मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है यह कहानी इस बात का एहसास दिला जाती है जिसे जिंदगी में हम बंधन समझते हैं दर असल में वही हमारे जीने की मुख्य वजह होती है दिनकर वाडेकर के द्वारा लिखी गई कहानी अकेलेपन का एहसास अमित तिवारी जी की आवाज में
नारी हृदय को समझना अपने आप में एक पहेली है इसी स्थिति को उजागर करती हुई है कहानी जिसमें रामदयाल एक फिल्म अभिनेता है जिसकी विवाह उर्मिला नाम की स्त्री से हुआ है रामदयाल द्वारा एक लेख पढ़ा जाता है जो नारी स्वभाव से संबंधित होता है लेख को अपने जीवन में यथार्थ करने के उद्देश्य से रामदयाल किस प्रकार की भूल कर बैठता है जानते हैं उपेंद्रनाथ अश्क द्वारा लिखी गई बेहद रोचक और हृदयस्पर्शी कहानी पहेली अमित तिवारी जी की आवाज में
कहानी में एक औरत अपने जीवन के खालीपन को भरने के लिए क्या रास्ता अपनाती है ?विवेक श्रीवास्तव की कहानी चैट में जानते हैं ,अमित तिवारी की आवाज में
कहानी में एक पंडित -पंडिताइन एक मुस्लिम बस्ती में किराए के घर के लिए आते हैं |जब मुसलमान मकान मालिक उनसे हिंदू होने पर भी मुस्लिम घर में रहने की बात को पूछता है तो पंडित जी अपनी पोती के संदर्भ में कहते हैं कि उसका कॉलेज इस बस्ती से पास है और उसे दमा है| किंतु क्या है पूरी सच्चाई ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जुनैद की लिखी कहानी भगवा फरिश्ते ,अमित तिवारी की आवाज में
नेक दिल की औरत सुनोबिया ने अपने ससुर की पुरानी हवेली की दिलो जान से देखभाल कीऔर उसका रखरखाव किया | इसी हवेली के एक पुराने कमरे में उसे महसूस हुआ कि वहां पर कोई जिंn बाबा रहते हैं जो उससे बेहद खुश है , किंतु उसके पति रमजान को यह बात रास नहीं आई | किंतु कहानी के अंत में ऐसा घटित हुआ जिससे उसका पति रमजान भी यह मानने को मजबूर हो गया |
सुशील यादव जी द्वारा लिखी गई कहानी एक सस्पेंडेड थानेदार का इंटरव्यू आज की कानून प्रणाली पर व्यंग है एक थानेदार का इंटरव्यू लिया जाता है जोकि सस्पेंड हो चुका है जानते हैं कहानी में आखिर थानेदार को क्यों सस्पेंड किया गया और थानेदार का सस्पेंड होना जैसे उसके लिए कोई गर्व की बात हो जानते हैं पूरी कहानी एक सस्पेंडेड थानेदार का इंटरव्यू अमित तिवारी जी की आवाज में
गंगू एक ब्राह्मण युवक है |वह अपने मालिक के यहां काम करता है |गंगू जब एक विधवा स्त्री से विवाह करने का निर्णय लेता है तो मैं अपने मालिक के यहां से काम छोड़ देता है |उसका मालिक गंगू के इस निर्णय से अप्रसन्न है |क्या वास्तव में गंगू का यह निर्णय उचित है ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी बालक सुमन वैद्य जी की आवाज में
1947 में हुए देश के बँटवारे ने देश के नक़्शों और सीमाओं के साथ ना जाने कितने परिवारो और लोगों की ज़िन्दगी हमेशा के लिए बदल डाली थी। ताहिरा, अपने परिवार के साथ आज फिर हिंदुस्तान के उस ही शहर में थी जहाँ वो दुल्हन बन कर आयी थी । वो आना नहीं चाहती थी पर शायद आना भी चाहती थी , एक बार और … नववधु सुधा को उसके तरुण पति के गालों पर गुलाल मलते और शरारत से हँसने का सुंदर दृश्य उसे आज भी ज्यों का त्यों याद था .. ताहिरा और सुधा का क्या सम्बंध है ? ताहिरा को सुधा की याद क्यों रुला गयी .. देश के बँटवारे में ये क्या हुआ था? पूजा श्रीवास्तव की आवाज़ में सुनिए शिवानी जी की लिखी कहानी “लाल हवेली “ में क़िस्सा ताहिरा और सुधा का
अभागिन अमीना अपनी कोठरी में बैठी रो रही है |आज ईद का दिन, उसके घर में दाना नहीं ! आज आबिद होता,तो क्या इस तरह की ईद आती और चली जाती ! इस अंधकार और निराशा में वह डूबी जा रही है ! किसने बुलाया था इस निगोड़ी ईद को ? इस घर में उसका काम नहीं ,लेकिन हामिद ! उसे किसी के मरने जीने के क्या मतलब? उसके अंदर प्रकाश है, | बाहर आशा विपत्ति अपना सारा दलबल लेकर आए , हामिद की आनंद- भरी चितवन उसका विध्वंस कर देगी | हामिद के अब्बा और अम्मी का देहावसान हो चुका है |चार -पांच साल का छोटा हामिद, अपनी गरीब बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता है | ईद के अवसर पर वह अपने दोस्तों के साथ ईदगाह जाता है |उसके पास मात्र 3 पैसे होते हैं, लेकिन अपने विवेक और अपनी सूझबूझ से वह उन पैसों को खर्च करता है |कहानी में हामिद के बालपन में ही उसकी विवेकशीलता को बेहतरीन रूप से वर्णित किया गया है |प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह ‘…में , नयनी दीक्षित की बेहतरीन संवेदनशील आवाज में ….
त्रास – रवींद्र कालिया – विनीता श्रीवास्तव
एक लड़का जो काफी समय से अपने मां-बाप ,परिवार से दूर अलग रह रहा है ।अब अलग और अकेले रहने पर उसकी ज़िन्दगी कुछ उदासीन हो गई है लेकिन जब उसके मां-बाप उससे मिलने आते हैं और उसके जीवन का विश्लेषण करते हैं तो बहुत सी बातें निकल कर आती है ।कहानी में मां अपने बेटे की इस स्थिति से अवगत हो रही है किंतु अपने को उसके सामने सामान्य दिखाने की कोशिश में लगी है ।कहानी में मां और बेटे के कई प्रसंग आपको इमोशनल कर देते हैं ।सुनिए रवींद्र कालिया की लिखी कहानी त्रास, विनीता श्रीवास्तव की आवाज़ में
देश और काल का फैलाव वहीं सबसे अधिक होता है जहाँ उनका महत्त्व सबसे कम होता है -जब-जब जीवन में तनाव आता है और सारी प्राणशक्ति एक केन्द्र या बिन्दु में संचित होने लगती है, तब-तब देश-काल भी उसी अनुपात में सिमट आते हैं… देवकान्त नाव खे रहा है, उसके सामने, आगे-पीछे कहीं, उस क्षण के सिवा कुछ नहीं है जिसमें वह है और नाव खे रहा और मोहन की बड़ी-बड़ी काली आँखों की ओर जा रहा है – मोहन जो एक हिरन का छौना है जिसे नीलिमा ने उसे दिया था – किन्तु फिर भी उस क्षण में ही कई देश-काल संचित हो आये हैं – वह एक साथ ही कई स्थानों, कई कालों में जी रहा है, कई घटनाओं का घटक है…
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