गोपबंधु दास का जन्म 9 अक्टूबर, 1877 को उड़ीसा के पुरी ज़िले में साक्षी गोपाल के निकट सुआंडो नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम दैतारि दास तथा माता का नाम स्वर्णमायी देवी था। इनका सम्बन्ध एक ग़रीब ब्राह्मण परिवार से था। गोपबंधु दास ने पुरी, कटक तथा कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में शिक्षा ग्रहण की थी
शांति और विकास के लिये विश्व विज्ञान दिवस सर्वप्रथम 10 नवंबर, 2002 को यूनेस्को (UNESCO) के तत्त्वावधान में दुनिया भर में मनाया गया था। शांति और विकास के लिये विश्व विज्ञान दिवस, आम जनता को उनके जीवन में विज्ञान की प्रासंगिकता दर्शाने और इसे वार्ता में शामिल करने का अवसर प्रदान करता है।
हिमालय पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना 4 नवंबर, 1954 में भारत में पर्वतारोहण को क्रीड़ा के रूप में बढ़ावा देने हेतु की गई थी|1953 में तेंज़िंग नाॅरगे और एडमंड हिलेरी द्वारा एवरेस्ट की चोटी पर पहला मानव कदम रखा गया|
बाइबल अनुवादक ‘सेंट जेरोम’ की स्मृति में 30 सितंबर 2018 से अंतरराष्ट्रीय अनुवादक दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रों को एक साथ लाने तथा भाषा विद अनुवाद में योगदान के साथ-साथ विश्व शांति में अहम भूमिका बनाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिन की घोषणा की।
ब्रह्म समाज की स्थापना और सती प्रथा जैसी प्रथा के अलावा भारतीय समाज में व्याप्त ज्वलंत मुद्दों पर जन-जन तक एक नवीन चेतना को जागृत करने में अहम भूमिका निभाने वाले राजा राममोहन राय का निधन 27 सितंबर 1833 को हो गया
गणेश वासुदेव मावलंकर भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं भारतीय लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्हें ‘दादासाहेब’ के नाम से भी जाना जाता था। वे अहमदाबाद लोकसभा क्षेत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रुप में लोकसभा में निर्वाचित हुये थे। उन्होने भारतीय संसदीय संस्थान में एक उत्कृष्ट वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
उद्भव – Stories of Indian Scientists | Gaatha Original
विज्ञान की हर खोज एक प्रश्न से शुरू होती है, और हर वैज्ञानिक की यात्रा एक जिज्ञासा से।
उद्भव भारत के उन वैज्ञानिकों की कहानियों की श्रृंखला है जिन्होंने सीमित संसाधनों, सामाजिक चुनौतियों और अनगिनत असफलताओं के बीच ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के नए रास्ते बनाए।
यह सीरीज़ हमें प्रयोगशालाओं के भीतर ही नहीं, बल्कि उन मानवीय संघर्षों, संकल्प और सपनों के करीब ले जाती है जो हर खोज के पीछे छुपे होते हैं।
यहाँ आप सुनेंगे— किसी का बचपन, किसी की असफल प्रयोगशालाएँ, किसी का समाज से टकराव,
और अंततः उस क्षण की कहानी जब विचार ने खोज का रूप लिया।
उद्भव केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों की गाथा नहीं है—
यह सोचने, सवाल करने और कभी न रुकने की प्रेरणा है।
🎧 सुनिए उन दिमाग़ों की कहानियाँ जिन्होंने भारत के भविष्य की नींव रखी।
उद्भव – Stories of Indian Scientists | Gaatha
उस दिन मैं बिना कुछ सोचे हुए ही भाई निराला जी से पूछ बैठी थी,” आपके किसी ने राखी नहीं बांधी?” ” कौन बहन हम जैसे भुक्कड़ को भाई बनावेगी?” मे, उत्तर देने वाले के एकांकी जीवन की व्यथा थी, या चुनौती ? यह कहना कठिन है ।पर जान पड़ता है किसी अन्य चुनौती के आभास ने ही मुझे उस हाथ के अभिषेक की प्रेरणा दी। उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयास का स्मरण कर मुझे आज भी हंसी आ जाती है। संयोग से उन्हें कहीं से ₹300 मिले। उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बनाने का आदेश दिया। अस्तु : नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराए तक का अनुमान- पत्र मैंने बनाया। उन्हें पसंद आया ।पर दूसरे ही दिन वह सवेरे आ पहुँचे। ₹50 चाहिए किसी विद्यार्थी की परीक्षा शुल्क भरना है वरना—–
विद्यार्थी एक ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने आजादी आंदोलन के दौर में दंगाई भीड़ के बीच भाईचारा कायम करने के लिए उन्होंने जान दे दी. आजादी के इस दीवाने और सांप्रदायिक सौहार्द के पुजारी गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’ का जन्म 26 अक्टूबर, 1890 को इलाहाबाद के अतरसुइया मौहल्ले में हुआ था |
Reviews for: Gopabandhu Das – 9 Oct