बहुत ज्यादा सुख भी नींद उड़ा देता है ,तो बहुत ज्यादा दुख भी ।कभी मखमल के बिस्तर पर भी नींद नहीं आती ,तो कभी जमीन पर भी चैन की नींद आ जाती है। दिल की गहराई में छुपा कोई जख्म भी कभी सोने नहीं देता और दिल की दबी ख्वाहिश भी नींद चुरा लेती है।
आज हम खुद को बहुत मॉर्डन, कल्चर्ड, इंटेलेक्चुअल समझते हैं। औरत और मर्द को बराबर समझने का दम भरते हैं। लेकिन कुछ जगहों पर, कुछ परिस्थितियों में हमारी सोच आज भी दकियानूसी और पुरानी है। ऐसा क्यों होता है ? क्या हम वास्तव में कभी अपनी सोच बदल पाएँगे ?क्या कभी मर्द और औरत बराबर हो पाएंगँ? ऐसे अनेकों प्रश्न जहन में उठते रहते हैं जिनके उत्तर शायद वक्त के पास है।
भरे पूरे परिवार में जन्मी शम्मन को उसके मामूली रंग रूप की वजह से कोई तवज्जो ना दी जाती। जिंदगी में दिल को चकनाचूर कर देने वाले कई हादसे भी पेश आए। एक स्कॉटिश फौजी से की गई बेमेल शादी भी न चली। वह शम्मन को छोड़कर विदेश चला गया। लेकिन कुछ ऐसा दे गया कि वह उसे भुला ना पाई।
भाभी ब्याह कर आई थी तो मुश्किल से 15 बरस की होगी। आजाद फिजा में पली, हिरिनयों की तरह कुलाचें भरती। चार-पाँच साल के अंदर भाभी को घिस घिसाकर वाकई सब ने ग्रहस्थन बना दिया। दो -तीन बच्चों की माँ बन कर भद्दी और ठुस्स हो गई। भैया को मेकअप ,फैशनेबल कपड़े, कटे बालों से नफरत थी ।भाभी ने भी बनना- सँवरना छोड़ दिया। लेकिन फैशनेबल शबनम को देखकर भैया मंत्रमुग्ध हो गए और भाभी को तलाक देकर उसे अपनी बेगम बना लिया। कुछ ही सालों में शबनम भी वैसे ही फैल गई। भैया एक बार फिर मिस्री रक्कासा पर फिदा हो गए दूसरी नई- नवेली लचकती हुई लहर, उनकी पथरीली बाँहों में समाने के लिए बेचैन और बेकरार थी।
‘साहब मर गया’ जयंत राम ने बाजार से लाए हुए सौदा के साथ यह खबर लाकर दी। वह काना साहब -जैक्सन । वह मजे से सक्खू बाई को झोंटे पकड़कर पीटता था। फ्लोमीना और पीटू को मारता था ।मैंने एक दिन मौका पाकर सक्खू बाई को पकड़ा’ क्यों कमबख्त ! यह पाजी तुम्हें मारता है । तुझे शर्म नहीं आती? रोज कभी मारता है बाई? वह बहस करने लगी। तुझे शर्म नहीं आती सफेद चमड़ी वाले की जूतियाँ सहती है । इन लुटेरों ने हमारे मुल्क को कितना लूटा है? तुम्हें इसका इतना दर्द क्यों होता है? काहे को नहीं होगा दर्द? वह हमारा मर्द है ना ! वह शक्ल से रोबीला और खूबसूरत था। ऊँची पहुँच वाले बाप की बेटी डोर्थी से शादी करने के बाद भी उसका छिछोरापन कम ना हुआ।
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