शायर अपने वतन से शिकायत और अफसोस कर रहा है |ए- वतन तुझे कितनों के बलिदान चाहिए,ताकि तेरे बेरंग गाल अनार के फूल की तरह खिल सके| कितनों की आहे तेरे कलेजे को ठंडक पहुंचा सके! कितनों के आंसू तेरे रेगिस्तान को हरा -भरा कर सके! फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ द्वारा लिखी गई नज़्म “तुझको कितनों के लहू चाहिए “,को सुनते हैं आमिर की आवाज में…
संवेदनशील जॉन एलिया का जन्म 14 दिसंबर 1931 में अमरोहा में हुआ |उनकी शायरी का मुख्य अंदाज ऐसा है कि मानो वे किसी से गुफ़्तगू कर रहे हों |जॉन एलिया की शायरी में अलमस्त जीवन शैली और हालात से समझौता ना करना ,साफ झलकता है | उनके जीवन के कुछ रोचक बातें जानेंगे आमिर के शायराना अंदाज में….
शायर बता रहा है किसी तरह उसकी शाम बस गुजर ही गई |तकलीफ हुई, परेशानी भी हुई लेकिन जुदाई का गम हमसे पूछ कर फिर क्यों याद दिला रहे हो | शायर ने अपने महबूब को याद कर लिया है जिससे उसकी तकलीफ खत्म तो नहीं हुई बस कुछ हद तक कम जरूर हुई है | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ द्वारा लिखी गई नज़्म “शाम ए फिराक “,को सुनते हैं आमिर की आवाज में…
गुलशन में बहार तभी आएगी जब महबूब आएगा ,यह खामोश गमगीन माहौल तभी खुशनुमा और रंगीन होगा जब महबूब का जिक्र होगा | शायर ने अपनी महबूबा की दिलकशी को अपने लफ्जों किस प्रकारसे सजाया है ?आमिर की खूबसूरत आवाज नहीं सुनते हैं अहमद फ़ैज़ की नज़्म “गुलों में रंग भरे”..
महोब्बत में जुदाई ,जिसमें आशिक और उसकी माशूका दोनों का दिन का चैन और रातों की नींदे गायब हो जाती है।दर्द ही उनकी किस्मत बन जाती है।हालत-ए-हाल के सबब ग़ज़ल में जान सकेगें .आमिर की आवाज़ में..
शायर ने उस इश्क का जिक्र किया है जो किसी भी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी टूटता नहीं है और हमेशा वैसे का वैसा ही बना रहता है |इश्क (प्रेम )हार- जीत से बहुत ऊपर होता है, शायर का मानना है कि इसमें सिर्फ जीता जा सकता है, हारने का तो सवाल ही नहीं होता…
शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म में शायर अपने महबूब की खूबसूरती ,उसकी वफ़ा को मानता तो है लेकिन वह अपने आसपास की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं कर पाता |आइए सुनते हैं आमिर की आवाज में इस खूबसूरत नज़्म मुझसे पहली सी मोहब्बत…
अनवर जलालपुरी की हर एक नगमें ज़मीनी हकीकत को बयां करती है ।भगवत गीता के श्लोकों को अपने उर्दू शायरी का ज़ामा पहनाकर शायर ने उसे एक सरल रूप दे दिया है ।उनकी शायरी में जवान नस्ल को कई तरह की हिदायतें भी दी गई ।उनकी खूबसूरत शायरियों का लुफ्त उठाएं आनंद कक्कड़ की आवाज़ में..
शायर आज अपने रकीब( प्रेम में उसका प्रतिद्वंदी )से कह रहा है कि वह कितना किस्मत वाला है कि उसे वास्तव में उसकी महबूबा का प्यार मिल रहा है, जबकि वह केवल अपनी कल्पनाओं में उसके प्रेम को महसूस कर पाया है| आमिर की खूबसूरत आवाज में सुनते हैं फैज़ अहमद फैज़ की नज़्म रकीब से…
कहानी बृहस्पति देव के बेटे कच की है, जो शंकराचार्य के पास अमर जीवन का रहस्य प्राप्त कर स्वर्ग-लोक को जाने के लिए तैयार हैं |जाने से पहले गुरु पुत्री उसकी तथा देवयानी से भेंट करने के लिए आता है, किंतु देवयानी कच को समझाने का प्रयत्न करती है कि संसार में यह मिथ्या होगा कि केवल शिक्षा का मूल है परंतु प्रेम का कोई मूल्य नहीं है | क्या वह देवयानी के प्रेम का उपहास करता है ? क्या वह नारी हृदय की वेदना को समझ पाता है? क्या वह प्रेम के मूल्य को समझ पाता है ? इसे जानने के लिए सुनते हैं रविंद्र नाथ ठाकुर के द्वारा लिखी गई कहानी प्रेम का मूल्य ,शिवानी आनंद की आवाज में…
शायर बता रहा है किसी तरह उसकी शाम बस गुजर ही गई |तकलीफ हुई, परेशानी भी हुई लेकिन जुदाई का गम हमसे पूछ कर फिर क्यों याद दिला रहे हो | शायर ने अपने महबूब को याद कर लिया है जिससे उसकी तकलीफ खत्म तो नहीं हुई बस कुछ हद तक कम जरूर हुई है | फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ द्वारा लिखी गई नज़्म “शाम ए फिराक “,को सुनते हैं आमिर की आवाज में…
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pragati sharma