दिन भर कवि शहर की तमाम गलियों में इधर से उधर चक्कर लगाता रहा; किंतु किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। उसने कभी किसी की खुशामद नहीं की थी और न किसी भद्रलोक का स्वागत गान ही बनाया था। न तो उसने किसी राजा की प्रशंसा में कोई कविता की थी और न किसी बाबू साहब के विवाहोत्सव में कोई छंद पढ़ा था। फिर उसे पूछता ही कौन?
महंगू एक मिल का गरीब मजदूर है | कहानी के एक प्रसंग के बाद वह अमीर बनने का सपना देखने लगता है और इसी दिशा में काम भी शुरू कर देता है, किंतु उसके कुछ गलत निर्णय के कारण वह सपना उसे बहुत महंगा पड़ता है | पूरी कहानी जाने के लिए सुनते कहानी ‘फूल बागान का सपना ‘….
पूस की अँधेरी रात में आकाश पर तारे भी ठिठुरते हुए मालूम हो रहे हैं । ऐसी ठंडी रात में हल्कू अपने खेत के किनारे ऊख के पतों की एक छतरी के नीचे बॉस के खटाले पर अपनी पुरानी गाढ़े की चादर ओढ़े पड़ा है |कड़कड़ाती ठंडी रात में हल्कू और उसका वफादार कुत्ता जबरा किस प्रकार ठंड से बचने के लिए जद्दोजहद करते रहे और उनके खेतों का क्या हुआ ? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी पूस की रात ,अमित तिवारी की आवाज में …
आउटसोर्सिंग का मतलब है कि अगर अपना काम खुद से ढंग से ना हो पा रहा हो तो किसी दूसरे से करवा लीजिए| यह सिस्टम पृथ्वी लोक में तो पॉपुलर है, लेकिन अब तो देव लोक तक पॉपुलर हो चुका है |कैसे? इसे जानने के लिए कमलेश पांडे के व्यंग आउटसोर्सिंग में सुनेंगे अमित तिवारी की आवाज में
आप खुद सोचिये कि अगर सरकार के विचार में हिन्दी कहीं पर रुकी पड़ी है तो उसे आगे बढ़ाने की ही बात होगी न। इस देश में किसी को आगे बढ़ाने की बात सरकार ही तो करती है? हिन्दी के मामले में तो सरकार केवल बात ही नहीं कर रही बल्कि अगर ध्यान दें तो सरकार ने इन साठ सालों में हिन्दी को धक्के लगा-लगा कर इंच-इंच आगे बढ़ाने की कोशिश में क्या-क्या नहीं किया।हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है किंतु आधुनिक समय में हिंदी के प्रयोग के लिए भी लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत पड़ रही है इसी बात पर व्यंग करते हुए कमलेश पांडे जी की कहानी प्रोत्साहित होती हिंदी अमित तिवारी जी की आवाज में
अचानक रात को संजीव के पास एक अनजान नंबर से मैसेज आने शुरू होते हैं |मैसेज करने वाली लड़की का दावा है कि वह संजीव से प्यार करती है और 10 साल से उसका इंतजार कर रही है |किंतु संजीव ऐसी किसी भी लड़की को नहीं जानता है कौन है वह अनजान लड़की ?और आगे कहानी में क्या होता है ?जानने के लिए सुनते हैं नज़्म सुभाष की लिखी हुई कहानी किसी नज़र को तेरा,अमित तिवारी की आवाज़ में….
आखिर वृद्धावस्था में क्यों लोग अपने आप को अकेला महसूस करते हैं ?जानते हैं नज़्म सुभाष के द्वारा लिखी गई कहानी” कबाड़ “,पल्लवी की आवाज में
मन और हृदय अलग-अलग संवेदना से क्यों गुजर रहे हैं? अगर मन स्थिर और शांत है फिर क्यों हृदय में संग्राम छिड़ा हुआ है ?बेहद खूबसूरत शब्दों से पिरोया है इस दुविधा को अनुपम ध्यानी जी ने अपनी कविता मन में कोहरा, कोहराम हृदय में अपनी स्वयं की आवाज से
मेला – ममता कालिया – शैफाली कपूर
कहानी में प्रयागराज में लगे कुंभ मेले का दृश्य है जहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में लोग अपने पाप को धोने के लिए संगम में डुबकी लगाने आते हैं। क्या मात्र डुबकी लगाकर पाप से मुक्त हुआ जा सकता है ?क्या वास्तव में अध्यात्म को भी एक पेशे की दृष्टि से अपनाया जाता है? आस्था ,परंपरा इन सब बातों का अद्भुत संगम है इस कहानी में। इसी बात को रोचक ढंग से आधार बनाकर ममता कालिया ने कहानी मेला का ताना-बाना बुना है,जिसे शेफ़ाली कपूर ने उतने ही अनोखे अंदाज़ से अपनी आवाज़ से निखारा है।
सुबल और सुशील नामक पिता और पुत्र की ऐसी कहानी जिसमे इच्छा पूरी करने वाली देवी उन्हें अदला बदली का वरदान देकर उनकी इच्छा पूरी करती हैं लेकिन इस वरदान से तंग आकर वे पुनः देवी से उन्हें पहले जैसा कर देने की प्रार्थना करते हैं।
वे तीन दिन – आर्या झा – शेफ़ाली कपूर
आदित्य एक सरकारी कर्मचारी है ।16 साल पुराना प्यार जब उसके सामने आ रहा है तो आदित्य के जीवन में मानो फिर से एक नया रंग भर रहा है। अपनी पुरानी प्रेमिका और पत्नी के बीच आदित्य के जीवन में यह आने वाले 3 दिन एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आ रहे हैं ।क्या आदित्य अपने पुराने प्रेम के खातिर अपनी पत्नी को त्याग देगा या फिर आदित्य को अपनी पत्नी की कदर पहले से अधिक महसूस होने लगेगी? आर्या झा के द्वारा लिखी गई कहानी वे तीन दिन में जानिए, शेफ़ाली कपूर की आवाज़ में…
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