महा महाभारत युद्ध में जब युधिष्ठिर चारों तरफ से कौरवों की सेना से घिर चुके थे| भीमसेन के पराक्रम ने युधिष्ठिर को किस प्रकार बचाया और उनका पराक्रम कौरवों पर किस प्रकार भारी पड़ा ?पूरा विवरण जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में महाभारत की कहानियों में से एक कहानी भीम का पराक्रम …
पितामह भीष्म के आहत होने पर आचार्य द्रोण को सेनापति बनाया गया। सेनापति बनने के बाद द्रोण ने प्रतिज्ञा की कि मैं भीष्म की तरह ही कौरव-सेना की रक्षा तथा पांडव-सेना का संहार करूँगा। मुझे केवल धृष्टद्युम्न की चिंता है, क्योंकि उसकी उत्पत्ति ही मेरी मृत्यु के लिए हुई है। इस पूरे प्रसंग में कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य को जब कौरवों का सेनापति बनाया जाता है तो महाभारत का युद्ध किस मोड़ तक जा पहुंचता है| इस दरमियान कौन-कौन सी घटनाएं घटित होती है ?और कौन-कौन वीरगति को प्राप्त होता है ?इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी द्रोण पर्व,शिवानी आनंद की आवाज में…
यह कहानी कृषक वर्ग की चुनौतियों को हमारे सामने रखती है जिसके चलते उन्हें कई बार अपनी जान तक देनी पड़ती है।
हिरण्यधनु नामक निषाद का पुत्र एकलव्य भी धनुर्विद्या सीखने के उद्देश्य से द्रोणाचार्य के आश्रम में आया, किन्तु कर्ण के समान ही निम्न वर्ण का होने के कारण द्रोणाचार्य ने उसे अपना शिष्य बनाना स्वीकार नहीं किया। निराश होकर एकलव्य वन में चला गया। उसने द्रोणाचार्य को उनकी मूर्ति के समक्ष अपना गुरु मानकर उनके समक्ष धनुर्विद्या का ज्ञान करने लगा| इस पर द्रोणाचार्य ने एकलव्य से गुरुदक्षिणा के रूप में उसके दाहिने हाथ के अँगूठे की माँग की| आखिर द्रोणाचार्य जी ने गुरु दक्षिणा के रूप में एकलव्य से उसके हाथ का अंगूठा क्यों मांगा ? क्या हुआ उसके बाद एकलव्य के साथ और क्यों इतिहास में एकलव्य का नाम प्रसिद्ध है? इस पूरे प्रसंग को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानी में से एक कहानी एकलव्य की गुरुभक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में…
महाभारत का युद्ध समाप्त होने के पश्चात अश्वत्थामा, कृपाचार्य वन में भटक रहे थे |अचानक अश्वत्थामा की नज़र एक वटवृक्ष पर पड़ी ,जहां एक उल्लू के द्वारा कौऔं के दल पर कपट करके आक्रमण किया जा रहा था यह देख अश्वत्थामा के मन में कपट पूर्ण युक्ति पांडवों को मारने के लिए आई। आखिर क्या थी वह युक्ति ?उसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी,अश्वत्थामा का कपटशिवानी आनंद की आवाज में…
हस्तिनापुर के महाराज शांतनु ने गंगा से विवाह किया |गंगा का आठवां पुत्र देवव्रत (भीष्म )के रूप में जाने गए| आगे चलकर देवव्रत भीष्म ने क्या अखंड प्रतिज्ञा ली? जो भीष्म प्रतिज्ञा’’ के रूप में सदैव प्रख्यात रही है| इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी भीष्म जन्म तथा अखंड प्रतिज्ञा, शिवानी आनंद की आवाज में…
अज्ञातवास का अर्थ है बिना किसी के संज्ञान में आये किसी अपरिचित स्थान व अज्ञात स्थान में रहना। वनवास के बारहवें वर्ष के पूर्ण होने पर पाण्डवों ने अब अपने अज्ञातवास के लिये मत्स्य देश के राजा विराट के यहाँ रहने की योजना बनाई| अज्ञातवास के समय पाण्डवों ने अपनी पहचान छुपाने के लिए अलग-अलग उन्होंने अपना वेश बदला |पांचो पांडु पुत्र पुत्र युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल ,सहदेव ने किन-किन का वेश धारण किया और उन्होंने क्या भूमिका निभाई ?इसे जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में महाभारत की कहानियों में से एक कहानी पांडवों का अज्ञातवास…
राजा विराट के साले कीचक के वध हो जाने पर राजा सुशर्मा और कौरवों विराट नगर पर आक्रमण करने के उद्देश्य से विराटनगर पर आक्रमण कर दिया किंतु उसी समय चारों पांडव भाई सुशर्मा से युद्ध करने के लिए चले गए थे ऐसे में किस प्रकार राजकुमार उत्तर ने किसकी सहायता से कौरवों से युद्ध किया ?इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी विराटनगर पर कौरवों का आक्रमण, शिवानी आनंद की आवाज में…
अनुशासन पर्व में कुल मिलाकर 168 अध्याय हैं। अनुशासन पर्व के आरम्भ में 166 अध्याय दान-धर्म पर्व के हैं। इस पर्व में भी भीष्म के साथ युधिष्ठिर के संवाद का सातत्य बना हुआ है। भीष्म युधिष्ठिर को नाना प्रकार से तप, धर्म और दान की महिमा बतलाते हैं और अन्त में युधिष्ठिर पितामह की अनुमति पाकर हस्तिनापुर चले जाते हैं। भीष्मस्वर्गारोहण पर्व में केवल 2 अध्याय (167 और 168) हैं। इसमें भीष्म के पास युधिष्ठिर का जाना, युधिष्ठिर की भीष्म से बात, भीष्म का प्राणत्याग, युधिष्ठिर द्वारा उनका अन्तिम संस्कार किए जाने का वर्णन है। इस अवसर पर वहाँ उपस्थित लोगों के सामने गंगा जी प्रकट होती हैं और पुत्र के लिए शोक प्रकट करने पर श्री कृष्ण उन्हें समझाते हैं।महाभारत की कहानियों में से एक कहानीअनुशासन पर्व में ,जिसे सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
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