17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के रूप में घोषित किया। इस दिवस का उद्देश्य सभी देशों को गरीबी और निराश्रयता के उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय संदर्भ में उपयुक्त, ठोस कार्रवाई के लिए प्रेरित करना है।
खंडू भाई देसाई का जन्म 23 अक्टूबर, 1898 ई. को गुजरात के वलसाड ज़िले में हुआ था। वलसाड में आरंभिक शिक्षा के बाद वे मुम्बई के विलसन कॉलेज में भर्ती हुए। परंतु 1920 में महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन में कॉलेज का बहिष्कार करके बाहर आ गए।
ऑपरेशन पवन: श्रीलंका की धरती पर भारतीय सेना का खतरनाक मिशन|इस मिशन के बाद भारतीय सेना ने लिट्टे को काफी हद तक कमज़ोर कर दिया था. 1987 था जब भारतीय शांति सेना ने श्रीलंका में जाफना को लिट्टे के कब्जे से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन पवन शुरू किया था।
सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश फातिमा बीबी नियुक्त हुई ।जिनका पूरा नाम मीरा साहब फातिमा बीवी है। सेवानिवृत होने होने के बाद वह राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सदस्य भी रही। वह तमिलनाडु की राज्यपाल भी रह चुकी है।
6 अक्टूबर 1860 ब्रिटिश काल में भारतीय दंड संहिता( IPC) पारित हुआ ।उस समय इसकी रचना लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में गठित प्रथम भारतीय विधि आयोग द्वारा की गई ।यह कानून अपराधों को बताता है तथा अपराधों की सज़ा और ज़ुर्माना भी तय करता है। IPC में कई बार संशोधन हुआ. जिसमें कई बार अपराध जोड़े भी गए तो कई बार अपराध हटाए भी गए।
6 अक्टूबर 1893 में बंगाल प्रेसीडेंसी में मेघनाथ साहा का जन्म हुआ ।साहा सुप्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक रहे। गणित और भौतिकी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान रहे ।साहा इक्वेशन के लिए यह प्रसिद्ध हैं। जिसके जरिए तारों में भौतिक एवं रासायनिक स्थिति की व्याख्या की जा सकती है ।साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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कहानी एक ऐसे ऊंट की है जिसकेअविवेक से उसे शेर का शिकार बनना पड़ा |कैसे ?इसे जानने के लिए सुनते हैं पंचतंत्र की कहानियों में से एक कहानी अविवेक का मूल्य शिवानी आनंद की आवाज में
सत्य की जीत के इस प्रसंग में द्युत सभा में युधिष्ठिर जब द्रौपदी को भी हार जाते हैं तब दुशासन द्वारा द्रौपदी का द्युत सभा में चीरहरण करने के आगे बड़ने पर भी समस्त धर्माचार्य भीष्म पितामह ,द्रोणाचार्य ,विदुर सहित सभी इस दृश्य को देख मौन हैं ऐसे में सिर्फ कौरवों में विकर्ण पुरज़ोर विरोध करता है ऐसे में कर्ण क्या कहता है। द्वारिका प्रसाद महेश्वरी के द्वारा लिखी गई महाभारत में द्युत सभा का वर्णन नयनी दीक्षित की आवाज़ में
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