उनकी देहयष्टि में ऐसा कुछ उग्र या रौद्र नहीं था, जिसकी हम वीर गीतों की कवियत्री में कल्पना करते हैं। बहन सुभद्रा का चित्र बनाना कुछ सहज नहीं है। गोल मुख , चौड़ा माथा , सरल भ्रकुटियाँ , बड़ी भावस्वात आँखें, छोटी सुडौल नासिका, हँसी को जमा कर गढ़े हुए से होंठ, दृढ़ता सूचक ठुड्डी, सब कुछ मिलकर अत्यंत निश्चल, कोमल, उदार व्यक्तित्व वाली भारतीय नारी। एक बार मृत्यु की चर्चा चल पड़ी थी। उन्होंने कहा ,”मेरे तो मन में मरने के बाद भी धरती छोड़ने की कल्पना नहीं है । मैं चाहती हूँ मेरी समाधि हो। जिसके चारों ओर नित्य मेला लगता रहे। बच्चे खेलते रहे ।स्त्रियाँ गाती रहे और कोलाहल होता रहे।
उनकी देहयष्टि में ऐसा कुछ उग्र या रौद्र नहीं था, जिसकी हम वीर गीतों की कवियत्री में कल्पना करते हैं। बहन सुभद्रा का चित्र बनाना कुछ सहज नहीं है। गोल मुख , चौड़ा माथा , सरल भ्रकुटियाँ , बड़ी भावस्वात आँखें, छोटी सुडौल नासिका, हँसी को जमा कर गढ़े हुए से होंठ, दृढ़ता सूचक ठुड्डी, सब कुछ मिलकर अत्यंत निश्चल, कोमल, उदार व्यक्तित्व वाली भारतीय नारी। एक बार मृत्यु की चर्चा चल पड़ी थी। उन्होंने कहा ,”मेरे तो मन में मरने के बाद भी धरती छोड़ने की कल्पना नहीं है । मैं चाहती हूँ मेरी समाधि हो। जिसके चारों ओर नित्य मेला लगता रहे। बच्चे खेलते रहे ।स्त्रियाँ गाती रहे और कोलाहल होता रहे।
महादेवी वर्मा जी के द्वारा लिखा गया प्रेमचंद्र जी के लिए संस्मरण सुनते हैं नयनी दीक्षित जी की आवाज में
रामा बेहद भद्दा बेडौल था। लेकिन उसका मन उतना ही सुंदर और भोला था ।इसी से रामा हमें बेहद अच्छा लगता था। घर में सभी कामों के लिए नौकर थे इसलिए हमारी जिम्मेदारी रामा को सौंपी गई ।हम रामा को बहुत परेशान करते थे ।एक दिन माँ से खूब विनती के उपरांत रामा हम सबको मेला दिखाने ले गया । एक को कंधे पर उठाकर दूसरे का हाथ पकड़कर और तीसरेको साथ रहने का कहकर वह मेला दिखाने लगा । मैं भीड़ में खो गई ।वह बेहाल हो गया मुझे ढूँढता रहा । घर आकर इस बात के लिए उसे खूब डाँट पड़ी ।उसका वात्सल्य , उसका प्रेम हमारे प्रति कभी कम ना हुआ।
नीलाभ ग्रीवा के कारण मोर का नाम नीलकंठ और उसकी छाया के समान रहने के कारण मोरनी का नामकरण हुआ राधा। नीलकंठ ने अपने आप को चिड़ियाघर का सेनापति और संरक्षक नियुक्त कर लिया ।उसके अपत्य स्नेह का हमें ऐसा प्रमाण मिला कि हम विस्मित रह गए। एक शिशु खरगोश साँप की पकड़ में आ गया। नीलकंठ ने साँप को चोंच से घायल कर दो खंडों में विभाजित कर दिया। नीलकंठ और राधा साथ रहते थे किंतु नई मोरनी, कुब्जा को यह कतई पसंद नहीं था । वह नीलकंठ के साथ रहना चाहती थी । नीलकंठ व्याकुल रहने लगा और अंततः मर गया।
उनकी देहयष्टि में ऐसा कुछ उग्र या रौद्र नहीं था, जिसकी हम वीर गीतों की कवियत्री में कल्पना करते हैं। बहन सुभद्रा का चित्र बनाना कुछ सहज नहीं है। गोल मुख , चौड़ा माथा , सरल भ्रकुटियाँ , बड़ी भावस्वात आँखें, छोटी सुडौल नासिका, हँसी को जमा कर गढ़े हुए से होंठ, दृढ़ता सूचक ठुड्डी, सब कुछ मिलकर अत्यंत निश्चल, कोमल, उदार व्यक्तित्व वाली भारतीय नारी। एक बार मृत्यु की चर्चा चल पड़ी थी। उन्होंने कहा ,”मेरे तो मन में मरने के बाद भी धरती छोड़ने की कल्पना नहीं है । मैं चाहती हूँ मेरी समाधि हो। जिसके चारों ओर नित्य मेला लगता रहे। बच्चे खेलते रहे ।स्त्रियाँ गाती रहे और कोलाहल होता रहे।
मुंशी राम सेवक की सारी धाक मिट्टी में मिल गई। बूढ़ी विधवा, मूंगा के पैसे हड़प करना उन्हें रास ना आया। ब्राह्मणी मूंगा ने उनके द्वार पर प्राण क्या त्यागे, सारे गाँव ने उनसे मुँह मोड़ लिया ।मूंगा के भूत का डर अलग से सताने लगा। पत्नी नागिन चल बसी। बेटा रामगुलाम रिफारमेंट्री स्कूल में भर्ती हो गया ।और खुद रामसेवक साधु हो गए। गरीब की हाय उनके पूरे परिवार को लील गई।
मैं नौकरी की तलाश में था, कि मुझे एक विज्ञापन दिखा’ प्राइवेट सेक्रेट्री’ चाहिए। तुरंत हाँ का तार भेज दिया। वहां पहुँचकर, जब मैं अपने मालिक से मिलने गया, तो मेरे आश्चर्य की सीमा न रही। मेरा मालिक ,एक अति रूपवान ,ज्वाला सी दीप्तिमान रमणी थी। मुझे वहा
“शोभना भरतिया, एचटी मीडिया की चेयरपर्सन और भारत की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक, जो देश के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्यों में से एक का नेतृत्व करती हैं। पत्रकारिता की दुनिया में अपने बेहतरीन दृष्टिकोण और नेतृत्व से उन्होंने नई मिसालें कायम की हैं। राजसभा सदस्य और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक आदर्श लीडर के रूप में स्थापित किया है। शोभना भरतिया की कहानी एक प्रेरणा है, जो बताती है कि कैसे मजबूत नेतृत्व और साहसिक फैसले किसी को ऊँचाइयों पर पहुंचा सकते हैं।
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दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें जिंदगी अपनी शर्तों पर जीने की आदत होती है। वह किसी की परवाह नहीं करते। लोग क्या कहेंगे ? क्या सोचेंगे? अगर किसी को बुरा लगा तो ? वगैरह -वगैरह जैसे प्रश्नों के बारे में तो सोचते ही नहीं। लाख मुश्किलें आएँ, वह अपने तरीके से उसका सामना करते हैं। ऐसे लोगों को दुनिया की परवाह नहीं होती। लेकिन कुछ तो होता है, जो उनकी शख्सियत को भी हिला देता है। लेकिन क्या?
“सोमा मोंडल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) की पहली महिला अध्यक्ष, जिन्होंने अपने नेतृत्व और दूरदृष्टि से भारतीय स्टील उद्योग में नए आयाम स्थापित किए हैं। फोर्ब्स द्वारा दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल, सोमा मोंडल की यात्रा प्रेरणादायक है। उनके प्रबंधन के पहले साल में सेल का मुनाफा तीन गुना बढ़ा और उन्होंने कंपनी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। एक छोटे से ओडिया परिवार से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इतिहास रचा।
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सुमेश नंदा एक प्रख्यात चित्रकार है उसके चित्रों की चित्रकला प्रदर्शनी लगी हुई है लेखिका की आंखें दो विशेष चित्रों को बहुत गौर से देख रही है इन दोनों विशेष चित्रों में एक चित्र चाय बागान में चाय की पत्तियों का है और दूसरा एक खूबसूरत पहाड़ी लड़की के साथ एक जाम की तस्वीर | सुमेश नंदा के इन दोनों विशेष चित्रों के पीछे एक बेहद भावुक और उसके जिंदगी से जुड़ी कहानी है क्या है पहाड़ी लड़की की तस्वीर से सुमेश नंदा का कोई संबंध ? क्या है इसके पीछे की कहानी? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अमृता प्रीतम के द्वारा लिखी गई कहानी एक लड़की एक जाम अनुर्वी मेहरा के द्वारा
कहानी में एक युवती अपनी दोनों बेटियों के साथ अकेली है |ठंड की एक रात अचानक उसके यहां 60…65 साल का आदमी चादर लपेटे एक वृद्ध व्यक्ति आ जाता है ,जो अपने को उनका रिश्तेदार बतलाता है| अब युवती बेहद असमंजस की स्थिति में है, अतिथि को अपने घर आने दे अथवा नहीं| अब आगे क्या होता है जानने के लिए सुनते हैं सिनीवाली द्वारा लिखी गई कहानी अतिथि, निधि मिश्रा की आवाज में….
कहानी निशिकांत के दफ्तर की है जिसमें निशिकांत और सहकर्मी छोटे -बाबू के बीच में कहा-सुनी हो जाती है |इस कहा-सुनी की क्या वजह रही और यह कहासुनी बहुत हद तक बढ़ जाती है और उसके बाद क्या फिर से उनके बीच दोस्ती हो पाती है ? कहानी में आगे क्या होता है ?इस पूरी कहानी को जानने के लिए सुनते हैं विष्णु प्रभाकर के द्वारा लिखी गई कहानी दफ्तर में नयनी दीक्षित की आवाज में
अगर मर्द बिना मूछों के रहे तो वह मर्द नहीं लगता |एक मूंछ ही तो मर्दाना चेहरे के लिए अनिवार्य होती है और मेरे पति ने एक नौकरानी की भूमिका निभाने के लिए अपनी मूंछे कटवा ली |अब तो शायद ने उन्हें प्यार भी ना कर सकूं| और मर्दों में मूछों के बिना कोई आकर्षण नहीं | मर्दों की मूछों को लेकर एक स्त्री अपनी दोस्त से यह सब बातें क्यों कह रही है ?इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? इसे जानने के लिए सुनते हैं गाय दी मोपासां की कहानी मूंछ,नयनी दीक्षित की आवाज में …
कहानी में नायक को किसी कार्य के लिए कुछ रुपए दिए जाते हैं, जिसे नायक को दूसरे तक पहुंचाने होते हैं किंतु नायक पैसे ना पहुंचा कर अपनी बीमार मां और अपनी बहन शशि से मिलने अपने घर चला जाता है घर जाने पर मां की असमय मृत्यु हो जाती है और बहन अपने भाई के जीवन में किसी प्रकार की बाधा ना पड़े यह विचार कर अपने प्राण त्याग देती है| नायक द्वारा समय से पैसा ना पहुंचाने के कारण उस पर विश्वासघात का आरोप लगाया जाता है| क्या है पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं अज्ञेय के द्वारा लिखी गई कहानी क्षमा ,जिसे आवाज दी है अमित तिवारी जी …
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Rajesh
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