महाभारत की कहानियों में से एक कहानी ‘द्रौपदी स्वयंवर’, उस समय का प्रसंग है जब द्रुपद नरेश का द्रौपदी स्वयंवर आयोजित किया जाता है| इस स्वयंवर में भाग लेने के लिए एक से बढ़कर एक महारथी आए किंतु स्वयंवर में रखी गई शर्त को कोई भी पूर्ण ना कर सका| ऐसे में किस प्रकार द्रौपदी का स्वयंवर हुआ ?इस स्वयंवर में कौन सी घटना घटित हुई? इस पूरे प्रसंग को सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
राजा विक्रमादित्य के दरबार में लोग अपनी समस्याएँ लेकर न्याय के लिए तो आते ही थे कभी-कभी उन प्रश्नों को लेकर भी उपस्थित होते थे जिनका कोई समाधान उन्हें नहीं सूझता था। विक्रम उन प्रश्नों का ऐसा सटीक हल निकालते थे कि प्रश्नकर्त्ता पूर्ण सन्तुष्ट हो जाता थाएक दिन दो तपस्वी दरबार में आए और उन्होंने विक्रम को अपने प्रश्न का उत्तर देने की विनती की। उनमें से एक का मानना था कि मनुष्य का मन ही उसके सारे क्रिया-कलाप पर नियंत्रण रखता है और मनुष्य कभी भी अपने मन के विरुद्ध कुछ भी नहीं कर सकता है। दूसरा उसके मत से सहमत नहीं था। उसका कहना था कि मनुष्य का ज्ञान उसके सारे क्रिया-कलाप नियंत्रित करता हैइस प्रश्न का उत्तर विक्रमादित्य किस प्रकार देते हैं इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी उन्नीसवी पुतली रूपरेखा राजा विक्रमादित्य,शिवानी आनंद की आवाज में…
सुभाषिनी नाम की ऐसी लड़की की कहानी जो बोल नहीं सकती, इसलिए उसकी मित्रता भी मूक प्राणियों से अधिक है जिसे बोलने वाले समाज से हमेशा निरादर ही प्राप्त हुआ।
आज प्रतिमा ने अपने पति आशुतोष को उसकी एक सहेली अंजलि के साथ उस दृश्य में देख लिया जिससे उसके पैरों के तले मानों ज़मीन ही सरक गई हो। प्रतिमा कैसे अपने पति और अपनी सहेली अंजलि के द्वारा दिया गया यह विश्वासघात सहन पकड़ पाएगी ?प्रतिमा अब इसके आगे क्या फैसला लेती है ?जानिए अलका सैनी की लिखी कहानी विश्वासघात में, शिवानी आनंद की आवाज़ में.।
एक बार महाराज ,राजपुरोहित और तेनालीराम सर्दी के मौसम में अपने राजमहल में टहल रहे थे | महाराज ने सर्दियों की मौसम की सबसे अच्छी मिठाई खाने की इच्छा जाहिर की| ऐसे में तेनाली रामा ने किस मिठाई को सर्दियों की सबसे अच्छी और मनपसंद मिठाई कहा? इस रोचक किस्से को जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी तेनालीराम की मनपसंद मिठाई…
पांडु पुत्र अर्जुन ने जयद्रथ का वध करने की प्रतिज्ञा ली, किंतु गुरु द्रोणाचार्य ने ऐसे व्यूह की रचना की, कि उस दिन का युद्धयुद्ध खत्म होने की सीमा तक जयद्रथ अर्जुन के सामने नहीं आया| ऐसे में किस प्रकार अर्जुन की प्रतिज्ञा पूर्ण हो पाई एवं भीम पुत्र घटोत्कच एवं गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु किस प्रकार हुई ?महाभारत की इन रोचक प्रसंगों को सुनते हैं ,शिवानी आनंद की आवाज में…
समय द्वारा अपने मनोरंजन के लिए वायु. जल, अग्नि और कई प्रकार के जीवों के उपरांत मनुष्य के बनाए जाने की कथा।
वह खूबसूरत बचपन, जब गर्मियों की छुट्टियां नानी के यहां बिता करती थी ,वह मीठे -गुदगुदाने वाले पलो का खूबसूरत एहसास , अंगोना साहा के साथ…
महाभारत का युद्ध समाप्त होने के पश्चात अश्वत्थामा, कृपाचार्य वन में भटक रहे थे |अचानक अश्वत्थामा की नज़र एक वटवृक्ष पर पड़ी ,जहां एक उल्लू के द्वारा कौऔं के दल पर कपट करके आक्रमण किया जा रहा था यह देख अश्वत्थामा के मन में कपट पूर्ण युक्ति पांडवों को मारने के लिए आई। आखिर क्या थी वह युक्ति ?उसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी,अश्वत्थामा का कपटशिवानी आनंद की आवाज में…
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