महाभारत का घमासान युद्ध चल रहा था |युद्ध में दुर्योधन और युधिष्ठिर का आमना -सामना होने पर दोनों के द्वारा शस्त्रों की वर्षा होने लगी| ऐसा समय भी आया जब युधिष्ठिर के प्रहारों से दुर्योधन मूर्छित हो गया |ऐसे समय भीमसेन ने आकर युधिष्ठिर से दुर्योधन का प्राण दान मांगा| आखिर क्या वजह थी कि भीम ने दुर्योधन प्राण –दान, युधिष्ठिर से क्यों मांगा |इसके पीछे की कहानी जानने के लिए सुनते हैं महाभारत की कहानियों में से एक कहानी दुर्योधन का प्राण दान, शिवानी आनंद की आवाज में
राजा कृष्णदेव राय बहुत बड़े कला प्रेमी थे| इस संदर्भ में कलाकारों को तेनाली रामा की सलाह से सम्मानित भी करते थे| इस बात से राज दरबार के अन्य लोग तेनालीरामा से चिढ़ते थे उन्होंने तेनाली रामा के ऊपर रिश्वतखोर होने का आरोप लगा दिया| अब तेनालीरामा ने इस आरोप को कैसे गलत सिद्ध किया ?इस रोचक किस्से को सुनते हैं तेनाली रामा की कहानी में से एक कहानी रिश्वत का खेल सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में….
राजा विक्रमादित्य के शासन काल में उज्जैन राज्य की समृद्धि आकाश छूने लगी थी। उन दिनों एक सेठ हुआ जिसका नाम पन्नालाल था। वह बड़ा ही दयालु तथा परोपकारी था | अब जब पन्नालाल ने अपने बेटे हीरालाल के विवाह के संबंध में सोचा तो उसके सामने एक बहुत बड़ी समस्या आ गई | वह समस्या क्या थी और विक्रमादित्य ने उसे कैसे हल किया? पूरी कहानी जानने के लिए सुनते हैं शिवानी आनंद की आवाज में सिंहासन बत्तीसी-पन्द्रहवीं पुतली – सुंदरवती
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