राजा विक्रमादित्य के शासन काल में उज्जैन राज्य की समृद्धि आकाश छूने लगी थी। उन दिनों एक सेठ हुआ जिसका नाम पन्नालाल था। वह बड़ा ही दयालु तथा परोपकारी था | अब जब पन्नालाल ने अपने बेटे हीरालाल के विवाह के संबंध में सोचा तो उसके सामने एक बहुत बड़ी समस्या आ गई | वह समस्या क्या थी और विक्रमादित्य ने उसे कैसे हल किया? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पन्द्रहवीं पुतली – सुंदरवती
एक बार राजा विक्रमादित्य दरबार में बैठे थे और दरबारियों से बातचीत कर रहे थे। बातचीत के क्रम में दरबारीयों में इस बात पर बहस छिड़ गई कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से। बहस का अन्त नहीं हो रहा था, क्योंकि दरबारियों के दो गुट हो चुके थे। एक कहता था कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है क्योंकि मनुष्य का जन्म उसके पूर्वजन्मों का फल होता है। राजा विक्रमादित्य ने किस प्रकार प्रत्यक्ष उदाहरण देकर इस बहस का अंत किया? यह जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी की कहानी तेइसवीं पुतली धर्मवती मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से ,शिवानी आनंद की आवाज में …
पहली पुतली रत्नमंजरी राजा विक्रम के जन्म तथा इस सिंहासन प्राप्ति की कथा बताती है। वह जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पहली पुतली रत्नमंजरी
विक्रमादित्य के सिंहासन की दूसरी पुतली चित्रलेखा द्वारा सुनाई गई कहानी जिसमें एक साधु विक्रमादित्य को एक फल देता है और उसे एक यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होने का वरदान देता है |क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी विक्रम और बेताल की कहानियों में से एक कहानी सिंघासन बत्तीसी -दूसरी पुतली चित्रलेखा
राजा विक्रमादित्य ने एक बार अद्भुत- अलौकिक स्वप्न देखा| उस अद्भुत- अलौकिक सपने की उन्होंने ज्योतिषियों से अपने सपने की चर्चा की और उन्हें इसकी व्याख्या करने को कहा। सारे विद्वान और पण्डित इस नतीजे पर पहुँचे कि महाराजाधिराज ने सपने में स्वर्ग का दर्शन किया है तथा सपने का अलौकिक महल स्वर्ग के राजा इन्द्र का महल है। देवता शायद उन्हें वह महल दिखाकर उन्हें सशरीर स्वर्ग आने का निमन्त्रण दे चुके है। किंतु क्या वास्तव में सपने की सत्यता यही साबित हुई इसे जानने के सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी अट्ठाईसवीं पुतली वैदेही स्वर्ग की यात्रा, शिवानी आनंद की आवाज में…
अचानक एक दिन राजा विक्रमादित्य को एक औरत के रोने की आवाज सुनाई दी राजा उसकी मदद हेतु उसी दिशा में चल दिया ,उस औरत की क्या वास्तविकता है और और राजा ने उसी किस प्रकार मदद की? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में से एक कहानी सिंहासन बत्तीसी-सातवीं पुतली कौमुदी शिवानी आनंद की आवाज में..
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