अम्मा जब आगरा जाने लगी तो हफ्ता भर के लिए उन्होंने मुझे बेगम जान के पास छोड़ दिया। नवाब साहब , बेगम जान से शादी करके कुल साज़-ओ- सामान के साथ ही घर में रखकर भूल गए ।बेगम जी जान छोड़ कर बिल्कुल ही यासो हसरत की पोट ही बन गई। रब्बो ने उन्हें नीचे गिरते- गिरते संभाल लिया साथ खाती, साथ उठती -बैठती और माशाअल्लाह! साथ ही सोती थी। रब्बो और बेगम जान आम जलसों और मज़मूओ की दिलचस्प गुफ्तगू का मौजूँ थी। जहाँ उन दोनों का जिक्र आया और कहकहे उठे। लोग जाने क्या-क्या चुटकुले गरीब पर उड़ाते।
रामअवतार लाम पर से वापस आ रहा था। बूढ़ी मेहतरानी अब्बा मियां से चिट्ठी पढ़वाने आई थी। अभी उसकी शादी को रचाए साल भर भी न बीता था कि राम अवतार की पुकार आ गई। ब्याह कर आई तो क्या मसमसी थी गौरी नाम की गौरी थी पर कमबख्त स्याह बहुत थी। हाँ आवाज में बला की कूक थी। गौरी क्या थी, बस एक मरखना लंबे सींग वाला बजार था, कि छुटा फिरता था । रत्तीराम के आने के बाद वह बिल्कुल बदल गई ।लेकिन गाँव वालों को दाल में कुछ काला नजर आ रहा था। सब राम अवतार के लौटने का इंतजार कर रहे थे।
आज हम खुद को बहुत मॉर्डन, कल्चर्ड, इंटेलेक्चुअल समझते हैं। औरत और मर्द को बराबर समझने का दम भरते हैं। लेकिन कुछ जगहों पर, कुछ परिस्थितियों में हमारी सोच आज भी दकियानूसी और पुरानी है। ऐसा क्यों होता है ? क्या हम वास्तव में कभी अपनी सोच बदल पाएँगे ?क्या कभी मर्द और औरत बराबर हो पाएंगँ? ऐसे अनेकों प्रश्न जहन में उठते रहते हैं जिनके उत्तर शायद वक्त के पास है।
बहुत ज्यादा सुख भी नींद उड़ा देता है ,तो बहुत ज्यादा दुख भी ।कभी मखमल के बिस्तर पर भी नींद नहीं आती ,तो कभी जमीन पर भी चैन की नींद आ जाती है। दिल की गहराई में छुपा कोई जख्म भी कभी सोने नहीं देता और दिल की दबी ख्वाहिश भी नींद चुरा लेती है।
बाँदी यानी दासी, गुलाम। जिसकी अपनी कोई मर्जी नहीं होती, अपना कोई अस्तित्व नहीं होता। वो खरीदी जाती है, घर सँभालने के लिए ।हर जरूरत को पूरा करने के लिए। वह पत्नी की तरह सारे फर्ज निभाती है। लेकिन पत्नी का दर्जा नहीं पाती । उसे वह इज्जत ,वह ओहदा नहीं मिलता । आखिर क्यों ?और नवाबों के शौक, उनकी रंगीन तबीयत , बड़े ऊँचे खानदान की बहू बेटियों की रंगरलियाँ। सब छुप जाते हैं उनके दौलत के परदे के पीछे । तो क्या गरीब होना इतना बड़ा जुर्म है? अभिशाप है?
जब मैंने पहली बार उन्हें देखा तो वह रहमान भाई की खिड़की में बैठी लंबी-लंबी गालियाँ और कोसने दे रही थी । उस दिन पहली दफा मुझे मालूम हुआ कि हमारी इकलौती सगी फूपी, बादशाही खानम है। हर ईद- बकरीद को मेरे अब्बा मियां बेटों को लेकर सीधे फूपी अम्मा के यहाँ कोसने और गालियाँ सुनने जाया करते। मरते दम तक भाई- बहन का मिलन न हुआ । जब अब्बा मियां पर फालिश का चौथा हमला हुआ और बिल्कुल ही वक्त आ गया तो हलहलाती, छाती कूटती, सफेद पहाड़ की तरह भूचाल लाती हुई बादशाही खानम उसी ड्यूटी पर उतरी जहाँ अब तक उन्होंने कदम नहीं रखा था।
एक बार राजा विक्रमादित्य के सलाहकारों ने बताया कि पाताल लोक के राजा शेषनाग का ऐश्वर्य देखने लायक है| विक्रमादित्य ने सशरीर पाताल लोक जाकर उनसे भेंट करने की ठान ली |जब वह पाताल लोक पहुंचे तो शेषनाग उनके व्यवहार से अति प्रसन्न हुए और भेंट स्वरूप अलग-अलग खूबियों वाले चार बहुमूल्य रत्न उन्हें दिए |अब वापस मृत्युलोक पर लौटने पर राजा विक्रमादित्य ने उन बहुमूल्य बहुमूल्य रत्नों का क्या किया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सोलहवीं पुतली सत्यवती राजा विक्रमादित्य और पाताल लोक की यात्रा, शिवानी आनंद की आवाज में..
पांडु जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर धर्मराज के रूप में विश्व में जाने जाते रहे हैं |कहानी में इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलता है| जब यक्ष के प्रश्नों का उत्तर युधिष्ठिर के अन्य भाई नहीं दे पाते हैं ,तो उन सबको मृत्यु प्राप्त हो जाती है किंतु युधिष्ठिर यक्ष के प्रश्नों के उत्तर देकर यक्ष को प्रसन्न कर देते हैं और अपना मनचाहा वरदान भी प्राप्त कर लेते हैं |कैसे? इसे जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी यक्ष और युधिष्ठिर संवाद भाग -1 शिवानी आनंद की आवाज में …
विक्रमादित्य के द्वारा मृग के रूप में श्रापित राजकुमार को मृग रूप से मुक्ति दिला कर, पुनः राजकुमार को उसका राज्य वापस दिलाने की एक रोचक घटना है| जिसे सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी तीसवीं पुतली जयलक्ष्मी मृग रूप से मुक्ति, शिवानी आनंद की आवाज में..
धीरे-धीरे दोनों के बीच का फासला कम होता गया। जगदेई ने बेटी को किनारे कर लिया था। उसका हृदय तेजी से धड़क रहा था। दोनों व्यक्ति बराबर से निकले तो एक चुभती हुई दृष्टि उन्होंने सोनपती के गठे हुए सुडौल, मांसल शरीर पर डाली। सोनपती को शरीर में झुरझुरी-सी अनुभव होने लगी। हल्की-पीली चांदनी में उसके चेहरे का रंग तपे हुए तांबे के समान चमक उठा। बड़ा संभाल-संभालकर उसे कदम रखने पड़ रहे थे ताकि कड़े आपस में टकराने न पाएं। जगदेई और उसकी बेटी सोनपती एक रास्ते से गुजर रही है उसी रास्ते में दो अनजान व्यक्ति उन्हें अपना पीछा करते हुए लग रहे हैं| इससे दोनों भयभीत हो जाती हैं |बाद में क्या होता है पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं कहानी भय
बुढ़ापे में एकाकीपन और उसके कारण अवसाद को समेटे स्वाति तिवारी की कहानी बंद मुट्ठी बेहद भावुक कर देने वाली है जानते हैं कैसे एक वृद्धा जिसे सभी चाची कहते हैं अपना एकाकीपन किस प्रकार समेट रही है ?अंजू जेटली आवाज में
कहानी एक राजा और उनके चार पुत्रों की है राजा चाहता है उसके बाद उसका सबसे योग्य पुत्र राजगद्दी संभाले इसके लिए अपने चारों पुत्रों को राज्य से बाहर जाकर धन कमाने को कहता है शर्त के अनुसार जो सबसे अधिक धन अर्जित करेगा वही राजगद्दी का हकदार होगा पूरी कहानी सुनकर जानते हैं उन चारों में से सबसे योग्य पुत्र कौन था और क्यों हरिशंकर परसाई द्वारा लिखी गई कहानी जैसे उनके दिन फिरे”, अमित तिवारी जी की आवाज में
कहानी में नायक अपने जीवन में सबसे अटेंशन चाहता है अब उसे अटेंशन कैसे मिले उसके लिए उसके द्वारा कई उपाय किए जाते हैं आप कहानी के अंत में उसका एक उपाय सफल हो जाता है उपाय क्या है इस हास्य व्यंग की श्रेणी में सुनते हैं बेहद मनोरंजक कहानी अटेंशन अमित तिवारी जी की आवाज में
अचानक रात को संजीव के पास एक अनजान नंबर से मैसेज आने शुरू होते हैं |मैसेज करने वाली लड़की का दावा है कि वह संजीव से प्यार करती है और 10 साल से उसका इंतजार कर रही है |किंतु संजीव ऐसी किसी भी लड़की को नहीं जानता है कौन है वह अनजान लड़की ?और आगे कहानी में क्या होता है ?जानने के लिए सुनते हैं नज़्म सुभाष की लिखी हुई कहानी किसी नज़र को तेरा,अमित तिवारी की आवाज़ में….
Reviews for: Lihaf (लिहाफ़)