द्यूत क्रीड़ा में युधिष्ठिर के द्वारा द्रौपदी को भी दाँव लगाने के पश्चात, हार जाने के पश्चात, दुर्योधन ने अपने अनुज भाई दुशासन से से भरी सभा में द्रोपदी का चीर हरण करने का आदेश दिया |इसके उपरांत क्या हुआ?इस कथा को जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी द्रौपदी चीर हरण ,शिवानी आनंद की आवाज में…
बाँकुड़ा में रहने वाली एक लड़की अन्नपूर्णा शादी के बाद मुंबई जा बसी है |आज 1 साल के बाद हो अपने मां -बापू को खत लिख रही है| बचपन में बरसात के आने पोखर पर जाकर के केंचुओं को मार देती थी जो उसके लिए आनंद का कार्य था किंतु आज वही अन्नपूर्णा को बरसात अच्छी नहीं लगती और केंचुओं से उसे डर लगता है क्यों ? ऐसा क्या हो गया अन्नपूर्णा के साथ जो उसके लिए जो आनंद था आज मैं उसका भय का कारण हो गया? इसे जानने के लिए सुनते हैं सुधा अरोड़ा के द्वारा लिखी गई कहानी अन्नपूर्णा मंडल की आखिरी चिट्ठी, शिवानी आनंद की आवाज में…
विक्रमादित्य के सिंहासन की दूसरी पुतली चित्रलेखा द्वारा सुनाई गई कहानी जिसमें एक साधु विक्रमादित्य को एक फल देता है और उसे एक यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होने का वरदान देता है |क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी विक्रम और बेताल की कहानियों में से एक कहानी सिंघासन बत्तीसी -दूसरी पुतली चित्रलेखा
ये एक ऐसे युगल की कहानी है जो कार से ड्राइव करते हुए दूर किसी पार्टी में जा रहे हैं और उनमें निरंतर एक अन्य युगल, जिसका नाम मिस्टर एंड मिसेज मेहता है की आमदनी और जीवनशैली को लेकर बातचीत और नोकझोक चल रही है। अंततः एक फोन से उन्हें अवगत कराया जाता है कि मिस्टर मेहता का सारा दिखावा झूठ था और अब वह दिवालिया हो गए हैं।
मिश्राजी यूं तो बिजली का बिल कम आए इसके लिए मीटर रीडिंग लेने आने वाले अली भाई से पैसे देकर सेटिंग जमाए हुए हैं लेकिन अंत में पाते हैं की उनकी सेटिंग की अपेक्षा उनके घर काम करने वाली बाई की सेटिंग ज्यादा कारगर है।
जहां चाह वहां राह की कहावत को सार्थक करती कहानी। जिसमें चार चोर चोरी की राह छोड़ एक आम इंसान का जीवन बिताते हुए सबके लिए कहानी वाले बाबा बन जाते हैं।
किसी झूठ की बार- बार पुनरावृत्ति होने पर ,वह सच की भांति प्रतीत होने लगता है किंतु ऐसे समय अपनी बुद्धि का प्रयोग करना अति आवश्यक हो जाता है| ऐसा ही कुछ उस ब्राह्मण के साथ होता हैजब वह अपनी बुद्धि का प्रयोग और अपने पर विश्वास ना करके ठगों के द्वारा ठगा जाता है | किस प्रकार?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी बकरा और ब्राह्मण, शिवानी आनंद की आवाज में…
महाभारत के युद्ध में कर्ण के बाणों से युधिष्ठिर का शरीर आच्छादित हो चुका था और उनकी पराजय लगभग तय थी किंतु उसी क्षण ऐसा क्या हुआ युधिष्ठिर अपने प्राण कर्ण के बाणों से बचा पाए ,पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में महाभारत की कहानी में से एक कहानी युधिष्ठिर की पराजय
विराट पर्व में अज्ञातवास की अवधि में विराट नगर में रहने के लिए गुप्तमन्त्रणा, धौम्य द्वारा उचित आचरण का निर्देश, युधिष्ठिर द्वारा भावी कार्यक्रम का निर्देश, विभिन्न नाम और रूप से विराट के यहाँ निवास, भीमसेन द्वारा जीमूत नामक मल्ल तथा कीचक और उपकीचकों का वध, दुर्योधन के गुप्तचरों द्वारा पाण्डवों की खोज तथा लौटकर कीचकवध की जानकारी देना, त्रिगर्तों और कौरवों द्वारा मत्स्य देश पर आक्रमण, कौरवों द्वारा विराट की गायों का हरण, पाण्डवों का कौरव-सेना से युद्ध, अर्जुन द्वारा विशेष रूप से युद्ध और कौरवों की पराजय, अर्जुन और कुमार उत्तर का लौटकर विराट की सभा में आना, विराट का युधिष्ठिरादि पाण्डवों से परिचय तथा अर्जुन द्वारा उत्तरा को पुत्रवधू के रूप में स्वीकार करना वर्णित है।महाभारत की कहानियों में से एक कहानी विराट पर्व में ,जिसे सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में…
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