विवाह एक ऐसा बंधन है जिसमें बंधकर हर लड़की को अपने प्रियजनों से विदा लेनी पड़ती है। हेम भी इसी बंधन में बंध कर अपने पिता से दूर अपने ससुराल चली आई थी किंतु तब ये किसने जाना था कि यह विदा एक दिन अनंत कालीन विदा बन जाएगी|
यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो अपनी महत्वकांक्षाओ के चलते अपने बचपन की सहचरी सुरबाला से विवाह के लिए इंकार कर देता है और जब जीवन के यथार्थ पर उतरकर देखता है तो उसे एहसास होता है कि उसने सिर्फ सुरबाला ही नहीं बल्कि सब कुछ खो दिया।
पहली पुतली रत्नमंजरी राजा विक्रम के जन्म तथा इस सिंहासन प्राप्ति की कथा बताती है। वह जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पहली पुतली रत्नमंजरी
बेताल पच्चीसी की कहानियों में से एक कहानी जिसमें अंग देश का राजा यशकेतु बेहद बिलासी प्रवृत्ति का राजा है और उसके राज्य का सारा कार्य उसका दीवान करता है |कहानी के अंत में जब राजा एक खूबसूरत स्त्री को अपने से विवाह हेतु राज्य में लाता है तो दीवान की हृदयाघात से मृत्यु हो जाती है| ऐसा क्यूँ ? इसका कारण जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में कहानी दीवान की मृत्यु क्यूँ….
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