अर्थराइटिस एंड रूमेटिज़्म इंटरनेशनल (ARI )ने ‘विश्व गठिया दिवस’ की पहल की। जिसका उद्देश्य गठिया रोग के बारे में लोगों को जागरूकता पैदा करना है। गठिया किसी भी आयु वर्ग के लोग को प्रभावित कर सकता है। गठिया के मुख्य लक्षण जोड़ों के आसपास लालिमा ,दर्द और सूजन है।
यह विचार 2 अगस्त 2000 में साकार हुआ, जब संसद में झारखंड को अलग राज्य का दर्जा देने का बिल पास हुआ और 2000 में ही 15 नवंबर को झारखंड भारत का 28वां राज्य बनाया गया|
हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2004 में हुई, जब कनाडा में वर्ल्ड स्ट्रोक कांग्रेस ने इस दिन को मनाया। दो साल बाद वर्ष 2006 में इस दिन को जन जागरूकता के लिए घोषित किया गया। 2006 में, वर्ल्ड स्ट्रोक फेडरेशन और इंटरनेशनल स्ट्रोक सोसाइटी के विलय के साथ वर्ल्ड स्ट्रोक संगठन स्थापित हुआ। तब से, विश्व स्ट्रोक संगठन (डब्ल्यूएसओ) विभिन्न प्लेटफार्मों पर विश्व स्ट्रोक दिवस (डब्ल्यूएसडी) मनाता आ रहा है।
स्वर्गीय चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा सामाजिक समानता के प्रबल पक्षधर थे, उनके प्रयासों के चलते इस बांध का निर्माण संभव हुआ। 22 अक्टूबर 1963 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस बांध को राष्ट्र को समर्पित किया।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ मनाने का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। पहली बार विश्व मानसिक स्वास्थ्य संघ ने इसके लिए पहल की ।150 से भी अधिक देश इसके सदस्य हैं। इस बार की थीम ‘राइट टू मेंटल हेल्थ’ यानी मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार रक्खा गया है।
6 नवंबर 1913 को दमनकारी कानून के खिलाफ द ग्रेट मार्च निकाला। 2,000 से ज्यादा लोगों ने गांधीजी के नेतृत्व में नटाल तक मार्च किया। गांधीजी गिरफ्तार हुए। जमानत पर छूटे तो फिर मार्च में शामिल हो गए।
कार्तिक और केशव दोनों मित्र हैं कार्तिक जब आईआईटी की परीक्षा में टॉप करता है तो उसके अंदर कहीं ना कहीं अहंकार आ जाता है और इसी कारण वह केशव से कुछ ऐसा कह देता है जिससे केशव का आत्मविश्वास और भी कम हो जाता है और वह फेल हो जाता है लेकिन हमेशा जीतने वाले को क्या कभी हार का सामना नहीं करना पड़ता और हमेशा हारने वाला क्या कभी जिंदगी में सफल नहीं हो सकता इस बात को दर्शाती है कहानी हार में भी जी जीत है
कहानी जीवन की उस सत्यता से परिचय कराती है कि इंसान तभी अपनों की अहमियत का एहसास करता है, जब वह व्यक्ति उसके पास नहीं होता | कहानी में 62 वर्ष के राजीव निगम को जब सुबह यह पता चलता है कि उसकी पत्नी आरती रात में उसे और घर को छोड़कर कहीं चली गई है | तब राजीव निगम एहसास करता है कि आखिर 40 वर्ष साथ गुजारने के बाद, इस उम्र में आरती को यह कठोर फैसला क्यों लेना पड़ा होगा |धीरेंद्र अस्थाना की बेहद रोचक और दिल को छू लेने वाली कहानी है ‘पराधीन ‘,सुनते हैं नयनी दीक्षित की आवाज में…
उस दिन मैं बिना कुछ सोचे हुए ही भाई निराला जी से पूछ बैठी थी,” आपके किसी ने राखी नहीं बांधी?” ” कौन बहन हम जैसे भुक्कड़ को भाई बनावेगी?” मे, उत्तर देने वाले के एकांकी जीवन की व्यथा थी, या चुनौती ? यह कहना कठिन है ।पर जान पड़ता है किसी अन्य चुनौती के आभास ने ही मुझे उस हाथ के अभिषेक की प्रेरणा दी। उनके अस्त-व्यस्त जीवन को व्यवस्थित करने के असफल प्रयास का स्मरण कर मुझे आज भी हंसी आ जाती है। संयोग से उन्हें कहीं से ₹300 मिले। उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बनाने का आदेश दिया। अस्तु : नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराए तक का अनुमान- पत्र मैंने बनाया। उन्हें पसंद आया ।पर दूसरे ही दिन वह सवेरे आ पहुँचे। ₹50 चाहिए किसी विद्यार्थी की परीक्षा शुल्क भरना है वरना—–
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