कुसुम जिसे घाट पर बैठकर घंटो पानी की लहरें देखना अच्छा लगता था, अपने वैधव्य के बाद प्रेम में पड़कर उसे न पा सकने के दुख को बर्दाश्त न करते हुए उसी घाट पर उन्ही लहरों में समा गई।
एक बार कृष्णदेव राय ने उदारता दिखाते हुए एक बूढ़े भिखारी को शॉल पहनाया| सब ने राजा की बहुत तारीफ करी किंतु तेनाली रामा कुछ नहीं बोले |ऐसे में राजा को क्रोध आ गया |क्या कारण था कि तेनालीरामा ने राजा की उदारता पर प्रसन्नता नहीं नहीं जाहिर की| पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं तेनाली रामा की कहानियों में से एक कहानी बूढ़ा भिखारी शिवानी आनंद की आवाज में
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