आज हम बच्चों को उनकी गलतियों के लिए डांटते हैं, मारते भी हैं लेकिन याद कीजिए क्या वही सब गलतियां हमसे कभी ना कभी हो चुकी होती है?ऐसा ही कुछ आज निशिकांत के साथ हो रहा है ,जब उसे एहसास हो रहा है कि जिस बात के लिए वह आज अपनी बेटी को डांट रहा है वह गलती कभी उससे हो चुकी है और उससे पहले उसके पापा से तो यह क्रम क्या ऐसे ही चलता रहेगा .इसे जानने के लिए सुनते हैं विष्णुप्रभाकर द्वारा लिखी गई कहानी यह क्रम, नयनी दीक्षित की आवाज में..
धर्म से पीछा छुड़ाकर सिर्फ समाज के हित की बात करने वाला अमज़द से निशिकांत बहुत प्रभावित हुआ| आज वही अमज़द अपने धर्म का दामन पकड़ कर क्यों अपनी जीविका चला रहा है? अमज़द में ऐसा बदलाव किस लिए? क्या ऐसा करना उसकी कोई मजबूरी है या फिर उसकी कथनी और करनी में अंतर ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखी गई कहानी वो रास्ता नयनी दीक्षित की आवाज में
कहानी बेहद भावपूर्ण है एक लेखक निशिकांत अपने दोस्त रमेश के पास जाता है जो एक अनाथालय चला रहा है | बंगाल से आई एक प्यारी सी मासूम अनाथ लड़की मीनू से उसकी मुलाकात होती है |निशिकांत के जीवन में मीनू की क्या भूमिका रहती है और क्या है मीनू का अतीत? विष्णु प्रभाकर की कहानी मुक्ति में जानते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में…
निशिकांत लेखक बनना चाहता है हिंदी के प्रति उसका असीम प्रेम उसे यह करने की प्रेरणा दे रहा है किंतु निशिकांत द्वारा लिखी गई पहली कहानी अपने मित्र को दिखाता है तो मित्र उसकी कहानी को किसी बड़े लेखक की कहानी की नकल बताता है अब ऐसे में निशिकांत का क्या आत्मविश्वास डगमगा जाता है या फिर से कोशिश करता है विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी जानते हैं
सीमित आय वाला निशिकांत जब अपना मासिक बजट बनाता है तो उसकी मनोदशा समझने लायक होती है |अब ऐसी अवस्था में यदि निशिकांत के पास अतिरिक्त खर्चे आ जाते हैं तो फिर वह किस तरीके से अपना बजट बना पाता है| विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी जीवन एक कहानी में जानते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में…
निशिकांत एक सरकारी दफ्तर में कार्यरत है |12 साल की नौकरी में बहुत खुश नहीं है| अपनी योग्यता के हिसाब से ही पद की इच्छा रखता है | वास्तव में उसकी इच्छा अपने देश की स्वतंत्रता में योगदान देने की है| ऐसे में आखिर उसके साथ क्या होता है ?क्या होता है आगे निशिकांत की जीवन में ?जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर की द्वारा लिखी गई कहानी अरुणोदय, नयनी दीक्षित की आवाज में
एक कंजूस व्यक्ति के पास बहुत सारा सोना था लेकिन वह उसका सदुपयोग ना करके उसे जमीन में गाडे रखता था ।एक दिन उसका यह सारा सोना चोरी हो गया। इस बात से कंजूस को क्या सीख मिली और उसने क्या किया जाने के लिए सुनते हैं सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा लिखी गई कहानी कंजूस और सोना निधि मिश्रा जी की आवाज में
दूर से हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होता | ऐसा ही कुछ आकाश को अनुभव हुआ है शहर दिल्ली के बारे | आकाश अपने स्कूल के दिनों से दिल्ली की चकाचौंध से बहुत प्रभावित था | जब आकाश की मुलाकात दिल्ली शहर में अपने बचपन की दोस्त निहारिका से हुई तो उसका यह भ्रम टूट गया |कैसे ?पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं निधि मिश्रा की आवाज में अभिलाष दत्ता के द्वारा लिखी गई कहानी एक मुलाकात
ग्वालियर दुर्ग के किलेदार सरदार को एक बार रामदास का मधुर गान सुनाई देता है| सरदार रामदास को अपने साथ दुर्ग में ले आता है |यहां पर गायन में उसका मुकाबला बेगम साहिबा की एक बाँदी सौसन से होता है| रामदास और सौसन के बीच के मुकाबले का नतीजा क्या निकलता है और किस प्रकार रामदास को तानसेन की उपाधि मिलती है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं जयशंकर प्रसाद के द्वारा लिखी गई कहानी तानसेन ,निधि मिश्रा की आवाज में
कहानी नौकरी पेशा पति -पत्नी नीना और शौनक की है |उनकी इस डेढ़ साल की छोटी सी बच्ची है सुजाता| समस्या यह है कि उस मासूम सुजाता के लिए की देखभाल के लिए उन दोनों के पास वक्त नहीं है, ऐसे में उनके द्वारा किए गए सारे प्रयास विफल भी हो रहे हैं| आखिर अब कैसे नीना और शौनक यह समस्या दूर होती है |और सुजाता को भी भरपूर प्यार कैसे मिलता है| जानने के लिए सुनते हैं सूर्यबाला के द्वारा लिखी गई कहानी माय नेम इश ताता , निधि मिश्रा की आवाज में
पुराने समय से ही यह बात चर्चा का विषय रही है कि सबसे छोटी जीवित चीज आखिर क्या् है? वैज्ञानिकों ने किस प्रकार जीवाणुओं का पता लगाया | विनोद रैना द्वारा लिखी गई पूरी चर्चा कथा जीवाणु खोज की सुनते हैं ,निधि मिश्रा की आवाज में
दुराचारी दुःशासन सभी बड़ों और गुरुजनों के सामने द्रौपदी के साथ अभद्र व्यवहार करता है और द्रौपदी का चीर हरण करने के लिए आगे बढ़ता है किंतु द्रौपदी को अपने तत्व पर सतीत्व पर पूर्ण विश्वास है और कहती है सत्य की हमेशा जीत होती है सत्य की ही जीत होती है|
बीते समय की बातें, अब यादे भले ही बन गयी हैं पर आज भी वो अच्छी लगती हैं |लोग चाह कर भी उस समय को भूल नहीं पाते ,अगर आप भी इतिहास के पन्नो को पलटकर उस समय के समाज और उस समय के माहौल को अच्छे से जानना समझना और महसूस करना चाहते हैं तो ये कहानी आपके लिए है, इसमें आजादी से पहले का भारत भी आपको नजर आएगा और उसके बाद का भी ,आओ इतिहास के पन्ने पलटें..
सत्य की जीत’ खण्डकाव्य के आधार पर धृतराष्ट्र सत्य और असत्य को असत्य कहकर अपने नीर-क्षीर विवेक का परिचय देते हैं। वह लोकमत का आदर करते हुए सभासदों को शान्त करते हुए कहते हैं वे यह भी स्वीकार करते हैं कि विश्व के सन्तुलित विकास के लिए हृदय और बुद्धि का समन्वित विकास आवश्यक है। वह दुर्योधन को आदेश देते हैं कि पाण्डवों को मुक्त कर दो एवं उन्हें उनका राज्य लौटा दो।
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