माता सीता समस्त नारी जाति के लिए अभिमान और प्रेरणा स्रोत हैं। एक स्त्री के सभी शक्ति रूप जिनमें समाहित है। एक पतिव्रता स्त्री होने के साथ-साथ एक ओजस्विनी नारी का पर्याय भी है ।रावण जैसे त्रिलोक विजेता के समक्ष निर्भीकता से रहना अपने आप में एक अद्वितीय है। सीता के जन्म से लेकर उनके संघर्ष, प्रेम समर्पण की पूरी कथा सुनिए गाथा पर
अहिल्या, महर्षि गौतम की पत्नी हैं। अनेक हिन्दू शास्त्रों में उनकी कथा का वर्णन है, जिसमें देवराज इंद्र द्वारा उनके साथ किए गए छल, उनके पति द्वारा उनकी निष्कामता के लिए श्राप, और उनके श्राप से मुक्ति की वर्णन है जो भगवान राम द्वारा होती है।
मांडवी और उर्मिला का यह अद्भुत त्याग और समर्पण सीता के समान महान था, जो उन्होंने अपने पतियों और परिवार के प्रति दिखाया।
कौशल्या दक्षिण राज्य कौशल के राजा सुकौशल और रानी अमृत प्रभा की पुत्री थी। वह राजा दशरथ की प्रथम पत्नी थी और प्रभु श्री राम की मां। उन्होंने एक पुत्री को जन्म दिया था, जिसका नाम था शांता। शिकार के दौरान राजा दशरथ को मिली कैकेयी, जो उनकी दूसरी पत्नी थी और भरत की मां। कैकेयी युद्ध कला में पारंगत थीं और श्री राम के लिए अत्यंत प्रिय थीं। उन्होंने भरत को राजगद्दी प्राप्त करवाने के लिए श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिलवाया। द्वापर युग में, कैकेयी ने देवकी के रूप में पुनर्जन्म लिया।
Maa Skandamata
नवरात्रि के पंचम दिन मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की जाती है। स्कंद माता का रूप सौंदर्य अद्वितिय आभा लिए शुभ्र वर्ण का होता है। वात्सल्य की मूर्ति हैं स्कंद माता। मान्यता अनुसार संतान प्राप्ति हेतु मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है।पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता। कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है।
स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है।
रामायण, भारतीय साहित्य की अनुपम कृति, जिसमें नारी शक्ति के अद्वितीय आयामों का गहराई से चित्रण किया गया है, इस नवरात्रि “रामायण की 9 महान नारी शक्तियाँ”- नौ असाधारण महिला पात्रों की कहानियों के माध्यम से, नारी शक्ति की अनेक स्वरूपों को प्रस्तुत करती है।अनुपम रमेश किंगर की सुमधुर आवाज़ में इन कहानियों को सुनना न केवल आपको भावविभोर कर देगा बल्कि आपको नारी शक्ति की अदम्य गाथा के प्रत्येक पहलू से रूबरू भी कराएगा। यह सिर्फ़ और सिर्फ़ “गाथा” पर उपलब्ध है
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