भगत सिंह, राज गुरु और सुखदेव की अंतिम रात की कहानी
पर्दा किस भावना का अविलंब हो सकता है इस मार्मिक कहानी के माध्यम से महसूस किया जा सकता है। कहानी चौधरी पीर ब़ख्श की की है जो अपनी कम आमदनी में अपने बड़े परिवार का भरण -पोषण कर रहा है ।चौधरी पीर ब़ख्श कर्ज़ में डूबा हुआ है। अपनी इज्जत को किसी तरह पर्दे की आड़ में छुपायें हुए हैं। सुनते हैं क्या होता है जब उसके घर का पर्दा हट जाता है ।ऐसे में चौधरी पीर ब़ख्श की क्या मनोस्थिति होगी ? इसे जानने के लिए सुनते हैं यशपाल के द्वारा लिखी गई कहानी पर्दा, जिसे आवाज़ दी है नयनी दीक्षित ने..
सत्य की जीत के इस प्रसंग में द्रौपदी द्युत सभा में कौरवों के छल कपट से खेले जाने वाले द्युत क्रीड़ा का पुरज़ोर विरोध कर रही है समस्त धर्माचार्य भीष्म पितामह द्रोणाचार्य विदुर सहित सभी द्रोपदी का साथ देते हुए कौरवों के छल कपट का विरोध कर रहे हैं । द्वारिका प्रसाद महेश्वरी के द्वारा लिखी गई महाभारत में द्युत सभा का वर्णन नयनी दीक्षित की आवाज़ में
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