पहली पुतली रत्नमंजरी राजा विक्रम के जन्म तथा इस सिंहासन प्राप्ति की कथा बताती है। वह जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पहली पुतली रत्नमंजरी
राजा कृष्णदेव राय के प्रिय सुनहरे पौधे को बकरी के खा जाने पर माली को दिए जाने वाले दंड को किस प्रकार तेनाली रामा राजा को अनुचित निर्णय लेने से रोकते हैं ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी सुनहरा पौधा शिवानी आनंद की आवाज में
महाभारत की कहानियों में से एक कहानी है “अश्वत्थामा और अर्जुन का युद्ध “ | महाभारत के युद्ध में एक ऐसा भी समय आया जब अर्जुन ,अश्वत्थामा के आगे निष्प्रभावशाली दिखाई दिए | इस प्रसंग का पूरा वर्णन सुनते हैं, शिवानी आनंद की आवाज में |
पितामह भीष्म के आहत होने पर आचार्य द्रोण को सेनापति बनाया गया। सेनापति बनने के बाद द्रोण ने प्रतिज्ञा की कि मैं भीष्म की तरह ही कौरव-सेना की रक्षा तथा पांडव-सेना का संहार करूँगा। मुझे केवल धृष्टद्युम्न की चिंता है, क्योंकि उसकी उत्पत्ति ही मेरी मृत्यु के लिए हुई है। इस पूरे प्रसंग में कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य को जब कौरवों का सेनापति बनाया जाता है तो महाभारत का युद्ध किस मोड़ तक जा पहुंचता है| इस दरमियान कौन-कौन सी घटनाएं घटित होती है ?और कौन-कौन वीरगति को प्राप्त होता है ?इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी द्रोण पर्व,शिवानी आनंद की आवाज में…
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर धर्मराज के रूप में विश्व में जाने जाते रहे हैं |कहानी में इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है| जब यक्ष के प्रश्नों का उत्तर युधिष्ठिर के अन्य भाई नहीं दे पाते हैं ,तो उन सबको मृत्यु प्राप्त हो जाती है किंतु युधिष्ठिर यक्ष के प्रश्नों के उत्तर देकर यक्ष को प्रसन्न कर देते हैं और अपना मनचाहा वरदान भी प्राप्त कर लेते हैं |कैसे? इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी यक्ष और युधिष्ठिर संवाद भाग -1 शिवानी आनंद की आवाज में …
एक बार युधिष्ठिर नामक कुम्हार के माथे में में घड़े की नोक से चोट लग जाती है |घाव इतना गहरा होता है कि ठीक होने के बाद भी उसका निशान नहीं जाता है | वहां का राजा कुम्हार के सिर पर चोट का निशान देखकर उसे एक वीर पुरुष समझकर अपने यहां सैनिक के रूप में भर्ती कर लेता है |कहानी में आगे क्या होता है?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी कुम्हार की कहानी, शिवानी आनंद की आवाज में…
एक युवक एक राजकुमारी से प्रेम करता है और विवाह करना चाहता है किंतु राजकुमारी का विवाह उसी से हो सकता है जो खोलते हुए तेल से सकुशल लौट आए| इस बात से हताश युवक की राजा विक्रमादित्य किस प्रकार मदद करते हैं पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-दसवीं पुतली – प्रभावती
राजा विक्रमादित्य अद्भुत गुणग्राही थे। वे सच्चे कलाकारों का बहुत अधिक सम्मान करते थे तथा स्पष्टवादिता पसंद करते थे। उनके दरबार में योग्यता का सम्मान किया जाता था। चापलूसी जैसे दुर्गुण की उनके यहाँ कोई कद्र नहीं थी। यही सुनकर एक दिन एक युवक उनसे मिलने उनके द्वार तक आ पहुँचा। शास्त्रों का ज्ञाता था। कई राज्यों में नौकरी कर चुका था। युवक स्पष्टवक्ता होने के कारण उसके आश्रयदाताओं को वह धृष्ट नज़र आया, अतः हर जगह उसे नौकरी से निकाल दिया गया।विक्रमादित्य ने उस युवक की गुणवत्ता को परखा और उसे उचित सम्मान दिया |कैसे?इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानीबाइसवीं पुतली अनुरोधवती राजा विक्रमादित्य और बुद्धि और संस्कार पर चर्चा ,शिवानी आनंद की आवाज में …
राजा विक्रमादित्य के दरबार में लोग अपनी समस्याएँ लेकर न्याय के लिए तो आते ही थे कभी-कभी उन प्रश्नों को लेकर भी उपस्थित होते थे जिनका कोई समाधान उन्हें नहीं सूझता था। विक्रम उन प्रश्नों का ऐसा सटीक हल निकालते थे कि प्रश्नकर्त्ता पूर्ण सन्तुष्ट हो जाता थाएक दिन दो तपस्वी दरबार में आए और उन्होंने विक्रम को अपने प्रश्न का उत्तर देने की विनती की। उनमें से एक का मानना था कि मनुष्य का मन ही उसके सारे क्रिया-कलाप पर नियंत्रण रखता है और मनुष्य कभी भी अपने मन के विरुद्ध कुछ भी नहीं कर सकता है। दूसरा उसके मत से सहमत नहीं था। उसका कहना था कि मनुष्य का ज्ञान उसके सारे क्रिया-कलाप नियंत्रित करता हैइस प्रश्न का उत्तर विक्रमादित्य किस प्रकार देते हैं इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी उन्नीसवी पुतली रूपरेखा राजा विक्रमादित्य,शिवानी आनंद की आवाज में…
एक बार राजा विक्रमादित्य दरबार में बैठे थे और दरबारियों से बातचीत कर रहे थे। बातचीत के क्रम में दरबारीयों में इस बात पर बहस छिड़ गई कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से। बहस का अन्त नहीं हो रहा था, क्योंकि दरबारियों के दो गुट हो चुके थे। एक कहता था कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है क्योंकि मनुष्य का जन्म उसके पूर्वजन्मों का फल होता है। राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार प्रत्यक्ष उदाहरण देकर इस बहस का अंत किया? यह जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी की कहानी तेइसवीं पुतली धर्मवती मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से ,शिवानी आनंद की आवाज में …
अचानक एक दिन राजा विक्रमादित्य को एक औरत के रोने की आवाज सुनाई दी राजा उसकी मदद हेतु उसी दिशा में चल दिया ,उस औरत की क्या वास्तविकता है और और राजा ने उसी किस प्रकार मदद की? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-सातवीं पुतली कौमुदी शिवानी आनंद की आवाज में..
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