्गीय परिवार किस प्रकार अपने बच्चों से ही पिछड़ जाता है । यह सोचने को मजबूर करती हुई बेहद भावुक कहानी है गति…….
हमारे जांबाज सैनिक सीमा पर डट कर ,दिन -रात मेहनत कर दुश्मनों से हमारी रक्षा करते हैं ,|उन्हीं के लिए कमल मुसद्दी की रचना तुम अकेले नहीं हो”, जिसमें उन्हें आश्वासन दिया गया है कि आप हमें हमारे साथ हैं, तो हर हालात में हम भी आपके साथ हैं|सुनते हैं इस खूबसूरत रचना को कमल मुसद्दी की आवाज में..
राहुल के लिए उसकी मां की ममता उसे अपने जीवन में हस्तक्षेप करने के समान लगती है |वह कई बार उनकी उपेक्षा भी कर देता है| किस प्रकार राहुल को एहसास होता है कि वह जिसको मां का हस्तक्षेप समझ रहा है ,वह उनकी ममता है| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं कमल मुसद्दी द्वारा लिखी गई कहानी हस्ताक्षेप
एक बार कृष्णदेव राय के चार प्रिय बेशकीमती फूलदानों में से एक फूलदान उनके सेवक रमैया के द्वारा टूट जाता है| कृष्णदेवराय उसे इस मामूली से अपराध के लिए फांसी की सजा सुना देते हैं ,अब तेनाली रामा किस प्रकार अपने चातुर्य से रमैया की जान बचाता है?? साथ ही कृष्णदेवराय को भी किस प्रकार अपनी गलती का एहसास होता है? इस रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बेशकीमती फूलदान, शिवानी आनंद की आवाज में…
हर बात को जहाँ तक हो, सँवारना चाहिए। । सूर्यकांत त्रिपाठी जी की लिखी कहानी गधा और मेंढक सुनते हैं निधि मिश्रा की आवाज में
बाधाएं और समस्याएं हर कदम पर हमारी प्रगति को रोकने की कोशिश करती है , किंतु हमें हार ना मानकर निरंतर प्रयास करते हुए अपना कर्म करना है | यह संदेश देते हुए यह कविता की पंक्तियां……
Reviews for: Dharti ke Bhagwan (धरती के भगवान)