श्रीमती ने बालपन में ही खेल -खेल में मंदिर के एक मुनि को अपना पति स्वीकार कर लिया | अब श्रीमती सयानी हो चुकी है तो उसके सामने विवाह के कई प्रस्ताव आ रहे हैं और वह सब को अस्वीकार कर रही है| क्या वास्तव में श्रीमती को मुनि पति के रूप में प्राप्त होते हैं? क्या मुनि गृहस्थ जीवन स्वीकार करते हैं ? इंद्र चंद्र शास्त्री जी के द्वारा लिखी गई कहानी प्रेम के धागे जानते हैं सुमन वैद्य जी की आवाज में …
जहाँ चील की आँखें अपने लक्ष्य को देख कर वार करती हैं, वहाँ वे अदृश्य चीलें अंधी होती हैं, और अंधाधुंध हमला करती हैं। उन्हें झपट्टा मारते हम देख नहीं पाते और हमें लगने लगता है कि जो कुछ भी हुआ है, उसमें हम स्वयं कहीं दोषी रहे होंगे। नायक की पत्नी शोभा नायक के साथ नहीं रहती है अचानक एक दिन नायक को शोभा एक पार्क में दिखाई देती है| नायक फिर से शोभा से मिलना चाहता है |क्या नायक का शोभा से पुनः मिलन हो पाएगा ? पूरी कहानी जाने के लिए सुनते हैं भीष्म साहनी के द्वारा लिखी गई कहानी चीले, सुमन वैद्य जी की आवाज में…
इस दुराचारी ने अपने स्वार्थ के लिए न मालूम कितनी बालाओं का जीवन नष्ट कराया है उन्हें पथभ्रष्ट कर दिया है। जिस आदरणीय दृष्टि से इस नीच समाज में देखा जाता है वास्तव में यह नीच उसके योग्य नहीं, वरन यह नर पशु है, लोलुपी है, लम्पट है। सिंह की खाल ओढ़े हुए तुच्छ गीदड़ है-रंगा सियार है। मुक्ता पंडित जी से संगीत की शिक्षा ले रही है किंतु पंडित जी दलाली जैसा घिनौना कृत्य करते हैं मुक्ता को भी इसी प्रयोजन का हिस्सा बनाने के आशय से मुक्ता की मुलाकात मणिधर से करवाते हैं मुक्ता जब गर्भ से हो जाती है तो समाज सारा दोष मुक्ता पर मढ़ देता है किंतु क्या पंडित जी और मणिधर को अपने कृत्य पर कोई अफसोस होता है और क्या वे प्रायश्चित करते हैं जानने के लिए सुनते हैं अमृतलाल नागर द्वारा लिखी गई कहानी प्रायश्चित सुमन वैद्य की आवाज में
चंद्रप्रकाश b.a. पास करके ठाकुर जी के बेटे को ट्यूशन पढ़ा कर अपनी जीविका चला रहा है | ठाकुर जी का पूरा परिवार चंद्र प्रकाश को अपने बेटे के समान प्यार और सम्मान देते हैं, किंतु कहानी के प्रसंग में चंद्रप्रकाश की नियत बदल जाती है और ठाकुर जी के यहां गहनों चोरी करता है |क्या चंद्र प्रकाश को अपने द्वारा किए गए गलत कार्य का कोई पश्चाताप होगा? क्या चंद्र प्रकाश की चोरी पकड़ी जाएगी? क्या ठाकुर जी का व्यवहार चंद्रप्रकाश के प्रति बदल जाएगा? संवेदना से भरी प्रेमचंद्र की कहानी चमत्कार में सुनते हैं, सुमन वैद्य जी की आवाज में….
हिंदुस्तान -पाकिस्तान में जब बंटवारा हुआ था तब कुछ ऐसे स्वार्थ परस्त लोग जो मजहब ,धर्म का नाम लेकर, उसकी आड़ लेकर सिर्फ -सिर्फ अपना फायदा करने में लगे हुए थे। उनके लिए किसी के भी जज्बात कोई मायने नहीं रखते थे। ऐसे ही एक शख्स की कहानी है।”मलबे का मालिक”
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