श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 18
मोक्ष-संन्यास योग
महाभारत के युद्धक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया यह अंतिम और सबसे व्यापक उपदेश है। अध्याय 18 में श्रीकृष्ण त्याग, संन्यास, कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष के गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में समझाते हैं।
यह अध्याय बताता है कि सच्चा संन्यास कर्मों का त्याग नहीं, बल्कि उनके फल की आसक्ति का त्याग है। मनुष्य अपने स्वभाव और कर्तव्य के अनुसार कर्म करते हुए भी आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। श्रीकृष्ण अर्जुन को जीवन का अंतिम संदेश देते हुए कहते हैं कि जब मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ ईश्वर की शरण में आता है, तब वह सभी बंधनों से मुक्त होकर परम शांति और मोक्ष को प्राप्त करता है।
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज” जैसे अमर उपदेशों से युक्त यह अध्याय गीता का सार माना जाता है, जो जीवन में कर्तव्य, समर्पण और आत्मबोध का मार्ग दिखाता है।
🎧 सुनिए श्रीमद्भगवद्गीता का अठारहवाँ अध्याय – मोक्ष-संन्यास योग, और जानिए जीवन, कर्म और मुक्ति के अंतिम सत्य को — केवल Gaatha पर।
Shrimad Bhagwat Gita adhyay-18 By Sri Anup Jalota
Credit: International Gita society
मानव है मेरे राम – Episode -12- Dr. Pradeep Dixit
जानिए क्यों राम के कारण ऋषियों को खतरा था चित्रकूट में । “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l
Maa Chandraghanta
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है।चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है।चेहरा शांत एवं सौम्य है और मुख पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही होती है। माता के सिर पर अर्ध चंद्रमा मंदिर के घंटे के आकार में सुशोभित हो रहा जिसके कारण देवी का नाम चन्द्रघंटा हो गया है।अपने इस रूप से माता देवगण, संतों एवं भक्त जन के मन को संतोष एवं प्रसन्न प्रदान करती हैं। मां चन्द्रघंटा अपने प्रिय वाहन सिंह पर आरूढ़ होकर अपने दस हाथों में खड्ग, तलवार, ढाल, गदा, पाश, त्रिशूल, चक्र,धनुष, भरे हुए तरकश लिए मंद मंद मुस्कुरा रही होती हैं। इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए। इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। इसलिए हमें चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करना चाहिए। इससे सारे कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद के अधिकारी बन सकते हैं। यह देवी कल्याणकारी है।मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जन्म-जन्म का डर समाप्त हो जाता है और जातक निर्भय बन जाता हैं।
Chants credit- Jyoti upreti sati
मानव है मेरे राम – Episode – 4- Dr. Pradeep Dixit
जानिए कहाँ गाया जाता है, राम को जगाने वाला श्लोक ??? “मानव हैं मेरे राम” की इस कड़ी में | मानव हैं मेरे राम- राम की अनसुनी कहानी प्रदीप दीक्षित की जुबानी l अगली कड़ी में सुनिए क्यों अहिल्या और इंद्रा दोनों एक दूजे के लिए थे |
Reviews for: Manu Shastra (Rigveda) मनु शास्त्र (ऋग्वेद)