मानव है मेरे राम – Episode -54 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए कैसे हनुमान ने किया लंका भ्रमण का वर्णन राम से भाग -4 || मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -31 – Dr. Pradeep Dixit
कैसे प्रमाणित किया राम ने स्वयं को पतियोत्तम | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -39 – Dr. Pradeep Dixit
कैसे किया राम ने बाली का वध | | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode – 3- Dr. Pradeep Dixit
जानिए महर्षि विश्वामित्र द्वारा तड़का वध के लिए राम को पुरस्कार स्वरुप दी गयी ब्रह्म शक्तियों के बारे में, “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l अगली कड़ी में जानिए कहाँ गाया जाता है, राम को जगाने वाला श्लोक I
मानव है मेरे राम – Episode -55 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए कैसे किया हनुमान ने सीता मिलन का वर्णन || मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -50 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए राम – लक्ष्मण ने कैसे प्रशिक्षित किया वानर सेना को रावण की सेना से युद्ध करने के लिए || मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -36 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए कौन है हनुमान | मानव है मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -29 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -66 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए कैसे किया राम ने कुम्भकरण का वध | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -42 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों राम अपने आपको विचारों और तर्कों से घिरा महसूस करते हैं | | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -76 – Dr. Pradeep Dixit
क्यों राम – सीता की सुचिता पर विश्वास कर रहे हैं? मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -23 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -32 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों उठी सीता के मन में स्वर्ण मृग को पाने की चाह | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -10- Dr. Pradeep Dixit
जानिए किस तरह राम ने अपनी नेतृत्व कुशलता से अयोध्या में होने वाले जन विद्रोह को रोका । “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -24 – Dr. Pradeep Dixit
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मानव है मेरे राम – Episode -26 – Dr. Pradeep Dixit
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मानव है मेरे राम – Episode -74 – Dr. Pradeep Dixit
जानिए कौन सी नई परंपरा शुरू की राम ने | मानव हैं मेरे राम की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
मानव है मेरे राम – Episode -26 – Dr. Pradeep Dixit
मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 16
दैवासुर सम्पद्विभाग योग
मनुष्य के भीतर दो प्रकार की प्रवृत्तियाँ होती हैं—दैवी और आसुरी।
भगवान श्रीकृष्ण गीता के इस महत्वपूर्ण अध्याय में इन दोनों स्वभावों का विस्तार से वर्णन करते हैं।
दैवी गुण जैसे निडरता, सत्य, करुणा, क्षमा, विनम्रता और आत्मसंयम मनुष्य को उन्नति, शांति और मोक्ष की ओर ले जाते हैं। वहीं अहंकार, क्रोध, लोभ, छल, हिंसा और असत्य जैसी आसुरी प्रवृत्तियाँ व्यक्ति को दुःख, अशांति और पतन की ओर धकेलती हैं।
यह अध्याय हमें स्वयं के भीतर झाँकने का अवसर देता है और बताता है कि जीवन में वास्तविक सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि हमारे चरित्र और आचरण से निर्धारित होती है।
🎧 सुनिए “श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 16 : दैवासुर सम्पद्विभाग योग” और जानिए कि दैवी गुणों को अपनाकर तथा आसुरी प्रवृत्तियों से बचकर हम अपने जीवन को कैसे अधिक सार्थक, शांत और उद्देश्यपूर्ण बना सकते हैं।
केवल Gaatha पर।
हर श्लोक में जीवन का एक नया दृष्टिकोण। 🙏📖
Shrimad Bhagwat Gita adhyay-18 By Sri Anup Jalota
Credit: International Gita society
Shrimad Bhagwat Gita adhyay-3 By Sri Anup Jalota
Credit: International Gita society
श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 18
मोक्ष-संन्यास योग
महाभारत के युद्धक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया यह अंतिम और सबसे व्यापक उपदेश है। अध्याय 18 में श्रीकृष्ण त्याग, संन्यास, कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में समझाते हैं।
यह अध्याय बताता है कि सच्चा संन्यास कर्मों का त्याग नहीं, बल्कि उनके फल की आसक्ति का त्याग है। मनुष्य अपने स्वभाव और कर्तव्य के अनुसार कर्म करते हुए भी आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। श्रीकृष्ण अर्जुन को जीवन का अंतिम संदेश देते हुए कहते हैं कि जब मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ ईश्वर की शरण में आता है, तब वह सभी बंधनों से मुक्त होकर परम शांति और मोक्ष को प्राप्त करता है।
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज” जैसे अमर उपदेशों से युक्त यह अध्याय गीता का सार माना जाता है, जो जीवन में कर्तव्य, समर्पण और आत्मबोध का मार्ग दिखाता है।
🎧 सुनिए श्रीमद्भगवद्गीता का अठारहवाँ अध्याय – मोक्ष-संन्यास योग, और जानिए जीवन, कर्म और मुक्ति के अंतिम सत्य को — केवल Gaatha पर।
Shrimad Bhagwat Gita adhyay-18 By Sri Anup Jalota
Credit: International Gita society
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